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अशोक तंवर ने कांग्रेस को बताया “ISRO” और कांग्रेस के कैम्पेन को बताया “चंद्रयान”

तंवर ने कहा कि चंद्रयान की तरह 5 साल तक उनका भी कैम्पेन “कभी पास हुआ कभी फेल”

तंवर ने कहा कि चंद्रयान की तरह 5 साल तक उनका भी कैम्पेन “कभी पास हुआ कभी फेल”
तंवर का हुड्डा पर प्रहार कहा 18 अगस्त को ही लांच हो चुका था घोषणापत्र

अबकी बार 85 पार, भाजपा हरियाणा से बाहर
कैम्पेन लांच कार्यक्रम के बारे में नेतृत्व ने नहीं दी जानकारी : तंवर

महेश मेहता | हिसार टुडे

यह बीमारी इतनी जल्दी कैसे जा सकती है। जी हां बात दुबारा गुटबाजी की आती है। गुटबाजी का जिक्र करते ही आपको पता चल गया होगा कि हम किस पार्टी की बात कर रहे हैं? वह पार्टी है कांग्रेस। कांग्रेस का चुनाव कैम्पेन के लांच का समय था, मगर इस कैम्पेन में जिस प्रकार से पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर की गैरमौजूदगी रही और जब कांग्रेस नेता गुरुग्राम में कांग्रेस का कैम्पेन लांच कर रहे थे तब पूर्व प्रदेशाध्यक्ष कुछ किलोमीटर दूर दिल्ली में अपने कार्यकर्ताओं के साथ थे। उन्होंने इस बात को साबित कर दिया था कि अब भी गुटबाजी और कांग्रेस नेताओं की नाराजगी से कांग्रेस उभर नहीं पाया है।

हुड्डा और शैलजा से नाराज अशोक तंवर ने प्रदेशाध्यक्ष रहते हुए कई कैम्पेन शुरू किए, मगर इसमें उन्हें कितने कांग्रेस नेताओं का साथ मिला यह जगजाहिर है। यही कारण है कि कांग्रेस पार्टी ने जब गुड़गांव में कैंपेन लॉन्चिंग की। इस कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस के चार बड़े नेता एक साथ एक मंच पर नजर आए। इनमें प्रचार समिति के अध्यक्ष कैप्टन अजय यादव, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कुमारी शैलजा, सीएलपी लीडर भूपेंद्र सिंह हुड्‌डा और कांग्रेस नेता कुलदीप बिश्नोई शामिल थे। आगामी विधानसभा चुनाव में एकजुट तरीके से चुनाव में सामने जाने की बात करने वाले कांग्रेस की नयी टीम से जितनी उम्मीद की जा रही थी, उन उम्मीदों पर इस कैम्पेन अभियान की लांच ने जोरदार पानी फेरा।

विधानसभा चुनाव के मद्देनजर यह पहला मौका था जब कांग्रेस के चुनाव प्रचार कैम्पेन में सभी दिग्गज साथ आये थे, मगर कुछ नेताओं की गैरमौजूदगी ने यह साबित कर दिया कि कांग्रेस में सब सही नहीं है। इस कार्यक्रम में गैरमौजूदगी पर पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अशोक तंवर ने पार्टी नेतृत्व पर नाराजगी दिखाते हुए कहा कि उन्हें इस आयोजन की सूचना ही नहीं दी गयी थी।

उन्होंने तो साफ-साफ शब्दों में कहा कि कांग्रेस ISRO के समान है, जहां रोज नए एक्सपेरीमेंट होते हैं। उन्होंने कांग्रेस के कैम्पेन को चंद्रयान की उपमा दी और कहा उन्होंने भी इस प्रकार के कई कैम्पेन किये, मगर यह कैम्पेन लांचिंग बिलकुल चंद्रयान की तरह है जरुरी नहीं कि यह एक्सपेरीमेंट कामयाब हो। इतना ही नहीं उन्होंने इस कैम्पेन लांच होने में हुयी देरी पर जरूर टिप्पणीं की।

हुड्डा की घोषणाएं होंगी या नहीं, इस पर पार्टी हाईकमान लेगा फैसला

कांग्रेस की वरिष्ठ नेता किरण चौधरी ने हाल में बयान में कहा कि मेनिफेस्टो के लिए हजारों की संख्या में लोगों ने सुझाव दिए हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने भी इसके लिए सुझाव दिए हैं। सभी सुझावों पर गहनता से विचार विमर्श किया गया है। कमेटी अगले सात दिनों में मेनिफेस्टो को फाइनल कर देगी। इसमें किसान, युवा, मजदूर, कर्मचारी, व्यापारी, महिला, गरीब आदि सभी का ध्यान रखा जाएगा। कांग्रेस की सरकार सत्ता में आएगी, क्योंकि भाजपा की जन विरोधी नीतियों से प्रदेश की जनता अब परेशान हो चुकी हैै। उन्होंने कहा कि सभी पार्टियां अपना घोषणा पत्र तैयार कर रही है, लेकिन हम प्रयास कर रहे हैं कि कांग्रेस का घोषणा पत्र सबसे अलग हो और उसमें सभी वर्गों का ध्यान रखा जाए। हालांकि कांग्रेस के घोषणा पत्र में यह देखना विशेष रहेगा कि पूर्व सीएम हुड्डा द्वारा बीते दिनों रोहतक रैली में पत्र में की गई घोषणाओं को इसमें जगह दी जाती है या नहीं।

कौन होगा सीएम? तंवर का जवाब सीएम की घोषणा 18 अगस्त को तो हो चुकी

बता दें कि नेतृत्व और सीएम के पद को लेकर लगातार खींचतान के बाद जिस प्रकार भूपेंद्र सिंह हुड्डा कि 18 अगस्त के परिवर्तन रैली के बाद पार्टी हाई कमान ने तुरंत हुड्डा को बुलाकर सीपीएल लीडर के साथ कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष की कमान कुमारी शैलजा के हाथो में दी। उसके बाद से ही अब यह चर्चा चल रही है कि कौन होगा कांग्रेस के सीएम पद का चेहरा? जब यही सवाल अशोक तंवर से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि 18 अगस्त को सीएम और चार उपमुख्यमंत्री की घोषणा पहले ही हो चुकी है। फैसला तो बाद में होना है। जब तक सारे लीडर्स की शक्ति का, सारे कार्यकर्ताओं की शक्ति का एक दिशा में सदुपयोग नहीं होगा, तो रास्ता कठिन है, लेकिन सरकार हमारी बनेगी।

लॉन्चिंग प्रॉपर हो, लैंडिंग प्रॉपर हो, हमारी शुभकामनाएं : अशोक तंवर

अशोक तंवर ने कांग्रेस के कैम्पेन लांच पर खुद को न बुलाये जाने की बात कहते हुए एक तरफ अभी की नयी कांग्रेस टीम पर निशाना साधने की कोशिश की, बल्कि हुड्डा और शैलजा पर जमकर प्रहार करते हुए आज की हरियाणा कांग्रेस को “ISRO” की संज्ञा दी और कहा यहां हर दिन नए प्रयोग होते रहते हैं। जरुरी नहीं कि सारे प्रयोग कामयाब हों। अशोक तंवर ने कहा मैंने भी कई बार कई कैम्पेन का आयोजन किया कोई पास हुआ कोई फेल। उन्होंने कहा कि इस कैम्पेन लांच को हमारी शुभकामनाएं हैं, लॉन्चिंग प्रॉपर हो, लैंडिंग प्रॉपर हो। इतना ही नहीं उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश के नेताओं की जिम्मेदारी बनती है कि उनको किसी के सहयोग की जरूरत है या नहीं। जिन लोगों ने पांच साल काम किया है, उनकी सुनवाई होनी चाहिए। कैंपेन लॉन्चिंग पर उन्होंने कहा कि हो सकता है तीन चार लोगों को ही बुलाया गया हो, जो लोग जिम्मेदारी के पद पर बैठे हैं, उनको चाहिए कि सबकाे बुलाया जाए। हम 85 पार करेंगे, कांग्रेस सरकार बनाएगी।

सिर्फ परिवारवाद से नहीं, जीतने की गारंटी से मिलेगी टिकट

कांग्रेस हमेशा ही परिवारवाद के मुद्दे पर घिरा रहा है। यही कारण है कि गुटबाजी के बीच हरियाणा कांग्रेस की नई टीम यह तय कर सकती है कि इस बार परिवारवाद के मुद्दे को लेकर शायद वह सख्त भूमिका अख्तियार करे। अगर परिवारवाद के खिलाफ हाई कमान सख्त भूमिका अखितयार करता है तो काफी प्रत्याशियों को मुसीबतों का सामना करना पड़ सकता है। बता दें कि नई टीम की सोच के आधार पर कांग्रेस हाई कमान ने यह निर्णय लिया है कि इस बार विधानसभा चुनाव में एक परिवार से एक ही व्यक्ति को टिकट दिया जाएगा। अगर ऐसा होता है तो कईयों की मुसीबत बढ़ सकती है। मगर ठीक दूसरी तरफ कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कुमारी शैलजा ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि इस बार भाजपा को हराने के लिए वह जिताऊ कंडीडेट को प्राथमिकता देगी। कांग्रेस इस बार जिस होमवर्क के साथ भाजपा का मुकाबला कर रही है, अगर उसे कांग्रेस के सभी नेताओं का साथ मिला तो मजबूती कायम रहेगी, वरना उनका वही हाल होगा जो लोकसभा चुनाव के दौरान हुआ था। चूंकि अब भूपेंद्र सिंह हुड्डा व्यस्त हैं तो दीपेंद्र सिंह हुड्डा जमीनी प्रचार का दायित्व उठा रहे हैं। वैसे तो अशोक तंवर खुद ही कह चुके हैं कि हारे हुए प्रत्याशी को इस बार कांग्रेस हाई कमान टिकट न दे। मगर यह बात वह भाषणों में करते हैं, पार्टी हाई कमान से नहीं। इसलिए उनकी बातों को कोई गंभीरता से नहीं लेता। ठीक दूसरी तरफ कुमारी शैलजा भी यह कहा चुकी है कि जिताऊ कैंडिडेट अगर कोई युवा हो, महिला हो या कोई नया चेहरा इस बार कांग्रेस ऐसे लोगों को चुनाव लड़वाएगी।

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