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निरंतर उदासी से व्यक्ति बन जाता है मनोरोगी

आशीष लावट| हैल्थ टुडे

डिप्रेशन मनोदशा एक गंभीर अवस्था है यह सिर्फ उदास होने की भावना से ज्यादा आता है। कभी कभार उदास रहना भी संभावित है लेकिन यह उदासी अगर रोजाना बनी रहती है तो यह दैनिक गतिविधियों को बाधित करती है। इसमें चिकित्सक मदद की जरूरत है और साथ किसी भी अन्य शारीरिक विनाश के समान ही है। इसे पागलपन न समझे डब्ल्यूएचओ के अनुसार दुनिया के लगभग 350 मिलियन लोग अवसाद की चपेट में है हर तीन में से दो जिंदगी में एक बार डिप्रेशन का शिकार जरूर होते हैं वक्त पर इलाज इससे निजात पाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

कैसे पहचाने डिप्रेशन के मरीज को?
आपका कोई दोस्त या परिचित अगर हमेशा उदास हो परेशान रहता हो या खुद को बेबस महसूस करता हो, बिल्कुल कम खाता हो या बहुत ज्यादा खाता हो, खूब सोता हो या बिल्कुल नींद नहीं आती हो, खुशी के मौके पर भी इग्नोर करता हो किसी से चिढ़कर या झल्ला कर बात करता हो तो आप समझ जाइए कि उसे डॉक्टर के इलाज की जरूरत है। ऐसे समय में उस पर गुस्सा ना हो ना ही उससे लड़ें उसका साथ दें मदद मांगने के लिए हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए। अधिकतर लोग हिचकिचाहट के चलते किसी मनोरोग विशेषज्ञ के पास न ले जाकर झाड़-फूंक वाले बाबाओं का सहारा लेते हैं और अपनी जिंदगी बर्बाद कर लेते हैं। आप यह समझे कि अवसाद एक सामान्य बीमारी है इसकी पहचान और सही निदान कर पाना किसी एक व्यक्ति या एक गैर मनोरोग स्पेशलिस्ट के लिए भी मुश्किल है।

डिप्रेशन से बचने के उपाय

अपने मस्तिष्क को क्रियाशील रखें स्वयं का मन काम में लगाए अपितु दैनिक कार्यों से समय निकाले, विश्राम करें, नियमित रूप से योग करें व ध्यान लगाएं। विश्राम की तकनीके अपनाएं मेडिटेशन से मस्तिष्क में अल्फा बेबस का संचार होता है। जो अपने वितरित मस्तिष्क को दैनिक तनाव से मुक्त करने में मदद करता है। नियमित रूप से व्यायाम करने से शरीर में एंडोर्फिंस का स्तर बढ़ता है जो उत्तेजना, तनाव, हताश, आत्मन व नफरत जैसे लक्षणों से दूर रखता है। खुद के लिए कठिन लक्ष्य तय ना करें। जल्दबाजी अथवा अत्यधिक काम एक साथ ना करें। बड़े कार्यों को छोटे-छोटे कार्य में विभाजित करें। प्राथमिकता तय करें एक अनुशासन के रूप में कार्य करें जिम्मेदारियों से भागे नहीं। नकारात्मक सोच डिप्रेशन का एक भाग है। खुद को दोषी ना मानें जैसे-जैसे आप का इलाज होगा व नकारात्मकता खुद ही दूर होती चली जाएगी। अपने लक्षणों तथा अनुभूतियों को एवं अन्य जो भी प्रश्न आपके दिमाग में आए उनको एक डायरी में रिकार्ड रखें अपने जीवन में उन पहलुओं को पहचानें जो आपको सुखी रखता है।

अकेले रहने से अच्छा है समूह में रहें अपनी आत्मिक चिंताओं को अनुभूतियों को अपने शुभचिंतकों या अपने चिकित्सक से डिस्कस करें। ऐसी स्थिति में उन वस्तुओं का उपयोग ना करें जो अक्सर तनाव की स्थिति में लेते हैं जैसे शराब तंबाकू याद अधिक चाय कॉफी सेवन ना करें। खानपान में बदलाव नियमित रूप से पोस्टिक आहार ग्रहण करें पोस्टिक आहार में रेशा युक्त भोजन ताजे फल सब्जियां अधिक मात्रा में लें। डिप्रेशन का इलाज संभव है इसका इलाज ना होने की स्थिति में गंभीर समस्या हो सकती है कोई भी व्यक्ति मानसिक रूप से बीमार है तो वह मनोचिकित्सक की सलाह जरूर लें।

 

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