टुडे विशेषहिसार

अशोक अरोड़ा और रामपाल माजरा थाम सकते है भाजपा का दामन

माजरा कलायत से तो अशोक अरोड़ा पिहोवा से हो सकते है भाजपा उम्मीदवार | दोनों ही नेताओ से अब तक मुलाकता को लेकर आ रहा खंडन

हिसार टुडे।अर्चना त्रिपाठी

अभय चौटाला के घर में एक तरफ शादी की शहनाइयाँ बज रही है, तो वही ठीक दूसरे तरफ अपनी अलग शहनाइयां बजाने में इंडियन नेशनल लोकदल के दो नेता व्यस्त नजर आ रहे है। यह नेता और कोई नहीं बल्कि यह नेता इनेलो नेता अभय चौटाला के खासमखास रहे पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक अरोड़ा और रामपाल माजरा। वही माजरा जिन्होंने जननायक जनता पार्टी की नेता नैना चौटाला के खिलाफ विवादास्पद बयानबाजी करने में कभी गुरेज नहीं किया वही अरोड़ा और माजरा जिन्होंने अजय चौटाला के दोनों बेटो को विलन बनाया।
मगर अब खबर है कि लोकसभा चुनाव के बाद इनेलो की दुर्गति देख अब दूसरे विधायकों की तरह इन दो इनेलो नेताओ का भी मन परिवर्तन होता जा रहा है। अब उन्हें इनेलो में भविष्य बिलकुल नहीं दिख रहा यही कारण है कि हाल में इनेलो को बहुत बड़ा झटका देते हुए रामपाल माजरा और अशोक अरोड़ा ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से मुलाक़ात कर राजनितिक गलियारों में सुर्खिया पैदा कर दी है. फिलहाल अब हरियाणा की राजनीति में यह खुलेआम चर्चाओं का बाजार गर्म है कि ये दोनों दिग्गज भी इनेलो को अलविदा कह कर बीजेपी का कमल अपने हाथो में थाम सकते हैं।

सूत्रों का मानना है कि इनेलो के इन दोनों दिग्गजों ने मंगलवार रात को मुख्यमंत्री मनोहर लाल से मुलाकात की है। सीएम हाउस पर रात 10 बजकर 15 मिनट से करीब 11 बजकर 20 मिनट तक चली मुलाकात के बाद से ही चर्चाओं का बाजार गर्म है कि ये दोनों दिग्गज भी इनेलो को अलविदा कह कर बीजेपी का कमल थाम सकते हैं। वैसे बता दें कि विधान सभा चुनाव से पहले भाजपा में दूसरे दलों से आने वाले नेताओं का सिलसिला लगातार जारी है। पिछले चुनाव में 90 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार की कमी से जूझने वाली भाजपा का कुनबा इस विधानसभा चुनाव के पहले ओवरफ्लो होने लगा है। हालात आज ये हो गए हैं कि हर विधान सभा सीट पर पार्टी के पास 5 से 10 संभावित उम्मीदवारो की टिकट की रेस में कतार लग चुकी है। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले से लेकर अब तक भाजपा में करीब 46 कद्दावर नेता शामिल हो चुके हैं जिसमें मौजूदा विधायक पूर्व विधायक और राज्य सभा सांसद भी शामिल हैं।

भाजपा में शामिल कुल 46 में से इनेलो के 21 नेताओ ने भाजपा में जताई आस्था

इस बात से कोई इंकार नहीं कर सकता है, कि विचले विधानसभा चुनाव की तुलना में भारतीय जनता पार्टी ने इस विधानसभा चुनाव के पहले हुए लोकसभा चुनाव में धड़ाधड़ दूसरे पार्टी से आये नेताओ और कार्यकर्ताओ की एंट्री करवाते हुए पहले ही जंग जीत ली थी , मगर इस बार विधानसभा चुनाव में भी भाजपा के साथ कुछ ऐसा ही माहौल दिखाई दे रहा है। शायद आपको यह जानकार ताजुब हो कि अब तक भारतीय जनता पार्टी के नेता और मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर पर आस्था जताकर इनेलो के 5 विधायक, 1 राज्यसभा सांसद, 7 पूर्व विधायक और मंत्री शामिल हो चुके है। जबकि कुछ जिला अध्यक्ष और ज्यादातर लोग ऐसे हैं जो पहले चुनाव लड़ चुके हैं। मतलब साफ़ है की हाल में भाजपा में शामिल 46 में से 21 नेता अकेले इनेलो से नाता तोड़कर भाजपा में शामिल हुए हैं। जिसके चलते जहां मनोहर लाल का मिशन 75 पार हो गया है, बल्कि एक समय में मजबूत विपक्ष के रूप में गिनी जाने वाली इनेलो अब हरियाणा की सबसे कमजोर पार्टी बनकर रह गयी है।

भाजपा में शामिल हुए इनेलो नेता

इनेलो की विकेट गिरने का सिलसिला नलवा से इनेलो विधायक रणबीर गंगवा से शुरू हुआ। उन्होंने लोकसभा चुनाव के नतीजे के पहले ही इस बात का आभास लगा लिया था कि आगे आने वाला फ्यूचर भाजपा का ही है। उसके बाद हिम्मत जुटा कर हथीन से इनेलो विधायक केहर सिंह रावत, फतेहाबाद से बलवान सिंह दौलतपुरिया, नूंह से विधायक जाकिर हुसैन और जुलाना से विधायक परमिन्द्र ढुल भाजपा में शामिल हुए, जबकि इनेलो से ही मौजूदा राज्यसभा सांसद रामकुमार कश्यप ने भी भाजपा का दामन थामा। हाल ही में गुरुग्राम से इनेलो के कद्दावर नेता और इनेलो सरकार में डिप्टी स्पीकर रह चुके गोपीचंद गहलोत भी भाजपा में शामिल हो चुके हैं। ऐसे में अब अगली बारी का भाजपा इंतज़ार कर रही है।

माजरा कलायत हो सकते है उम्मीदवार

भाजपा रणनीति के तहत इनेलो से आये इन दोनों को नेताओ को अहम् जिम्मेदारी देने की मूड में है। माना जा रहा है कि कैथल में हमेशा से एक्टिव रहे इनेलो नेता रामपाल माजरा को भाजपा कैथल जिला के अंतर्गत आने वाले कलायत से चुनाव में उतार सकती है। कलायत वही विधानसभा क्षेत्र है जहां से 2014 के विधानसभा चुनाव में पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं निर्दलीय विधायक जयप्रकाश उर्फ़ जेपी ने रामपाल माजरा को मात्र तकरीबन 8 हजार वोटो से शिकस्त दी थी। इसलिए अब माजरा को भी ऐसा प्रतीत हो रहा है कि अगर उनकी रणनीति कारगर साबित हुयी तो भाजपा के टिकट मिलने पर उनके जितने की उम्मीद ज्यादा है।

अशोक अरोड़ा को पेहवा से भाजपा की टिकट से पेश कर सकते है दावेदारी

वही हरियाणा के कृषि मंत्री रह चुके कुरुक्षेत्र जिले के पिहोवा हलके के इनेलो विधायक जसविंदर सिंह संधू के देहांत हो चूका है यही कारण है कि अशोक अरोड़ा जो खुद इनेलो पार्टी से भाजपा में शामिल हो सकते है,ऐसी गुंजाइशे नजर आ रही है कि हो सकता है कि पार्टी उन्ही को वहां से दावेदारी दे।

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