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शैलजा के बयान से भाजपा के खड़े हुए कान

शैलजा ने कहा था भाजपा के बड़े नेता संपर्क में

Hisar Today

बगावत के खतरे को देखते हुए कुछ सीटों की घोषणा में भाजपा लगाएगी देरी 17 सीटों पर नाम तय

अर्चना त्रिपाठी | हिसार टुडे
कांग्रेस की प्रदेशाध्यक्ष कुमारी शैलजा ने जब से यह संकेत दे दिए हैं कि कई भाजपा नेता उनसे संपर्क में है उसके बाद से मानो भाजपा को इस बात का डर खाये जा रहा है कि कहीं भाजपा के अंदर बगावत के स्वर न सुनाई देने लगें। जो कार्यकर्ता सालों से मेहनत कर जिस हलके में भाजपा का जनाधार कम है, उसको मजबूत करने में जुटे हुए थे। अब उन्ही हलकों से वर्तमान विधायकों ने भाजपा में शामिल होकर एक ही मिनट में इन निष्ठावान कार्यकर्ताओं की मेहनत पर पानी फेर दिया। भाजपा ने जब से लोकसभा चुनाव जितने के बाद प्रदेश में भाजपा की लहर कोई दिखा कर विभिन्न पार्टी से आये नेताओं और वर्तमान विधायकों को भारतीय जनता पार्टी में ज्वाइनिंग दिलाई है, उसके बाद से आज नौबत ऐसी आ चुकी है कि हर सीट पर 8 से 10 दावेदारों की लम्बी कतार है, कहीं-कहीं टिकट के लिए इच्छुकों की संख्या 20 पार है।
ऐसी सूरत में भाजपा को यह पता है कि अगर उन्होंने टिकट की घोषणा कर दी, तो इस सूरतेहाल में उन्हें बगावत का भी सामना करना पड़ सकता है। इसलिए भाजपा हर कदम फूंक-फूंक कर रख रही है। क्योंकि इन इच्छुकों में ऐसे नेता भी है जो हर हाल में चुनाव लड़ने को तैयार बैठे हैं। अगर भाजपा से न सही तो किसी और मजबूत पार्टी से। कुमारी शैलजा के बयान ने भाजपा के अंदर होने वाले बगावत के डर को और बढ़ा बना दिया है।

बगावत और भीतरघात
भाजपा ने पार्टी में दूसरे दलों के नेताओं को शामिल कर अपनी ताकत दिखाने की कोशिश जरूर की, मगर अब भाजपा को भी यह एहसास होने लगा है कि कहीं इसका खामियाजा उन्हें चुनाव में भुगतना न पड़े। क्योंकि टिकट के प्रबल दावेदारों में काफी दिग्गजों का भविष्य भी दांव पर लगा है और साथ ही उन कार्यकर्ताओं की मेहनत भी जो अपने नेता की लिए जमीन पर प्रचार करते अपनी जिंदगी गुजार चुके थे। इसलिए अगर टिकट से यह लोग वंचित रहते हैं तो या तो वह बगावत कर दूसरे पार्टी में शामिल होंगे, या तो पार्टी में रहते हुए भी पार्टी के लिए कार्य नहीं करेंगे।

कुमारी शैलजा ने कहा था “भाजपा नेता हैं संपर्क में”
हाल में कुमारी शैलजा ने एक वक्तत्व देकर भाजपा को ज्यादा चौकन्ना कर दिया। उन्होंने दावा किया था कि कांग्रेस का कुनबा लगातर बढ़ रहा है। इसके चलते सत्तारूढ़ भाजपा के भी कई बड़े चेहरे उनके संपर्क में हैं। आज भाजपा में पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी हो रही है। इसका सीधा लाभ कांग्रेस को मिलेगा।

मुख्यमंत्री और प्रदेशाध्यक्ष की सीट पक्की
वैसे बता दें पहले कयास लगाए जा रहे थे कि शायद मुख्यमंत्री हांसी या हिसार से दावेदारी रखें, मगर यह बात बिलकुल निराधार साबित करते हुए करनाल से मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर दुबारा करनाल से और प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला टोहाना से लड़ने वाले है।

नामांकन तारीख तक खींच सकती है उम्मीदवारों की घोषणा

बता दें कि भाजपा अब हर सीट पर बगावती उम्मीदवारों से निपटने के लिए पूरी तरह से चौकन्नी है। भारतीय जनता पार्टी सबसे पहले उन क्षेत्रों के नामो की घोषणा करेगी जहां से उनके वर्तमान विधायक हैं। वही उन सीटों का एेलान आखिर में नामांकन तारीख तक होगा जहां से भाजपा को बगवात का खतरा है। उन सीटों की घोषणा भाजपा ऐसे समय पर करेगी कि ताकि उन लोगों को अन्य पार्टी में शामिल होकर नामांकन भरने का मौका न मिले। बता दें कि भाजपा के पास हरियाणा की ऐसी कोई सीट नहीं बची जहां 10 से 20 दावेदार न हो। बता दें कि फिलहाल हरियाणा की ऐसी 65 सीटें हैैं, जहां तीन से पांच दावेदार टिकट की होड़ में लगे हुए है। इन सीटों पर कांग्रेस व जननायक जनता पार्टी के संभावित उम्मीदवारों से भाजपा को अपने प्रत्याशियों के साथ मुकाबला करना पड़ेगा। इसलिए हो सकता है कि इन तमाम सीटों पर भाजपा फूंक-फूंक कर कदम रखे।

17 सीटों पर नाम लगभग तय
बता दें कि 17 विधानसभा सीटों पर भारतीय जनता पार्टी ने अपने उम्मीदवारों को लेकर तकरीबन नाम फाइनल कर दिए हैं। इन सीटों में शामिल है पंचकूला, अंबाला छावनी, अंबाला शहर, मुलाना, जगाधरी, यमुनानगर, रादौर, लाडवा, शाहाबाद मारकंडा, थानेसर, करनाल, घरौंडा, पानीपत शहर, इसराना, राई, जींद और टोहाना शामिल हैैं।

दूसरी पार्टी से आने वालों के खिलाफ भाजपा के नेता
बता दें दूसरी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल काफी नेताओं को भाजपा के अंदर ही विरोध और अपमान का सामना करना पद रहा है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार गुरुग्राम के सांसद राव इंद्रजीत सिंह कई बार कह चुके हैं कि दूसरे पार्टी से आये लोगों को टिकट दिए जाने का वे विरोध करेंगे। इतना ही नहीं दूसरी पार्टी से आये नेताओं का अलग खुद का मजबूत जनाधार है तो ठीक है, मगर-छोटे कार्यकर्ता सिर्फ गले में भाजपा का पटका डाले हुए है, मगर उनको वह स्थान नहीं मिल रहा है। जिसकी उम्मीद उन्होंने की थी।

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