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कुलदीप बिश्नोई ने माना हिसार उसका नहीं, हिसार अब हमारी जिम्मेवारी : बीरेन्द्र सिंह

दूसरी पार्टी से आने वालो को टिकट की नो गारंटी , नलवा हलके के सभी संभावित उम्मीदवार पहुंचे, कुछ तकरार-वार-प्यार-खामोश का रहा नजारा

हिसार टुडे। अर्चना त्रिपाठी  

हिसार लोकसभा चुनाव में अपने बेटे के जीत की भविष्यवाणी करते हुए चौधरी बीरेंद्र सिंह ने अपने बेटे बृजेन्द्र सिंह को आईएस की नौकरी से सीधा राजनीति में एंट्री करवाकर न केवल अपने दशकों के राजनीतिक पहचान का परिचय ही नहीं दिया बल्कि इस बार हिसार लोकसभा चुनाव में चौधरी भजनलाल के पोते को उनके ही पिता के हलके से 23227 वोटों से हराकर कुलदीप बिश्नोई के राजनीतिक भविष्य पर एक प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया। बल्कि साथ ही साथ ही उनके दिल्ली के रास्ते भाजपा के एंट्री की खबर पर भी अपने चित परिचित अंदाज में बीरेंद्र सिंह ने चुटकी ली। इतना ही नहीं उन्होंने कुलदीप बिश्नोई को नसीहत दे डाली और कहा कि जो लोग हमेशा जीतते आये हों वो जब लगातार हारने लगे तो उनकी बौखलाहट को मैं समझ सकता हूं। उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस प्रत्याशी का बेटा हारा तो उसके पिता ने नलवा और आदमपुर के लोगों को भला-बुरा कहा। इतना ही नहीं उन्होंने यह भी कहा कि उनका हिसार से लेना-देना नहीं यह सब उनकी बौखलाहट है।

उन्होंने कुलदीप बिश्नोई को नसीहत देते हुए कहा कि बौखलाहट में अपना धैर्य नहीं खोना चाहिए। इतना ही नहीं उन्होंने यह भी कहा कि जो आदमी कमजोर हो जाता है और अप्रत्याशित परिणाम आते हैं तो उसे गुस्सा आता है। मगर जरुरी है कि वह धैर्य न खोये।
इतना ही नहीं बीरेंद्र सिंह ने कहा कि आज ऐसी परिस्थिति आ गयी है कि हरियाणा की ऐसी कोई पार्टी नहीं और ऐसा कोई नेता नहीं जो भाजपा में न आना चाहता हो, मगर हमारी पार्टी में समझदार हंै दरवाजा खोल कर बैठी है आ जाओ भाई मगर टिकट की गारंटी नहीं है। इतना ही नहीं इनदिनों काफी संघर्ष के दौर से चल रहे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बारे में बीरेंद्र सिंह ने कहा कि उन्हें अगर कोई भाजपा पार्टी में ला सकता है तो वह खुद हैं। उन्होंने कहा कि हुड्डा को तो जब मैं समझाऊंगा तो वो आ जाएंगे।

इतना ही नहीं जहां वीरेंदर सिंह ने कहा कि लोकसभा में भले ही नलवा और आदमपुर से भाजपा को अधिक वोट मिले, मगर इस बार सभी कार्यकर्ताओं को जमकर मेहनत करनी पड़ेगी। क्योंकि इस बार चुनाव कठिन हो सकता है। इस बैठक में जहां नलवा विधानसभा क्षेत्र से संभावित उम्मीदवार अपनी-अपनी धौंस जमा रहे थे. वहीं एक कार्यकर्ता ने सभा में यह भी बता दिया कि यह चाय और पानी की व्यवस्था उनके हलके के किस नेता ने की है। बता दंे कि इस दौरान चौधरी बीरेंद्र सिंह इस बात को जरूर भांप गए थे कि कार्यकर्ताओं में किस प्रकार होड़ चल रही है।

बीरेंद्र ने कहा हार से बौखला गए “कुलदीप”

इस दौरान चौधरी बीरेंद्र सिंह ने इस बार लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी की टिकट से चुनाव में उतरे भव्य बिश्नोई के पिता कुलदीप बिश्नोई को आड़े हाथो लिया। उन्होंने कुलदीप की लोकसभा चुनाव के बाद दिए एक भाषण का हवाला देकर उसे उनकी हार के बाद बौखलाहट करार दिया।

उन्होंने कुलदीप बिश्नोई को नसीहत देते हुए एक दोहा कहा

कनक कनक ते सौ गुनी
मादकता अधिकाय,,
या खाए बौराए,
वो पाए बौराए।

इसका अर्थ बताते हुए उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा नशा रोटी का होता है, धन का होता है मगर सबसे बड़ा नशा प्रजातंत्र में सत्तासीन आदमी को होता है। अगर वह बच गया तो ठीक, वरना बर्बाद हो जाता है। उन्होंने कहा कि हमने सोचा था कि चुनाव में आदमपुर से हमें 6-7 हज़ार की लीड आएगी मगर लीड हुयी तकरीबन 23227 वोटों की तो ऐसे में स्वाभाविक ही था की कि वह बौखला जाते। उन्होंने लोकसभा चुनाव के बाद कुलदीप का वह भाषण याद करते हुए उनपर चुटकी ली कि नलवा और आदमपुर में अप्रत्याशित चुनावी नतीजों पर कांग्रेस के प्रत्याशी के पिता ने नलवा के लोगों को पार्शली और आदमपुर के लोगों को भला-बुरा कहा था और कहा बीरेंद्र सिंह को लोग गाली भी देते हैं फिर भी वोट देते हंै और तुम ऐसे हो कि जिनको देखकर मैं सोचता था गाली देकर वोट दोगे, तुमने वो भी नहीं दिया और 24000 वोट से हरा दिया। इसके साथ-साथ बीरेंद्र सिंह ने यह भी कहा दिया कि अच्छा हुआ कि कुलदीप ने खुद कह दिया कि हिसार से उन्हें कोई लेना देना नहीं। बीरेंद्र सिंह ने कहा कि यह कुलदीप की बौखलाहट है। मगर आदमी को बौखलाहट में धैर्य से काम लेना चाहिए।

हुड्डा को तो “मैं ही ला सकता हूं”

बीरेंद्र सिंह ने इस दौरान दूसरी पार्टी का दामन छोड़ भाजपा का दामन थमने वाले नेताओं की दशा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज दूसरी पार्टी से भाजपा में आने वालो की कतार सी लगी है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में कोई एक पार्टी भी नहीं बची, ऐसा कोई नेता नहीं बचा जिसका पिता-पोता भाजपा में आने के लिए लालायित न हो। सभी को भाजपा में आना है क्योंकि सभी को लगता है कि भाजपा की ही सत्ता आएगी, इसलिए सभी पार्टी के नेता भाजपा में घुसने की कोशिश कर रहे है।
हालांकि जब कार्यकर्ताओं ने पूछा कि इस सूचि में भूपेंद्र हुड्डा भी हैं क्या? तब बीरेंद्र सिंह ने कहा कि उनको तो सिर्फ “मैं ही ला सकता हूं, वो मेरी सुनेंगे।” हालांकि कुलदीप के मामले में उन्होंने कहा कि दिल्ली दरबार है दिल्ली जाकर पूछना भाई, अगर दरवाजे खुले हों तो हम क्या बोले कोई भी आये, हालांकि कार्यकर्ताओं ने कुलदीप के पार्टी में आने से पहले ही विरोध जताया।

कांग्रेस की तरह सिकुड़ रही जातिगत राजनीति

बीरेंद्र सिंह ने कहा कि उन्होंने भाजपा नेता कृष्ण पाल गुर्जर को सलाह दी कि आप हरियाणा का प्रतिनिधित्व करते हो। आप मंत्री थे अब भी हो। मगर अब हमारी पार्टी का सिद्धांत है जात-पात को छुपा कर रखो। मैंने कहा बड़ा सम्मलेन रख कर सारी बिरदारी को बुला करके कहदो कि अब मैं सबका हो गया तो मेरा नाम कृष्णपाल गुर्ज्जर नहीं “कृष्णपाल” रहेगा। मैं भी अपने नाम के आगे-पीछे कुछ नहीं लिखता। उन्होंने कहा कि महामंत्री सुजीत कुमार ने भी अपनी जाती नहीं लिखी। मेरा मानना है कि जाती की जगह गांव का नाम लिखो। उन्होंने कहा कि इस बार मोदी के नाम पर लोगों ने वोट दिए, जाती के नाम पर वोट खत्म हुआ, धर्म के नाम पर वोट मांगना खत्म हुआ और धार्मिक लोगों के चक्कर में वोट मांगने का सिलसिला समाप्त हुआ। जैसे आज कांग्रेस सिकुड़ रही है वैसे ही जातिगत राजनीति भी सिकुड़ती जा रही है।

नलवा के सभी संभावित उम्मदवारों की फौज

बता दें कि बीरेंद्र सिंह की खास मौजूदगी में आयोजित नलवा हलके के सदस्यता ग्रहण समारोह में सभी संभावित उम्मदवारों में अपनी उपस्थिति दिखाई। सभी एक दूसरे को विधायक कहकर पुकार रहे थे। जहां बीरेंद्र सिंह को दोनों तरफ से पूर्व विधायक रणबीर गंगवा और सुजीत घेरे हुए थे, तो वहीं घोलू गुर्जर, कैप्टन भूपेंद्र, सोनाली फौगाट और अन्य हलके के संभावित उम्मीदवार भी अपनी हाजरी देते मौजूद थे। बता दें कि इस सभा में चाय-पानी की व्यवस्था किसने की इसका भी जिक्र किया गया। इतना ही नहीं सदस्यता समारोह में अन्य हलकों की कम सदस्य की उपस्थिती की बात कर नलवा हलके के अधिक कार्यकर्ताओं की मौजूदगी की बात पर कुछ कार्यकर्ताओं ने आपत्ति भी उठायी। इतना ही नहीं कुछ कार्यकर्ता तो अपना दुःख व्यक्त करते हुए कहने लगे की आँख निकाल कर बहुत बोलता था कि भाई मैं हूं न आज उसका भी स्थान पार्टी में नहीं है।

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