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खुद को ही ‘स्वघोषित सीएम उम्मीदवार’ बताकर हुड्डा ने की घोषणाओं की बौछार

सोनिया दरबार से अब भी खाली हाथ, आजाद से मुलाकात के बाद तेवर हुए नरम

महेश मेहता | हिसार टुडे

18 तारीख को जिस घोषणा की उम्मीद पर सभी टकटकी लगाए बैठे थे, उन तमाम लोगों की उम्मीदों पर पानी फिर गया जब उन्होंने सुना कि दुबारा भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने जिस परिवर्तन की बात की थी वो परिवर्तन तो नहीं दिखा और न ही हुड्डा के भाषण में वो जोश। यह पूरी सभा इसी बात की तरफ इशारा कर रही थी कि हुड्डा ने खुद को ही “स्वघोषित सीएम उम्मीदवार” घोषित कर अपनी मंशा दिखाने की कोशिश की। वैसे गौरतलब बात है कि इस दौरान भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने जिन बातों की घोषणा की उसके काफी मायने आंके जा रहे हैं। एक तरफ उन्होंने कांग्रेस हाईकमान से उलट खुद ही एक सीएम उम्मीदवार के तौर पर वह प्रदेश की जनता के लिए उनकी सरकार आने पर क्या करने वाले हैं उसकी घोषणा कर सभी को तालियां बजाने और खुश होने का मौका जरूर दिया। इतना ही नहीं इस महारैली में पार्टी हाईकमान को निमंत्रण नहीं दिया गया, हालांकि उन्होंने इस महारैली से ही हाईकमान के खिलाफ जोरदार तंज किया। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के वे पक्ष में है, उन्होंने कहा कि यह अब पहले वाली कांग्रेस नहीं रही, क्योंकि वह अब भटक गयी है।
इस दौरान पूर्व सांसद, 13 विधायक, 70 से ज्यादा पूर्व विधायक व सैंकड़ों प्रमुख नेता परिवर्तन महारैली के गवाह बने। पूर्व सीएम ने कहा कि पार्टी पर फैसले को लेकर 13 मौजूदा कांग्रेस विधायकों व 12 अन्य वरिष्ठ नेताओं की कमेटी चंडीगढ़ में निर्णय लेगी। समिती एक हफ्ते में जो निर्णय देगी वह उन्हें मंजूर होगा और वो उसी दिशा में आगे बढ़ेंगे।

अनुच्छेद 370 पर भड़के हुड्डा, कहा ‘अब कांग्रेस पहले वाली नहीं रही’

पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का समर्थन करते हुए कहा कि भाजपा सरकार अब इस मुद्दे पर जनता के वोट हथियाना चाहती है, जिसका हर स्तर पर विरोध किया जाएगा। हालांकि उन्होंने अनुच्छेद 370 को लेकर कांग्रेस पर भी तंज कसा और कहा कि पार्टी मुद्दे से भटक गई और कांग्रेस अब पहले वाली पार्टी नहीं रही। उन्होंने कहा कि आज मैं अतीत से आजाद होकर मंच पर आया हूं। हुड्डा ने कहा कि मैं 72 साल का हो गया हूं और रिटायरमेंट लेना चाहता हूं। लेकिन हरियाणा की स्थिती देखकर संघर्ष करने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि आज अनुच्छेद 370 को लेकर हमारे कई नेताओं ने विरोध किया है, यह सही नहीं है। मगर मैंने देश हित के लिए इस निर्णय का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि मेरा परिवार चार पीढ़ी से कांग्रेस से जुड़ा हुआ है। हमने कांग्रेस के लिए खून-पसीना बहाया, मगर अब कांग्रेस पहले वाली नहीं रही। 370 पर कांग्रेस भटक गयी है। लेकिन देश भक्ति की जहां बात आये मैं अपने उसूलों के साथ समझौता नहीं कर सकता।

हुड्डा की महापरिवर्तन रैली में नहीं दिखा कांग्रेस का बड़ा नेता

बता दें कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने अपने बड़े से मंच में महापरिवर्तन रैली करके यह दिखाने की कोशिश की है कि उनके साथ कितना आपार जनसमर्थन है। इतना ही नहीं हुड्डा के मंच में कांग्रेस का एक भी बड़ा नेता नजर नहीं आया। जानकर यह अनुमान लगा रहे हैं कि हुड्डा अब आर-पार की लड़ाई में है। पंडाल में न तो सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी, प्रियंका गाँधी और गुलाम नबी आजाद का कहीं भी बैनर नहीं लगा था। जो उनकी नाराजगी कांग्रेस के प्रति साफ तौर पर दिखा रहा है।

सोनिया दरबार से अब भी खाली हाथ, आजाद से मुलाकात के बाद तेवर हुए नरम

हुड्डा ने महापरिवर्तन रैली में जोश में आकर पार्टी के कुछ विशेष लोगों पर तंज कस्ते हुए यह दिखा दिया की वह पार्टी से भिड़ने के लिए तैयार है और शायद सोनिया गांधी इस बात को समझ चुकी है कि हरियाणा में हुड्डा किस प्रकार पार्टी पर दबाव बना रहे है। यही कारण है कि बेहद कठिन दौर से गुजर रही कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अब तक हुड्डा को सकरात्मक संकेत नहीं दिए हैं। मगर हां, मुलकात की बात खबरों में जरूर आ रही है। वैसे जानकार और मीडिया रिपोर्ट कहती है कि पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा की उम्मीदें अभी खत्म नहीं हुई है। उन्हें लगता है कि पार्टी नेतृत्व हरियाणा में चल रही गुटबाजी और खींचतान पर जल्दी कोई फैसला ले सकता है। सूत्रों का कहना है कि पार्टी के हरियाणा मामलों के प्रभारी गुलाम नबी आजाद से मुलाकात के बाद हुड्डा के तेवर नरम हुए। बताते हैं कि हुड्डा का शनिवार को ही रोहतक आने का प्रोग्राम था लेकिन ऐन मौके पर उन्होंने इसे बदल दिया। रैली से पहली रात दिल्ली में उनकी प्रदेश प्रभारी आजाद से मुलाकात हुई। सूत्रों के मुताबिक इस दौरान तय हुआ कि हुड्डा रैली में कांग्रेस छोड़ने या अन्य किसी पार्टी को समर्थन और शामिल होने जैसा फैसला नहीं करेंगे। बेशक, हुड्डा पर उनके समर्थकों का दबाव था, लेकिन रैली में उनकी बोलचाल से स्पष्ट दिखा कि वे जल्दबाजी में कोई निर्णय लेने के मूड में नहीं हैं। रैली से पूर्व यह चर्चा आम थी कि हुड्डा कांग्रेस से किनारा कर सकते हैं। उनके खेमे के कई विधायकों ने इस बात की पुष्टि भी की थी कि वे शरद पवार की एनसीपी को अपना नया प्लेटफॉर्म बना सकते हैं। प्रदेश में विधानसभा चुनाव में केवल दो माह बाकी हैं। यानी अब हुड्डा के पास इतना समय भी नहीं था कि वे नई पार्टी बनाने जैसा बड़ा कदम उठाते। ऐसे में एनसीपी विकल्प मानी जा रही थी, लेकिन हुड्डा ने केवल कमेटी बनाने का ऐलान करके संकेत दे दिए हैं कि वे कांग्रेस नहीं छोड़ेंगे।

महारैली में की घोषणाएं

बुढ़ापा पेंशन 5000 रुपये।
किसानों का कर्जा होगा माफ, दो एकड़ भूमि वाले किसानों को ट‍्यूबवैल पर बिजली होगी फ्री।
प्रदेश के कर्मचारियों को पंजाब के समान मिलेगा वेतनमान, पुरानी पेंशन नीति होगी बहाल।
आंगनवाड़ी, मिड-डे-मील, आशा वर्कर को मिलेगा सरकारी कर्मचारियों के समान भत्ता।
बीपीएल परिवार की महिलाओं को 2 हजार रुपये मिलेगी सम्मान राशि, 300 यूनिट तक बिजली मिलेगी फ्री।
हरियाणा रोडवेज में महिलाओं की होगी फ्री यात्रा, प्रत्येक परिवार को मिलेगा रोजगार।
प्रदेश में 75 फीसदी हरियाणा वासियों के लिए रोजगार आरक्षित, अजा वर्ग के बच्चों का बढ़ाया जाएगा वजीफा
अपराध मुक्त होगा हरियाणा, ग्रुप डी में भर्ती युवाओं को तृतीय श्रेणी में किया जाएगा शामिल।
हुडा सेक्टर में एन्हांसमेंट किया जायेगा खत्म।
पचास हजार सफाई कर्मी होंगे भर्ती।
4 डिप्टी मुख्यमंत्री, 1-BC, 1-SC, 1-ब्राह्मण समाज से।

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