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Hisar Today |हुडा अपने ही जमीन पर किया अतिक्रमण 

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एन्हांसमेंट के मुद्दे के बाद सेक्टर 33 प्लाट आवंटन को लेकर हुए घोटाले में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) की काली कारगुजारी का पर्दाफाश हुआ है। शहर के लोगों को उनके सपनो का आशियाना उपलब्ध कराने के लिए हुडा ने 2013 दिसंबर में सेक्टर 33 में अलग अलग साइज के 1990 प्लाट काटे थे। इन प्लॉटों का ड्रा निकालने के बाद 2016 में हुड्डा ने वादा किया था कि नए साल (2017) में प्लाट क्रमांक 33 का 90% काम पूरा करके प्लाट धारकों को उनके जमीन का कब्जा दे दिया जायेगा। मगर (2013-2018) 5 साल गुजर जाने के बावजूद हुडा ने विकास तो दूर विकास के नाम पर प्लाट धारकों के साथ बहुत बड़ी धोखाधड़ी की है ।

नियमानुसार 3 साल में हुडा को रोड, सीवरेज, पेयजल लाइन, बिजली की लाइनों, पार्क, पानी बोस्टर का निर्माण कर प्लाट धारकों को प्लॉट आवंटित करना अनिवार्य था, अगर वह 3 साल में विकास करने में असमर्थ रहती है तो उसे 9% ब्याज प्लॉट धारकों को प्रदान करना होगा। मगर सभी नियमो को ताक पर रखते हुए हुडा ने सभी घोटाले की हदें पार करते हुए विकास शील कार्य पूरा किये बगैर प्लाट धारकों को कब्जा देकर उनसे प्लाट का 15% ब्याज वसूल कर करोड़ो रुपये की अवैध रूप से उगाही कर अपनी तिजोरी भरने का काम किया। हुडा की इस धोखाधडी के खिलाफ रहिवासी ज्ञान गुप्ता की तरफ से सरिता रानी केस न. 145/2017 और सजन लावत केस न. 184/2017 के तहत उपभोक्ता अदालत में मई 2017 को शिकायत दर्ज करवाई गयी ।

उन्होंने अपनी शिकायत में हुडा की घोखाधड़ी उजागर करते हुए कहा कि न तो प्लाट से सटे दीवार को गिराया गया है, न ही प्लाट से सटे 45 मीटर सड़क का निर्माण करवाया गया है। फलस्वरूप दिल्ली- हिसार- सिरसा रोड से कनेक्टिविटी न के बराबर है। फिर भी हुडा ने उपभोक्ताओं को जमीं का कब्ज़ा देकर उनके साथ धोखधड़ी की है। उपभोक्ता अदालत ने प्लॉट धारकों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए हुडा को जोरदार फटकार लगाई और उन्हें सभी प्लाट धारकों का पैसा वापस करके खुद उन्हें 9% ब्याज देने के आदेश दिए। हालांकि यह दरे 20 लाख से अधिक होने के कारण यह मुद्दा अब राष्ट्रीय उपभोक्ता अदालत तक पहुँच गया है। ज्ञान गुप्ता ने कहा है की वो जल्द हुडा की धोखाधड़ी के खिलाफ राष्ट्रिय उपभोक्ता अदालत जाएंगे और इस धोखाधड़ी के लिए उन्हें सजा दिलवाएंगे।

सरकार ने अवैध निर्माणकार्य पर नकेल कसने के लिए सख्त कानून बना रखे है , परन्तु यहाँ खुद हुडा ही ने ही सड़क के लिए आरक्षित जमीं पर ६ फुट पर अतिक्रमण कर रखा है। ऐसे में सवाल ये उठ खड़ा होता है की हुडा के खिलाफ क्या प्रशासन कार्यवाई करने की हिम्मत दिखायेगा। आज भी उजाड़, वीरान, जंगली झाड़ियों से पूरा प्लाट पटा हुआ है। गौरतलब है कि अदालत में जाने के बाद हरकत में आयी हुडा ने नाममात्र विकास किया। पथ बिजली खंबे है, मगर वहां बिजली नही। पानी बूस्टर है, मगर पानी नही। कच्ची पगडंडी है मगर सड़के नही। यह है हक्कीत हुडा के कार्य की। हालाँकि हुडा के अधिकारियों का दावा है की उन्होंने विकास किया है , और वहां कोई अतिक्रमण नहीं है।

हुडा ने सालो पुराने नाले को ही मैप से किया गायब

घोटालेबाज हुडा ने इस परिसर में वर्षो पुराने बड़े नाले को ही अपने प्रोजेक्ट मैप से गायब कर दिया है। नाले से होकर गुजरते प्लाट धारकों को नाला पाठने के ही हुडा ने हिदायते दे रखी है। आधे परिसर में नाला मिट्टी डालकर बंद भी किया जा चूका है। इस परिसर में पड़ा नाला इस बात को साबित कर रहा है की उसका अस्तित्व बहुत सालो से है , मगर हुडा ने जमीं की लालच में ही उस नाले को मैप से ही गायब कर दिया।

हुडा ने सारी हदें पार करते हुए अपने ही प्लॉट में अवैध अतिक्रमण कर रखा है।  हुडा द्वारा निर्मित पानी बुस्टर ने 40 फुट की सड़क में से 6 फुट सड़क पर अतिक्रमण कर बूस्टर का निर्माण किया है।

ट्रांसफॉर्मर नही – बिजली नही

हुडा ने लोगो को रहने के लिए जमीन का कब्ज़ा दे रखा है।  जबकि कब्ज़ा देने के पूर्व इस परिसर में सबसे बुनियादी जरूरत बिजली की व्यवस्था ही हुडा ने पूरी नहीं की है। न तो परिसर में ट्रांसफॉर्मर है ना बिजली।

गुजरती पानी की पाईपलाइन

अनियोजित विकास का परिचय देते हुए हुडा ने ऐसा विकास किया कि आज घरो के नीव के ऊपर से ही पानी की पाईप लाइन गुजर रही है जो भविष्य में बड़ी मुसीबतें बन सकता है।

सीवरेज का काम अधूरा

सीवरेज की पाईपलाइन का काम भी अनियोजित और अधूरा पड़ा है। हुडा ही जमीन पर झोपड़ियों के अवैध कब्जे के कारण उन्होंने अब तक सीवरेज के पाईप लाइन का काम भी पूरा नही किया है।

ये बोले प्लाट धारक शिकायतकर्ता

हुडा ने रोड पर ही कब्जा कर लिया है। गलत रूप से ब्याज वसूले। बिजली ,पानी तो दूर यहाँ बिजली के अभाव से छेड़खानी की घटनाएं भी बढ़ गयी है। हुडा ने सभी को बेवकूफ बनाया है।राजपाल नैन( प्लॉट धारक)

घोटालेबाज हुडा ने हमे फंसाया है। उन्होंने अधूरा विकास और झूठ बोलकर प्लॉट धारकों से करोड़ो की उगाही कर अपनी जेबें भरी है। हमारी मांग है कि हुडा हमारे सारे ब्याज लौटाए । सरकार बिल्डरों को समय पर प्रोजेक्ट पूरा न करने पर दंडात्मक कार्यवाही करती है, अगर सरकार की खुद की एजेंसी हुडा प्लॉट धारकों के साथ धोखाधड़ी करे तो उसके खिलाफ कार्यवाही क्यों करने की हिम्मत नही जुटाती।  हम हुड्डा के खिलाफ राष्ट्रीय उपभोक्ता अदालत जाएंगे।
ज्ञान गोयल ( प्लॉट धारक, शिकायतकर्ता)

जांच कर कठोर कार्यवाही होगी

हमे हमारे कार्यकारी अभियंता ने रिपोर्ट दी कि संबंधित प्लॉट में सड़क, पानी, बिजली, सीवर का काम पूरा हो चुका है। उसी रिपोर्ट के आधार पर हमने प्लॉट का आवंटन किया है। अगर ऐसा पाया गया कि झूटी रिपोर्ट दी गई तो जांच कर कठोर कार्यवाही करेंगे। हमे पानी के बुस्टर के अतिक्रमण की जानकारी नही।
सुमित कुमार (एस्टेट ऑफिसर, हुडा)

 

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