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भाजपा के मिशन 75 में कांग्रेस का नया फार्मूला फेरेगा पानी

दलित, जाट और नॉन जाट वोटों पर करेगी कांग्रेस फोकस

महेश मेहता | हिसार

प्रदेशाध्यक्ष के चयन की जगह कार्यकारी अध्यक्ष बनाने का कांग्रेस कर रही विचार, अशोक तंवर को राज्य से उठाकर केंद्र राजनीति में मिल सकती है जगह

हरियाणा कांग्रेस पार्टी के अंदर कई दमदार नेता हैं जिनकी ताकत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। बस समस्या है कुशल नेतृत्व की। नेतृत्व ही एक ऐसा मुद्दा है जिसके चलते कांग्रेस के नेताओं में मनमुटाव और घमासान होता जा रहा है। यही कारण है कि इस बात को जड़ से समाप्त करने के लिए कांग्रेस के शीर्ष नेता और प्रभारी एक ऐसी रणनीति बनाने की कोशिश कर रहे हैं अगर वह परवान चढ़ी तो शायद भाजपा के सामने विधानसभा चुनाव के पहले मुसीबत खड़ी हो जाए।

दरअसल कांग्रेस की गुटबाजी को समाप्त करने और कांग्रेस के वोटबैंक को दुबारा कांग्रेस के पाले में लाने के लिए हरियाणा के कांग्रेस प्रभारी गुलाम नबी आजाद ने एक ऐसी योजना बनाई है जिसके जरिये न केवल कांग्रेस अपने हर वोटबैंक को साधने में कामयाब होगी और हर नेता को अपना दमखम दिखाने का मौका मिलेगा। दरअसल गुलाम नबी आजाद ने पार्टी हाईकमान के साथ चर्चा के बाद एक ऐसा फार्मूला तैयार किया है जिसके साथ कांग्रेस विधानसभा में बेहतर नतीजों के साथ भाजपा के मिशन 75 को धूल चटा सकता है। आपने देखा होगा कि हाल में भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने जेपी नड्डा को जिस प्रकार कार्यकारी अध्यक्ष बना कर अध्यक्ष कौन का सवाल ही खत्म कर दिया, ठीक उसी प्रकार हरियाणा के सबसे विवादित पद अर्थात कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष की जगह अब गुलाम नबी आजाद भाजपा की तरह हरियाणा में भी कार्यकारी अध्यक्ष बनाये जाने का विचार कर रहे हैं।

वो भी एक नहीं बल्कि 3 से 4। यह बात सुनने में भले ही अटपटी लगे, मगर हरियाणा के जातिगत फैक्टर को ध्यान में रखकर कांग्रेस कार्यकारी अध्यख बनाती है तो इसका लाभ कांग्रेस को कई गुना ज्यादा होगा। न केवल जाट वोट साधने के लिए हुड्डा, नॉन जाट वोट साधने के लिए कुलदीप बल्कि दलित और पिछड़ा वर्ग के वोट साधने के लिए कुमारी सैलजा को मौका देकर कांग्रेस अपनी पूरी टीम को सामान अधिकार देकर उन्हें मजबूती देने का काम करेगी।

वैसे उम्मीद है कि हाईकमान इसपर इस महीने के अंत तक फैसला ले सकता है। इसी बीच कुलदीप की 90 विधानसभा क्षेत्रों में जुलाई से शुरू होने वाले दौरों को उसी के मद्देनजर देखा जा रहा है।

जाट की कमान संभालेंगे हुड्डा

भूपेन्द्र हुड्डा को हरियाणा के सबसे प्रबल जाट नेता के तौर पर माना जाता है। हुड्डा को भले ही लोकसभा में हार का सामना करना पड़ा, मगर जाट मतदाताओं ने हमेशा अपने इस नेता को हाथो-हाथ लिया। शायद आपको याद हो कि लोकसभा चुनाव में जब एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विशाल जनसभा थी, उसी दिन हुड्डा की भी विशाल जनसभा थी और सभी भाजपा कार्यकर्ता कह रहे थे की हुड्डा की सभा फीकी रहेगी। मगर हुड्डा की विशाल जनसभा ने मोदी का रेकॉर्ड तोड़ दिया। इतना ही नहीं जाट नेता चौटाला और बीरेंद्र सिंह से भी ज्यादा ताकतवर भूपेंद्र हुड्डा को माना जाता है। इसलिए कार्यकारी अध्यक्ष बना कर हुड्डा को जाट मतदाताओं को दुबारा कांग्रेस से जोड़ने की जिम्मेदारी हुड्डा को दी जा सकती है।

दलित और पिछड़ा वर्ग की जिम्मेदारी उठाएंगी कुमारी शैलजा

सोनिया गाँधी की खासमखास रही कुमारी शैलजा की खासियत यही है कि उन्होंने अब तक किसी पद की मांग नहीं कि मगर अपनी निष्ठां, ईमानदारी और विश्वासपात्र होने का फल उन्हें पार्टी हाईकमान ने हमेशा दिया। कुमारी शैलजा को अशोक तंवर से ज्यादा बेहतर नेता माना जाता है। केंद्र के जुड़े मुद्दे पर कुमारी शैलजा का कोई हाथ नहीं खींच सकता। यही कारण है कि कुमारी शैलजा को भी कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर उनके हाथों में पार्टी पॉवर दे सकती है। पार्टी यह उम्मीद करेगी कि कुमारी शैलजा को यह जिम्मेदारी देने के बाद वह पिछड़ा और दलित मतदाताओं का दिल जीतने में कामयाब हो जाये और पार्टी को उनकी यह मेहनत संजीवनी की तरह परिणामों में दिखाई दे।

अशोक तंवर “बाय बाय”

अगर कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद का बनाया नया फार्मूला काम करता है तो इसके तहत प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर पर सबसे पहले “गाज नहीं बल्कि प्रमोशन” किया जायेगा। जैसा की आपको पता है “अशोक तंवर” किसी को एक आँख नहीं सुहाते। कांग्रेस हुड्डा ग्रुप और कुछ कार्यकर्ता लगातार अशोक तंवर को हटाने की मांग करते आ रहे हैं। मगर अशोक तंवर अब तक इसलिए बचे हुए है क्योंकि उनके ऊपर राहुल गाँधी का हाथ है और उन्हें राहुल गाँधी का कट्टर समर्थक कहा जाता है। यही कारण है कि जब प्रदेश में उनके खिलाफ में सभी उतर आये हैं तो राहुल उन्हें हो सकता है दिल्ली में रणदीप सुरजेवाला की टीम में शामिल करे और राज्य की राजनीति से दूर अशोक तंवर को केंद्र की राजनीति में ले जाए। मगर यह तभी मुमकिन होगा जब गुलाम नबी आजाद का नया फार्मूला लागू होता है तो।

नॉन जाट के लिए कुलदीप बिश्नोई

कुलदीप बिश्नोई के मामले में यही कहा जाता है कि वह कांग्रेस पार्टी के अंदर एकमात्र नॉन जाट चेहरा है जिनके पास हरियाणा में कांग्रेस की शक्ति बलवान करने की ताकत है। यही कारण है कि पार्टी कुलदीप को कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर उन्हें नॉन जाट मतदाता को कांग्रेस के पाले में लाने की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। बता दें कि कुलदीप के पिता स्वर्गीय भजन लाल हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री रहे है। इसलिए उनके बेटे कुलदीप को पार्टी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दे सकती है। शायद कुलदीप बिश्नोई के लिए आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा से पुराने बदले का जवाब देने का मौका मिल जाये। हो सकता है कि इस कारणवश कुलदीप ने जुलाई से 90 विधानसभा क्षेत्रों में दौरे करने का निर्णय लिया है।

ब्राह्मण और गुर्जर नेता को भी मिल सकती है जिम्मेदारी

इस नए फॉर्मूले के तहत जहां दक्षिण हरियाणा व पिछड़ा वर्ग के प्रतिनिधित्व के तौर पर पूर्व वित्तमंत्री कैप्टन अजय सिंह यादव तो वही ठीक दूसरी तरफ नॉन-जाट कार्ड खेलने वाली भाजपा को मुंह तोड़ जवाब देने के लिए ब्राह्मण या गुर्जर नेता को भी कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।

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