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Hisar Today |हिसार की शान फिरोज शाह का महल ‘गुजरी महल’

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जब-जब भी भारतीय इतिहास के पन्ने पलटे जाएंगे भारतीय संस्कृति की विरासत और धरोहर उनमें स्वर्णमयी मुद्रा के रूप में दिखाई देंगे। उन्हीं सांस्कृतिक धरोहरों में से एक धरोहर है हरियाणा के हिसार स्थित फिरोज शाह के महल कि जिसे गुजरी महल के नाम से भी जाना जाता है इस गुजरी महल के बनने के पीछे की जो कहानी इतिहास में सामने आती है कि शहजादा फिरोज मलिक उस समय फिरोज मलिक के नाम से शहजादे को जाना जाता था जब शिकार खेलने के लिए यहां जंगल में आते थे यहां गुर्जरों की एक कच्ची बस्ती हुआ करती थी और गुर्जरों की एक कन्या दूध देने के लिए यहां से गुजरती थी एक दिन शहजादे फिरोज की जब उस पर अपनी दृष्टि पड़ी तो उसको दिल दे बैठे और मोहित हो गए यहीं से सिलसिला शुरू होता है एक मोहब्बत की कहानी का यही मोहब्बत की कहानी एक दिन इतिहास के पन्नों में अमर हो करके एक विशेष धरोहर का निर्माण करेगी किसी ने सोचा भी नहीं होगा।

भले ही शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज महल के लिए 20 वर्षों के अथक प्रयास से सफेद संगमरमर के पत्थरों से बना कर ताजमहल का निर्माण किया है परंतु फिरोजशाह तुगलक ने अपने प्रेम की कहानी की नायिका के लिए यानी गुजरी के लिए काले और लाल पत्थरों से एक किला और महल बनवा कर के अपनी प्रेम कहानी को मूर्त रूप दिया है।

1354 ईश्वी में फिरोजशाह तुगलक ने इस महल का निर्माण शुरू करवाया और संपूर्ण होते-होते 1375 तक का वक्त आ गया। इतने काल के दौरान इस महल कि जो खूबसूरत नक्काशी बनाई गई और जो वास्तुशिल्पी कला का अभूतपूर्व कौशल प्रयोग में लाया गया वह आज भी देखने लायक है। इसमें खूबसूरत बालू मिट्टी के पत्थरों से बनाई गई लाट है जो राजा की कहानी को और विजय स्तभ को दर्शाती है। इस महल में एक मस्जिद का निर्माण किया गया जिसमें खूबसूरत 40 खंभे लगाके उसकी क्षमता और सौंदर्यता को बढ़ा रहे हैं। यहां महल में बने तहखाने आज भी संदेश देते हैं कि उनमें या तो हथियारों को रखा जाता था या इसे कारवास के रूप में प्रयोग में लाया जाता था।

इस लाल और काले पत्थरों से निर्मित यह महल आज भी अपने सौदर्य और खूबसूरती की कहानी कहती हैं वर्षों तक इस महल पर सरकार का कोई विशेष ध्यान ना होने के कारण इसकी खूबसूरती में अंतर आया परंतु पुरातत्व विभाग ने इस महल की खूबसूरती को बनाए रखने के लिए पुन: मरम्मत करनी आरंभ की और इसकी सफाई पर विशेष ध्यान दिया गया तो आज फिर यह पुन: अपने उस गौरवशाली अतीत को प्रदर्शित करता हुआ दिखाई दे रहा है। इसके साथ लगती है एक विशालकाय इमारत जिसे पीली कोठी के नाम से जाना जाता है। अंग्रेजी साम्राज्य से लेकर वर्षों तक उस में पशुधन फार्म के अधीक्षक का कार्यालय हुआ करता था। आज यह पीलीकोठी जीर्ण-शीर्ण अवस्था में खाली पड़ी है और पुरातत्व विभाग उसे अपने परिसर में शामिल करने के लिए विभागीय कार्यवाही कर रहा है।

जब हमने पुरातत्व विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों से बात की तो उन्होंने बताया कि इस पीली कोठी की पुन: वही खूबसूरती फिर से मरम्मत के द्वारा बनाई जाएगी यह एक बहुत ही ऐतिहासिक इमारत है जो इस महल की शोभा को चार चांद लगाएगी। हिसार की आबादी का 70त्न हिस्सा भी आज तक इस ऐतिहासिक स्थल का दौरा नहीं कर पाया होगा। बड़े अचरज की बात यह है एक बहुत ही शानदार इमारतों में सुमार यह इमारत इतिहास की गवाही दे रही है जिसकी गगनचुंबी चोटियां आज भी अपने ऐतिहासिक सौंदर्य को बरकरार रखने में सक्षम है।

समय के साथ इसकी साथ लगती जमीन पर माफिया द्वारा कब्जे भी किए गए अपने स्वार्थ हेतु इस ऐतिहासिक स्थल के सौंदर्य में बदनुमा दाग लगा कर के उन्होंने अपने दुकानें व्यवसायिक स्थल बनाने शुरु किए जब हमने बात तो विभाग के कर्मचारियों से उन्होंने बताया कि हमारा विभाग आपने स्थल की रक्षा करने के लिए उसके गौरव को वापिस पाने के लिए जो जमीन अवैध रूप से लोगों ने हड़प की हुई है उसको वापिस पाने का भरसक प्रयास किया जा रहा है।

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