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औमप्रकाश चौटाला ने जेल आते-जाते कैसे बिछाई हरियाणा की राजनीतिक बिसात!

हुड्डा की खामोशी का ओपी उठा रहे फायदा, जाट मतदाताओं का ध्रुवीकरण करने में जुटे ओपी चौटाला , दुष्यंत के कैडर को तोड़ने में लगे उनके “दादा”, दुष्यंत के सामने मुसीबत

किसी ने बड़ा खूब कहा है कि
माना की कठिनाइयां आने से इंसान अकेला हो जाता है, पर कठिनाई आने पर ही अकेला व्यक्ति मजबूत होना सीख जाता है।

अर्चना त्रिपाठी | हिसार टुडे

यह बात आजकल इनेलो पार्टी पर बिलकुल सटीक बैठ रही है। अब तक यह चर्चा आम थी कि इनेलो पार्टी के दो फाड़ होने और लोकसभा चुनाव में शर्मनाक प्रदर्शन के बाद सभी को यह लगने लगा कि इनेलो का अस्तित्व खत्म हो गया।

अब यह हरियाणा की मजबूत क्षेत्रीय पार्टी का दर्जा भी गवा चुकी है। मगर लोकसभा के नतीजों के बाद राजनीति के महारथी ओमप्रकाश चौटाला ने आते ही जिस प्रकार से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर पर शाब्दिक प्रहार कर मीडिया की सुर्खिया बटोरी उसने इस बात को साबित कर दिया कि “टाइगर अभी जिन्दा है।”

दरअसल इस लोकसभा चुनाव में इनेलो पार्टी के खिलाफ यही बात गयी कि जब से पार्टी में दो-फाड़ हुयी तब से मीडिया की खबरों में मानो इनेलो गायब और जननायक जनता पार्टी सुर्खियों में रही। इनेलो का खबरों से गायब होने ही इस बात का सभी को संकेत मिल गया था कि अब इनेलो में कुछ नहीं बचा।

मगर जैसे ही ओमप्रकाश चौटाला जेल से पैरोल पर बाहर आये और उन्होंने इनेलो पार्टी के अध्यक्षपद की जिम्मेदारी संभालकर अपने विश्वासपात्र अशोक अरोड़ा को उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी और इन सब में कहीं न कहीं अभय चौटाला सुर्खियों से गायब रहे।

उसने इनेलो की मजबूती का परिचय दिया। ओमप्रकाश चौटाला के बयानों पर खुद मुख्यमंत्री को जवाब देने के लिए बाध्य होना पड़ा। उसने इस बात के संकेत दे दिए थे कि विधानसभा चुनाव में इनेलो चुप बैठने वालो में से नहीं है। आज जिस प्रकार ओमप्रकाश चौटाला ने अपने पार्टी की ताकत बुलंद दिखाई और अगर यही रहा तो हो सकता है कि आगे चलकर जननायक जनता पार्टी के नेता दुष्यंत चौटाला को विधानसभा में मुसीबतों का सामना करना पड़े।

इतना ही नहीं जिस प्रकार ओमप्रकाश चौटाला ने दीपेंद्र की तारीफ़ कर रोहतक में जाट मतदाताओं की सहानुभूति बटोरने की कोशिश की उसे भी जाट मतदाताओं को रिझाने के तौर पर देखा जा रहा है। अगर ऐसा ही रहा तो हो सकता है कि जाट-नॉन जाट की लड़ाई में जाटों का ध्रुवीकरण इनेलो की तरफ हो जाए और दुष्यंत और हुड्डा को हाथ मलते रह जाना पड़े।

दुष्यंत की समस्या बढ़ा सकते है उनके दादा ओमप्रकाश चौटाला 

बता दें कि जैसा कि ओमप्रकाश चौटाला ने कुछ ही दिनों में इनेलो पार्टी को सुर्खियों में ला दिया और गद्दारों का बार-बार जिक्र करते हुए उन्होंने जननायक जनता पार्टी नेता दुष्यंत चौटाला के साथ भाजपा में शामिल इनेलो विधायकों पर सीधा प्रहार किया, उसने इस बात की तरफ स्पष्ट साकेत दे दिए कि आने वाले समय में विधानसभा चुनाव में इनेलो और आक्रामक तरीके से मुकाबला करने वाली है। इतना ही नहीं यह भी माना जा रहा है कि हो सकता है कि विधानसभा चुनाव के पहले ओमप्रकाश चौटाला रिहा होकर बाहर आ जाए।

क्योंकि अगर ऐसा हुआ तो शायद दुष्यंत की मुसीबत और बढ़ सकती है। न केवल ओमप्रकाश चौटाला के बाहर रहने से जजपा के साथ जुड़े कैडर भी धर्मसंकट में आ जायेंगे कि किसका साथ दें।

ओमप्रकाश चौटाला जिस प्रखरता के साथ बयानबाजी करते हैं वह उनके स्वाभाव का हिस्सा रहा है मगर ठीक दूसरी तरफ दुष्यंत चौटाला अपने दादा की तरफ उतने मुखर नहीं हैं। यही कारण है कि हो सकता है कि इसका खामियाजा दुष्यंत को विधानसभा चुनाव में उठाना पड़े। जैसा की ओमप्रकाश चौटाला पहले ही कार्यकर्ताओं को कह चुके हैं नाराज लोगों को वापस पार्टी से जोड़ने का काम करें। इसका अर्थ है कि इनेलो का कैडर जो जजपा के पास गया है उसे ही तोड़ने की कोशिश दुष्यंत के दादा करेंगे।

सीएम मनोहर लाल पर ओमप्रकाश चौटाला के सीधे प्रहार से इनेलो आई चर्चा में

कहा जाता है कि जब तक आप खबरों में है तब तक जिन्दा हो और जब आप खबरों से नदारद हो जाओ, तो मतलब आप खत्म। इसी बात का खामियाजा इनेलो को लोकसभा चुनाव में उठाना पड़ा। यही कारण है कि राजनीति के पक्के खिलाडी माने जाने वाले इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला ने पाया कि अगर दुबारा पार्टी को चर्चा में लाना है और लोगों के बीच पार्टी का जिक्र करवाना है तो मीडिया का ध्यान खींचना जरुरी होगा।

इसलिए पैरोल से बाहर आने के बाद ओमप्रकाश चौटाला ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के खिलाफ बयानबाजी देनी शुरू कर दी। परिणाम यह हुआ कि भाजपा के कार्यकर्ताओं को विरोध प्रदर्शन के साथ पुलिस तक ओमप्रकाश चौटाला के बयान के खिलाफ मामला गया और रातों-रात ओमप्रकाश चौटाला ने यह दिखा दिया कि हरियाणा में सिर्फ उनकी ही पार्टी है जो मुख्यमंत्री से सीधे मुकाबला करने का दम रखती है।

बता दें कि पिछले दिनों चौटाला ने सिरसा में सीएम मनोहर लाल खट्टर के खिलाफ एक आपतिजनक बयान दिया था। बयान में उनकी जाति, गोत्र की तुलना आवारा ओर नकारा पशुओं से की थी। जिसपर भाजपा के कार्यकर्ताओं के साथ मुख्यमंत्री को भी ओमप्रकश चौटाला के खिलाफ अपनी आपत्ति जताई थी।

हुड्डा के पास ताकत मगर फिर भी लाचार, फायदा उठा रहे ओपी चौटाला

औमप्रकाश चौटाला के और ज्यादा ताकतवर होने का कारण यह भी है क्योंकिं इन दिनों पार्टी के गुटबाजी को लेकर कांग्रेस चर्चा में है। आज अगर नजर दौड़ाई जाए तो विपक्ष के रूप में जितना कांग्रेस के नेता हुड्डा को उग्र होना चाहिए था, उतना तो वह है नहीं, उनसे ज्यादा उग्र तो ओमप्रकाश चौटाला नजर आ रहे हैं। बता दंे कि आज हरियाणा में हुड्डा एक जाट नेता माने जाते है। इनेलो सुप्रीमो ओपी चौटाला और हुड्डा का वोटबैंक एक है।

मगर आज हरियाणा में हुड्डा के पास ताकत है मगर फिर भी वह बिना किसी पद के लाचार बने हुए हैं। केंद्र से जो उन्हें जिम्मेदारी मिलनी चाहिए थी वह मिल नहीं रही। इतना ही नहीं सीबीआई का डर उन्हें बार-बार खाए जा रहा है। इतना ही नहीं हाल में ओपी चौटाला द्वारा हुड्डा के पुत्र दीपेंद्र की तारीफ़ कर ओपी चौटाला ने हुड्डा की ख़ामोशी का फायदा उठाने की कोशिश कि मन जा रहा है इस तारीफ़ के सतह वह रोहतक के जाट मतदाताओं की सहानुभूति जुटा कर उसे इनेलो की तरफ मोड़ना चाहते थे।

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