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बेरोजगारी बना ‘हॉट’ मुद्दा

भाजपा ने कहा विपक्ष बौखलाया, नहीं मिल रहा मुद्दा

अर्चना त्रिपाठी | हिसार टुडे

दीपेंद्र हुड्डा ने कहा युवाओं का मनोहर लाल के राज में हुआ बुरा हाल
दुष्यंत ने “रोजगार मेरा अधिकार” मुहिम के माध्यम से किया मनोहर सरकार पर प्रहार

श्री हरिवंश राय बच्चन की वह कविता हर बार जहन से निकल आती है, जहां उन्होंने कहा था
लहरों से डर कर  नौका पार नहीं होती।
कोशिश करने वालों की  कभी हार नहीं होती ॥
असफलता एक चुनौती है,  स्वीकार करो। क्या कमी रह गयी, देखो और सुधार करो ॥
जब तक न सफल हो, नींद – चैन को त्यागो तुम।
संघर्षों का मैदान छोड़  मत भागो तुम ॥
कुछ किये बिना ही  जय जयकार नहीं होती।
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती ॥

यह कविता इस बात की प्रेरणा देती है कि राजनीति सेवा करते जाओ और अपनी हार के डर से शांत न बैठो, बल्कि हर चुनौतियों का डट कर सामना करो। इस कविता की जरुरत आज इसलिए पड़ी क्योंकि अब महज गिनती के ही दिन बचे हैं और सभी राजनीतिक पार्टियों की तकदीर का फैसला होना बाकी है आज 10 लोकसभा सीट जीत कर भाजपा अपनी रणनीति के तहत आगे बढ़ रही है।

भाजपा ने तो मिशन 75 का टारगेट रखकर पहले ही विपक्ष को चिंता में डाल दिया है। इतना ही नहीं लोकसभा की हार के बाद अब विपक्ष और तेजी के साथ मनोहर लाल खट्टर सरकार को उनकी विभिन्न नीतियों के तहत घेरने पर उतारू हो चुका है। अब जब कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष को लेकर कोई भी फैसला नहीं होने से अब हुड्डा खुद ही पार्टी के विधायकों को एकजुट कर चुनाव की तैयारियों में लग चुके हैं। वहीं जननायक जनता पार्टी के नेता दुष्यंत चौटाला बेरोजगारी के बढ़ते प्रमाण को लेकर सरकार को घेरने से ज्यादा “रोजगार मेरा अधिकार” मुहीम की शुरुवात कर सभी बेरोजगार युवाओं के आंकड़े इकठ्ठा कर उसे सरकार को सुपुर्द करके सभी युवाओं को रोजगार देने का वह दबाव बनाने वाले हैं। उन्होंने जिस प्रकार से कड़े तेवर दिखाने शुरू कर दिए उससे यह तो तय हो चुका है कि इस विधानसभा चुनाव में भाजपा को घेरने में विपक्ष पूरा जोर लगाकर लोकसभा चुनाव की हार का बदला लेगा। यही कारण है कि कांग्रेस, जननायक जनता पार्टी, इंडियन नैशनल लोकदल, आम आदमी पार्टी और बसपा अब अपने एक्टिव मोड़ पर आ चुकी हैं।

हाल में विपक्ष ने नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस (एनएसएसओ) के आंकड़ों का हवाला देकर सरकार को घेरने की कोशिश शुरू कर दी है। जहां इस बात का खुलासा किया गया कि साल 2017-18 में देश के 11 राज्यों में बेरोजगारी दर राष्ट्रीय औसत से अधिक रही। बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, हरियाणा, असम, झारखंड, केरल, ओडिशा, उत्तराखंड और बिहार में 2011-12 की तरह बेरोजगारी दर 2017-18 में भी राष्ट्रीय औसत से ज्यादा रही है।

इसके अलावा 2017-18 की इस सूची में पंजाब, तमिलनाडु, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश नए राज्य शामिल हुए हैं। साल 2011-12 में जब आखिरी सर्वेक्षण हुआ था तो नौ राज्यों में बेरोजगारी दर राष्ट्रीय स्तर के मुकाबले अधिक थी। रिपोर्ट के मुताबिक 19 प्रमुख राज्यों में से केरल में साल 2017-18 में सर्वाधिक बेरोजगारी दर रही। इस दौरान यह दर 11.4 फीसदी रही जबकि 2011-12 में यह दर 6.1 फीसदी थी। बेरोजगारी दर हरियाणा में 8.6 फीसदी, असम में 8.1 फीसदी और पंजाब में 7.8 फीसदी रही।

ये आंकड़े जुलाई से लेकर जून के बीच की अवधि के हैं। इसी मुद्दे लेकर न केवल दुष्यंत चौटाला बल्कि दीपेंद्र हुड्डा सरकार को आड़े हाथो लिया है। मगर उसके जवाब में मनोहर लाल खट्टर 2 कदम और आगे जाते हुए एक धन्यवादी दौरे में कहने लगे कि वह आने वाले 15 दिनों में 15000 नौकरियां निकाल रहे हैं। इतना ही नहीं विधायक डॉ कमल गुप्ता पहले ही कह चुके हैं कि उनकी सरकार ने अब तक 70000 नौकरियां दे चुकी है और जनता ने भारी भरकम वोट देकर यह दिखाने की कोशिश की है कि जनता भाजपा के रोजगार नीति से संतुष्ट है। यही कारण है कि चुनाव में विपक्ष बेरोजगारी के मुद्दे पर शायद ही राजनीति न कर पाए।

विपक्ष बौखलाया, उसके पास कोई मुद्दा नहीं, इसलिए ढूंढ रहा मुद्दा : डॉ. कमल गुप्ता

हिसार के विधायक डॉ कमल गुप्ता ने कहा कि 70,000 नौकरियां खत्म करके मनोहर सरकार ने प्रदेश में “पर्ची और खर्ची” को रोकने का काम किया। इतना ही नहीं आने वाले समय में सरकार ने 20,000 नौकरियां देने का भी फैसला किया है। अगर वाकई हरियाणा में बेरोजगारी होती तो उनका परिणाम उन्हें जींद उपचुनाव, मेयर चुनाव या लोकसभा में मिलता मगर जनता ने “रोजगार नीति” को सराहते हुए लोकसभा चुनाव में उन्हें भर भर कर वोट दिया। रोजगार के मसले पर कमल गुप्ता ने विपक्ष पर हमला करते हुए कहा कि “प्रत्यक्ष को प्रमाण” की जरुरत नहीं होती। उन्होंने कहा कि जो लोग खुद लाखों के वोट से पराजित हुए उनके पास सिवाय यह सवाल उठाने के और कोई मुद्दा ही नहीं है। उन्होंने कहा कि पिछले 5 साल का काम जनता ने देखा है। जनता में भाजपा के पक्ष में सकारात्मक हवा है। इसलिए अब विपक्ष बौखला गया है। उनकी स्थिित ऐसी हो गयी है जिसके बारे में कुछ कहने का ही मन नहीं करता।

भाजपा ने हरियाणा को धकेला बेरोजगारी की गर्त में : दीपेंद्र

चूंकि अब चुनाव को महज गिनती के ही दिन बचे है ऐसे में कांग्रेस नेता दीपेंद्र सिंह हुड्डा लोकसभा चुनाव में हार के बाद और अधिक आक्रामक अंदाज में नजर आ रहे हैं। उन्होंने भाजपा सरकार पर निशाना साधा और नए उद्योग आने में कमी और बेरोजगारी के मसले पर मनोहर लाल खट्टर सरकार को घेरने की कोशिश की। वह प्रदेश सरकार पर जमकर हमलावर होते दिखाई दे रहे हैं। दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि मनोहर लाल सरकार ने राज्य के युवाओं को बेरोजगारी की गर्त में धकेल दिया है।

कांग्रेस के कार्यकाल में निवेश दर व नए उद्योग लगाने में हरियाणा नंबर वन हुआ करता था। लेकिन, भाजपा ने अपने कार्यकाल में हरियाणा और यहां के युवाओं का बुरा हाल कर दिया है। दीपेंद्र हुड्डा ने तो यहां तक कहा कि केंद्र सरकार ने पिछले सप्ताह की इस सच्चाई को स्वीकार किया है कि देश में बेरोजगारी का स्तर बीते 45 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच चुका है। एक अन्य रिपोर्ट में सामने आया है कि पूरे उत्तर भारत में हरियाणा में बेरोजगारी की दर सर्वाधिक 8.8 फीसद है। उन्होंने सवाल किया कि भाजपा सरकार बताए कि कांग्रेस के समय जो हरियाणा निवेश व नए उद्योग लगाने में पूरे देश में सबसे आगे था, आज वह बेरोजगारी की गर्त में कैसे चला गया है। दीपेंद्र ने एक रिपोर्ट के हवाले से कहा कि आवधिक श्रमबल सर्वेक्षण रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हो रही है कि देश में बेरोजगारी का स्तर 45 वर्षों के उच्चतम स्तर पर है।

हरियाणा में 15 से 59 वर्ष के आयु वर्ग में बेरोजगारी का स्तर पड़ोसी राज्य पंजाब के 8.3 प्रतिशत, हिमाचल के 6.2 प्रतिशत तथा जम्मू कश्मीर के 5.2 प्रतिशत के मुकाबले सर्वाधिक है। यह राष्ट्रीय औसत 6.5 प्रतिशत से काफी ज्यादा है। दीपेंद्र ने यहां तक कहा कि 2014 में भाजपा ने हर साल दो करोड़ नौकरियां देने का वादा किया था, लेकिन इन पांच सालों में पौने 5 करोड़ लोग बेरोजगार जरूर हो गए।

युवा नहीं बना रहे कृषि को अपना करियर

अब तक के परिपाटी थी कि ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी की दर शहरों की तुलना में कम हुआ करती थी। क्योंकि बड़ी संख्या में नौजवान कृषि या इससे जुड़े लघु उद्योगों में कार्य करते थे, लेकिन अब गांव एवं शहरों की स्थिति एक जैसी होती जा रही है। मंत्रालय द्वारा हाल में जारी आवधिक श्रमबल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) में 15-29 साल के युवाओं में बेरोजगारी के अलग से आंकड़े एकत्र किए गए हैं। इसके मुताबिक 2011-12 में 15 से 29 वर्ग के युवकों में बेरोजगारी की दर पांच फीसदी थी जो 2017-18 में बढ़कर 17.4 फीसदी हो गई। यह शहरी क्षेत्र के युवाओं में बेरोजगारी दर से महज एक फीसदी कम है।

क्या है वजह

जानकार ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी में तेजी से बढ़ोतरी के पीछे दो प्रमुख कारण मान रहे हैं। पहला, शिक्षा का स्तर बढ़ने से कृषि कार्य में युवाओं की हिस्सेदारी घट रही है। दूसरा, कृषि से जुड़े छोटे-मोटे ग्रामीण काम धंधे बंद हो रहे हैं।

क्या कहती है रिपोर्ट

नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस के आंकड़ों के मुताबिक साल 2017-18 में देश के 11 राज्यों में बेरोजगारी दर राष्ट्रीय औसत से अधिक रही, जबकि 2011-12 में नौ राज्यों में बेरोजगारी दर राष्ट्रीय स्तर के मुकाबले अधिक थी। बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक हरियाणा, असम, झारखंड, केरल, ओडिशा, उत्तराखंड और बिहार में 2011-12 की तरह बेरोजगारी दर 2017-18 में भी राष्ट्रीय औसत से ज्यादा रही है। इसके अलावा 2017-18 की इस सूची में पंजाब, तमिलनाडु, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश नए राज्य शामिल हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 19 प्रमुख राज्यों में से केरल में साल 2017-18 में सर्वाधिक बेरोजगारी दर रही। इस दौरान यह दर 11.4 फीसदी रही जबकि 2011-12 में यह दर 6.1 फीसदी थी। जबकि अगर हरियाणा में बरोजगारी दर की बात करें तो यह 8.6 फीसदी रही। जबकि असम में 8.1 फीसदी और पंजाब में 7.8 फीसदी रही। ये आंकड़े जुलाई से लेकर जून के बीच की अवधि के हैं। रिपोर्ट के मुताबिक साल 2017-18 में राष्ट्रीय स्तर पर बेरोजगारी दर 6.1 फीसदी रही, जबकि 2011-12 में यह 2.2 फीसदी था। महिलाओं की बेरोजगारी दर हरियाणा में 11.4 फीसदी रही, जो महिलाओं के राष्ट्रीय औसत (5.7 फीसदी) से लगभग दोगुनी है। पुरुषों में बेरोजगारी दर झारखंड के बाद हरियाणा में ये आंकड़ा 8.1 फीसदी रहा है। गांवों में युवा महिलाओं में बेरोजगारी दर 29.4 फीसदी रही है। शहरी इलाकों में युवा महिलाओं की बेरोजगारी दर 2017-18 में 36.1 फीसदी रही है। जो सबसे गंभीर मुद्दा है

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