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दहिया का इस्तीफा कहीं अशोक तंवर को हटाने को लेकर हुड्डा का दबावतंत्र तो नहीं!

कांग्रेस के विधायक जयतीर्थ दहिया ने विधानसभा से दिया इस्तीफा , हुड्डा के करीबी माने जाते है दहिया ,18 तारीख तक फैसला न होने पर हुड्डा बना सकते हैं अलग पार्टी

महेश मेहता | हिसार टुडे

भाजपा लगातार अपना कुनबा बढ़ाते जा रही है तो वहीं कांग्रेस दिन ब दिन कमजोर स्थिति में पहुंचती जा रही है। हुड्डा नेतृत्व परिवर्तन की बार-बार मांग कर चुका है, मगर पार्टी हाईकमान अब तक गहरी नींद में सोया हुआ है। हकीकत तो यह है कि कांग्रेस बिना किसी नेतृत्व के चल रहा है। यही कारण है कि फैसले लेने वाला कोई नहीं बचा है। यही कारण है कि कांग्रेस दिन ब दिन इस विकट परिस्थिति से अवगत है। यही कारण है कि हरियाणा में इसका बुरा प्रभाव चुनाव के दौरान न पड़े इसलिए हुड्डा समर्थक यह पहले ही संकेत दे चुके हैं कि 18 तारीख को वो अपना दम दिखाएंगे। मगर उनके करीबी करण दलाल ने इन दिनों नयी पार्टी और महागठबंधन पर जिस प्रकार बयान दिया है उससे यह तो तय है कि हुड्डा या तो अशोक तंवर को निकलवा कर ही दम लेंगे अन्यथा खुद की नई पार्टी बनाएंगे। अब इसी बीच भूपेंदर हुड्डा के करीबी और खासमखास रहे जयतीर्थ दहिया का इस्तीफा इसी दबावतंत्र का हिस्सा माना जा रहा है। क्योंकि इस्तीफा देने के साथ जयतीर्थ दहिया ने विधानसभा से इस्तीफा लेने के पीछे कांग्रेस अध्यक्ष अशोक तंवर को इसका जिम्मेदार बताया।

इनेलो प्रमुख ने महागठबंधन के पहले ही दिए थे संकेत

पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा को प्रदेश नेतृत्व की बागडोर नहीं सौंपी गई तो हरियाणा में नया महागठबंधन भी बन सकता है। इसके संकेत वरिष्ठ कांग्रेस नेता रणजीत सिंह, करण दलाल ने पहले ही दे दिए थे, मगर इस महागठबंधन में इनेलो भी है इसके संकेत तभी मिल गए थे जब लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद पूर्व सीएम ओमप्रकाश चौटाला जेल से पैरोल पर बाहर आए थे, तब उन्होंने भूपेंद्र हुड्डा के बेटे दीपेंद्र हुड्डा की तारीफ की थी। वहीं जवाब में भूपेंद्र हुड्डा ने कहा था कि उनका बेटा मेरा बेटा, मेरा बेटा उनका बेटा है। यह तो सभी जानते है कि बसपा हर चुनाव में गठबंधन की वैसाखी का सहारा लेकर ही चुनाव में उतरती है। इसलिए मन जा रहा है कि अगर नई पार्टी बनी तो महागठबंधन का हिस्सा बसपा भी हो सकती है।

हाईकमान ने अशोक तंवर पर कार्यवाई नहीं की तो दे दिया इस्तीफा : दहिया

बता दें कि हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र से पहले ही पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंदर सिंह हुड्डा के करीबी कांग्रेस के विधायक जयतीर्थ दहिया ने विधानसभा पद से अपने इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफा देते देते उन्होंने जो मीडिया को अपने इस्तीफे देने का कारण बताते हुए कहा कि वह पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंंवर के व्यवहार से बेहद नाखुश हैं। शायद आपको याद हो कि तंवर पर दिल्ली में हुई बैठक के बाद गाली देने का आरोप दहिया ने लगाया था। सोनीपत के राई विधानसभा क्षेत्र के विधायक दहिया ने कहा था कि वह 4 जून को नई दिल्ली में हरियाणा प्रदेश कांग्रेस समन्वय समिति की बैठक के बाद प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर अशोक तंंवर द्वारा दी गई गाली से आहत थे। जब हाईकमान ने उनकी शिकायत के बावजूद प्रदेश अध्यक्ष के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की तो वे यह इस्तीफा दे रहे हैं। राई से कांग्रेस विधायक जयतीर्थ दहिया ने कहा कि ऐसे नेतृत्व में विधायक बने रहना अपमान जनक है।

हुड्डा परिवर्तन महारैली के जरिये कांग्रेस को करेंगे “ब्लैकमेल”

बता दें कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा लोकसभा चुनाव से ही चाहते थे कि नेतृत्व परिवर्तन हो मगर जब ऐसा नहीं हुआ तो उन्होंने विधानसभा चुनाव में उतरने के पहले यह तैयारी कर ली कि किसी भी हाल में हरियाणा कांग्रेस के संगठनात्मक बदलाव नहीं होगा वह चुप नहीं बैठेंगे। बता दें कि अब तक पार्टी हाई कमान ने कोई फैसला नहीं लिया। इसलिए अब भूपेंदर सिंह हुड्डा और ज्यादा इंतजार करने के मूड में नहीं है। यही कारण है कि उन्होंने दो दिन पहले दिल्ली में विधायकों के साथ बैठक करके रोहतक में 4 अगस्त को कार्यकर्ता सम्मेलन बुलाया और इसके बाद 18 अगस्त को परिवर्तन महारैली की घोषणा भी कर रखी है। हुड्डा ने यह साफ-साफ हाईकमान को संकेत दे दिए है कि प्रदेश में वह अपने कैडर के बल पर ही विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के दो फाड़ होने और इनेलो के विधायक भाजपा में शामिल होने के बाद भाजपा का विकल्प कांग्रेस और खासकर पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा को ही माना जा रहा है। यही कारण है कि हुड्डा ने अब चुनाव में आर या पार के उद्देश्य से उतरने का एेेलान भी कर दिया है।

क्या इस्तीफे की वजह अशोक तंवर या हाईकोर्ट का मामला

बता देंं जयतीर्थ दहिया के खिलाफ हाईकोर्ट में एक याचिका पर अंतिम निर्णय होना है। माना जा रहा है कि हो सकता है निर्णय उनके खिलाफ आये। इसलिए सोची समझी रणनीति के तहत उन्होंने इस्तीफा दिया है। दाहिया राई विधानसभा क्षेत्र से मात्र तीन मतों के अंतर से चुनाव जीते थे। तीन वोट के मामूली अंतर से हारने वाले इनेलो उम्मीदवार इंद्रजीत सिंह दहिया ने जयतीर्थ दहिया की जीत को कोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट में यह मामला 2014 से चल रहा है। वैसे चूंकि जयतीर्थ दहिया पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के करीबी विधायक हैं। कई मौकों पर वे हरियाणा कांग्रेस के अध्यक्ष डॉ. अशोक तंवर के विरुद्ध हुड्डा के पक्ष में मोर्चा खोलते रहे हैं। उनकी इसी मामले को लेकर अशोक तंवर से झड़प भी हो गयी थी। वह हुड्डा के इतने करीबी है उस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने यह संकल्प ले रखा था कि जब तक हुड्डा दोबारा सीएम नहीं बनते, तब तक वे अपनी टोपी नहीं उतारेंगे।

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