टुडे विशेषहिसार

बरवाला हलके के कांग्रेसियों ने टिकट की चाहत में अपनों पर ही साधा निशाना

बाहरी और भ्रष्टाचारी प्रत्याशी नहीं होगा मंजूर, प्रदेश व राष्ट्रीय नेतृत्व के समक्ष उठाएंगे आवाज

हिसार टुडे 

यह टिकट की लालसा है  या अपने हक की लड़ाई? यह सवाल आज सामने इसलिए भी है क्योंकि बरवाला के सांझा मंच ने कहा है कि  इस बार संपन्न होने वाले विधानसभा चुनाव में भ्रष्टाचारी और बाहरी उम्मीदवार उन्हें बिलकुल मंजूर नहीं। उन्होंने तो सीधा- सीधा यहां तक आरोप लगा दिया कि अब तक जितने भी कांग्रेस के विधायक जो बाहरी प्रत्याशी रहे है उन्होंने बरवाला की जनता के साथ खिलवाड़ करते हुए सरकारी ग्रांट बरवाला हलके के लिए लेकर विकास कहीं और करवाया, इतना ही नहीं उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग अब तक रहे उन्होंने बरवाला के युवाओं को रोजगार न देकर अपने क्षेत्र के युवाओं को रोजगार दिलाने का काम किया। यह बात आज जिला कांग्रेस कमेटी बीसी सेल अध्यक्ष ईश्वर मालवाल ने पत्रकार वार्ता के दौरान  कही। बता दें कि अब तक कांग्रेस से कुल 7 विधायक  बरवाला विधानसभा क्षेत्र में रह चुके हैं। ऐसे में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाकर अपनी ही पार्टी के पूर्व विधायकों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाना बेहद चिंताजनक है और यह कांग्रेस के अंदर की गुटबाजी को साफ प्रदर्शित करता है। खड़ा होता है कि क्या  इसके पीछे तंवर या हुड्डा के बीच चल रही खींचतान जिम्मेदार है या टिकट की लालसा। वैसे यह जगजाहिर है कि अक्सर बरवाला में बाहरी प्रत्याशियों का बोलबाला रहा है, 2009 में यहां से कांग्रेस की तरफ से रामनिवास घोड़ेला विधायक रहे, जबकि उसके पूर्व  रणधीर सिंह, जयप्रकाश जैसे बाहरी उम्मीदवार कांग्रेस की टिकट से विधायक बने थे। ऐसे में सवाल यह उठ खड़ा होता है कि पूर्व  विधायकों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर उन्होंने अपनी ही पार्टी को कटघरे में ला खड़ा किया। साथ ही अपने ही पूर्व विधायक  रामनिवास घोड़ेला को अलग थलग छोड़कर खुद ही 7 लोग एकत्रित आकर खुद को स्थानीय कहकर, अपने आपको को बरवाला के विकास के लिए टिकट पाने का प्रबल दावेदार मानते हैं। बता दें कि इस मुद्दे को लेकर वह पार्टी के वरिष्ठ नेताओ से मिलकर बाहरी और भ्रष्ट उम्मीदवार को टिकट न दे।

पूर्वविधायकों पर लगाया भ्रष्टाचार का आरोप

आज का यह पत्रकार सम्मलेन आयोजित सांझा मंच एक तीर से दो निशाना करता नजर  आया। एक तरफ तो उन्होंने टिकट के लालच में पूर्व विधायकों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि आज उन्होंने बाहरी और भ्रष्टाचारी प्रत्याशियों के खिलाफ सांझा मंच बनाया ताकि बरवाला में ऐसे प्रत्यशियों को एंट्री न दी जाए। बता दें कि अब तक बरवाला विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस पार्टी के 7 विधायक बने। जिसमें शामिल है 1967 में पी. सिंह, 1968 गोरधनदास, 1982 इंदरसिंह नैन, 1991 जोगिन्दर सिंह, 2000 जयप्रकाश, 2005 रणधीर और 2009 में रामनिवास घोड़ेला। ऐसे में सवाल यह उठ खड़ा होता है कि ईश्वर मालवाल और उनके साथी आखिर किस पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा रहे हैं? उन्होंने बाकायदा यह कहा कि पूर्व के विधायक जो बाहरी थे उन्हें विकास के लिए 2 करोड़ रूपए मिलते उसमें से 50 लाख सिर्फ बरवाला पर खर्च करते बाकी जहां से वह ताल्लुख रखते थे वहां खर्च करते थे। ऐसा कहकर उन्होंने पार्टी हाईकमान और प्रदेशाध्यक्ष के फैसले को ही संदेह के घेरे में ला दिया है।

सांझा मंच के जरिए दिखी गुटबाजी 

आज सांझा मंच में शामिल 7 सदस्यों ने खुद को टिकटार्थी बताकर खुद ही काबिल बताकर कहा  कि वह बरवाला के स्थानीय हैं और पक्के कांग्रेसी है। पार्टी अगर उनमें से या किसी स्थानीय उम्मीदवार को प्रत्याशी के तौर पर उतारती है तो वह उसका सहयोग करेंगे। मगर वह किसी बाहरी को टिकट नहीं देने देंगे और इसके लिए वह पार्टी के श्रेष्ट नेताओं से बात करेंगे और इससे लेकर जल्द मुलाकात करेंगे। हालांकि इस प्रकार का सांझा मंच बनाकर अपने ही पार्टी के पूर्व फैसलों पर सवालिया निशान लगाकर उन्होंने यह साबित किया है कि हाईकमान का पूर्व का फैसला गलत था और कहीं न कहीं बगावती स्वर उठाने का काम कर पार्टी के नेताओ  को कटघरे में खड़े करने का काम किया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वैसे भी बरवाला में कांग्रेस बेहद कमजोर स्थिती में है। यहां असली टक्कर इनेलो के विधायक वेद नारंग और भाजपा के बीच मानी जा रही है। मगर अगर वेद नारंग  भाजपा में शामिल होते हैं तो शायद यहां कांग्रेस का कोई वजूद नहीं रहेगा। क्योंकि भाजपा से कड़ी टक्कर देने के लिए कांग्रेस को यहां से मजबूत उम्मीदवार उतारना समय की जरुरत है।

Tags
Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Close