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बिजली विभाग में ‘भ्रष्टाचार’ का करंट

शिकायतकर्ता का आरोप जेई लेबर न होने का बना रहा बहाना व ठेकेदार काम करवाने के लिए जनता से मांग रहे र10,000

 हिसार टुडे ।अर्चना त्रिपाठी

  • यह “हुड्डा और चौटाला” का राज नहीं “खटटर राज” है, अधिकारी ईमानदारी सीख लें : भीम महाजन
  • शिकायतकर्ता का आरोप जेई लेबर न होने का बना रहा बहाना व ठेकेदार काम करवाने के लिए जनता से मांग रहे र10,000
  • मामले के तूल पकड़ते ही बिजली विभाग के अधिकारियों ने कहा कि कोई पैसे नहीं मांग रहा, बिना पैसे काम करवाया जायेगा
  • 2018 से चली आ रही समस्या एक साल तक ज्यों की त्यों

सुना है बिजली विभाग में काम करने वाले अधिकारी इतने उच्च शिक्षित पढ़े लिखे होते हैं कि जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता। मगर लोगों का क्या पता था कि यही पढ़े लिखे अधिकारी अनपढ़ लोगों की तरह काम करेंगे। दरअसल वार्ड नंबर 8 में पड़ने वाले 12 क्वार्टर न्यू योग नगर के करीब बसे महर्षि नगर के निवासी 2017 से बिजली विभाग के लापरवाही और गैरकार्यभार से परेशान हैं। यहां के नागरिकों का यह आरोप है कि उनके इलाके में बिजली विभाग की 10 MM पतली तार के सहारे लोगों के घर बिजली पहुंचाने का काम किया जा रहा है। लगभग 40-50 घरों का लोड संभाल रही यह तार हर 15-20 दिनों में जलकर पिघल कर गिरने लगती है। अगर एक-दो एसी चला दिया जाएं तो तुरंत यह तार जल जाती है। यहां के निवासी राजेश कुमार जांगड़ा का आरोप है कि वह जून 2018 में बिजली विभाग को इस बाबत शिकायत कर चुके हैं कि एरिया की 10 MM की तार बदल कर 35 से 50 MM की तार डाली जाए। मगर एक महीना गुजर जाने के बावजूद बिजली विभाग ने कोई कार्यवाही नहीं की। इसीलिए जब हाल में दुबारा तार जलने की घटना घटी तो कॉलोनी के एसडीओ और जेई से मिलने पहुंचे। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जेई ने कहा कि हम सारा सामान दे देंगे मगर हमारे पास लेबर नहीं है, इसलिए काम अपने तरीके से और अपने समय पर होगा। वहीं ठीक दूसरी तरफ बिजली विभाग के ठेकेदार का कहना था कि अगर काम जल्दी करवाना है तो कॉलोनी के लोग मिलकर 10000 रूपए इकठ्ठा करके दे दो, काम हो जायेगा। इस बात से कहीं न कहीं भ्रष्टाचार की बू आ रही है। क्योंकि यह स्थिति देखकर लगता है कि कहीं इसमें अधिकारियों और ठेकेदार की आपसी सांठ-गांठ तो नहीं। जांगड़ा का यह भी कहना था कि ठेकेदार भी उनको कहने लगा कि हमें बिजली बोर्ड समय पर पैसे नहीं देती इसलिए हमारे काम में समय लग जाता है। हमें यह लोग टाइम पर पेमेंट दे तो हम काम करने को राजी हैं, मगर इनका पेमेंट ही लेट होता है। उस ठेकेदार ने कहा कि काम जल्दी करवाना है तो आप लोग इक्कठा होकर पैसे दे दो, काम 2 दिन में पूरा चकाचक कर देंगे।

इतना ही नहीं बिजली विभाग की इसी देरी और कोताही के कारण महर्षि नगर ने नागरिकों को 2 दिन तक बिना बिजली रहना पड़ा जिससे घर के बड़े बुजुर्गों का हाल बेहाल हुआ। वहीं घर की महिलायें और छोटे बच्चे भी गर्मी से परेशान नजर आये। इतना ही नहीं जब यहां के नागरिकों ने रोष जताया तब जाकर रात 10 बजे अस्थायी तौर पर बिजली दी गयी। राजेश जैसे उस परिसर के सभी नागरिक बिजली विभाग की इस कोताही से पूरी तरह से परेशान नजर आये। हालांकि इस संदर्भ में सीडीओ ने शिकायतकर्ता के आरोपों का खंडन किया और कहा कि जल्द से जल्द नागरिकों की समस्या को सुलझाया जाएगा। काम की एवज में जनता से रूपए मांगने की घटना जब पूर्व डिप्टी मेयर भीम महाजन के प्रकाश में आयी। उन्होंने इस मसले पर बिजली विभाग के अधिकारियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि काम के लिए जनता से 10000 रूपए काम करवाने का खर्च के रूप में रिश्वत मांगना बेहद निंदनीय है। इसलिए उन्होंने इस घटना पर आपत्ति जताते हुए सीडीओ से संबधित मामले की जांच की गुहार लगाई।

अधिकारी पढ़े लिखे हैं अनपढ़ नहीं जिन्हे यह नहीं पता कितने लोड में कितनी MM लगती है केबल

जून 2018 में शिकायत क्रमांक 7938 को 1 साल होने के बावजूद भी अगर अधिकारी कार्य नहीं करते तो यह बेहद खेदजनक है। जागड़ा का कहना था कि हर बार तार जलने के बाद उसे जोड़ने और काम करने के लिए आने वाले लाइन मैन भी यही कहा करते थे कि केबल हमारी कामयाब नहीं है जेई हमसे जबरन काम करवा रहा है। राजेश का कहना है कि मुझे ताज्जुब होता है कि सीडीओ और जेई पढ़ लिख कर नौकरी में लगे हैं, यह टेक्निकल फिल्ड के हैं उन्हें यह पता है कि कितने लोड के अनुसार कितने MM की केबल लगनी चाहिए। उनको खुद लोड देखकर केबल बदलनी चाहिए थी यह पढ़ लिख कर नौकरी पर लगे हैं अनपढ़ थोड़े ही हैं।
अभी यहां 35 से 50 MM की केबल लगनी चाहिए थी। वह भी तीन फेज की जबकि यह सिंगल फेज का केबल लगाया हुआ है। हमारे यहां 150 वोल्ट होता है, जिसमें न फ्रिज चलती है न कूलर। जब घर में बिजली गुल रही तब सभी के हाल बेहाल हो गए। घर में समरसिबल लगा है बिना बिजली चलेगा कैसे, बिना पीने के पानी के गुजारा करना पड़ा। घर का सामान खराब हो गया। बुजुर्गों का तो और हाल बेहाल हुआ, उन्हें पूरा दिन घर के बाहर बैठकर हाथो से पंखा डुलाकर दिन बिताना पड़ा।

ये हुड्डा और चौटाला” का राज नहीं खट्टर का राज है: पूर्व डिप्टी मेयर भीम महाजन 

भीम महाजन ने बताया कि उनके पास यह शिकायत आयी थी। उन्हें शिकायतकर्ता ने बताया कि जेई उनके पास आकर बोलता है मेरे पास सारा सामान है मगर लेबर नहीं है। तुमको अगर लाइट लेनी है तो लेबर की व्यवस्था तुम करो, वर्ना मैं किसी ठेकेदार से मिलवा देता हुं उसे 10 हजार दे दो। भीम महाजन का कहना था कि बिजली विभाग में गुंडागर्दी चल रही है। अगर लोगों के घर तक मीटर लगा हुआ है तो यह बिजली विभाग की जिम्मेदारी है कि वह लोगों के घर तक बिजली कनेक्शन दे। अगर उसके लिए यहां लोगों से पैसे मांगे जाते हैं तो यह या तो रिश्वत है या  गुंडागर्दी है। मेरा मानना है कि सरकार को परेशान और बदनाम करने के लिए बिजली बोर्ड के कुछ अधिकारी जानबूझ कर इस प्रकार का कृत कर रहे हैं। जो लोग जनता से 10 हजार रूपए रिश्वत मांग रहे है उन्हें बक्शा नहीं जाएगा। भीम महाजन ने आगे कहा कि अगर जेई कहता है कि मेरे पास मटेरियल है लेबर नहीं तो यह क्या बात है? लेबर लगाने और ठेकेदार से मिलवाने के लिए कैसे कहा गया? अगर विभाग का काम है तो बिजली विभाग को लेबर भी देना चाहिए, अगर लेबर नहीं है तो पैसे उस ठेकेदार के काटो जिसके जरिये बिजली विभाग को काम करने की जिम्मेदारी दी गयी है। आम आदमी को परेशान क्यों किया जा रहा है। जो अधिकारी 10 हजार की रिश्वत मांग रहे है उन्हें बक्शा नहीं जाए। बिजली विभाग के अधिकारी अपना काम ढंग से ईमानदारी से पूरा करना सीख लें “ये हुड्डा और चौटाला” का राज नहीं खट्टर का राज है। अधिकारी ईमानदारी से काम करना सीख लें।

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