हरियाणा

सरकार की कैबिनेट बैठक में अहम फैसले के मद्देनजर “ नगर निगम के महापौर चुनने का अधिकार आपको होगा”

अर्चना त्रिपाठी | Hisar Today

हरियाणा सरकार की कैबिनेट बैठक में अहम फैसले के मद्देनजर “प्रदेश में अब नगर निगम के महापौर चुनने का अधिकार आपको होगा”। पहले मेयर का चुनाव पार्षदों द्वारा किया जाता था।

ऐसे कई बार आरोप भी लगाए गए कि महापौर के चुनाव में पार्षदों में लगातार खरीद फरोक और भ्रष्टाचार निहित है। यही कारण है कि लम्बे समय से चली आ रही मांग पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर द्वारा मुहर लगा दी गई। इस निर्णय के बाद अब से अक्टूबर में 5 नगर निगम (यमुनानगर, पानीपत, करनाल, रोहतक, हिसार) के चुनाव में इस फैसले का असर देखने को मिलेगा। अब इन चुनावों में अब आम जनता वोट डालकर मेयर चुन सकेगी। राज्य निर्वाचन आयोग ने नगर निगम में मेयर का चुनाव प्रत्यक्ष रूप से कराने की सरकार से सिफारिश की थी। इस पर अब हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 में संशोधन को मंजूरी दी गई है। बता दे की प्रदेश में वर्तमान में 10 नगर निगम हैं। और इस प्रकार से महापौर के चुनाव इसके पूर्व मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश, छत्तीसगढ़ एवं झारखंड में होते रहे है।

चुनाव के ठीक महीने पूर्व लिए गए इस फैसले के शहर की अगली सरकार के लिए पार्टियां सीधे मैदान में उतरेंगी। मेयर का चुनाव अब 20 पार्षद नहीं बल्कि नगर निगम के करीब 2 लाख 26 हजार मतदाता करेंगे। इस निर्णय के बाद निगम के ये चुनाव राजनीतिक दलों के लिए अग्नि परीक्षा साबित होंगे। यह चुनाव 2019 चुनावों के पहले सभी राजकीय पार्टियों के स्थितियों का आकलन करेगी की जनता के बीच कौन सी पार्टी का दबदबा है। महापौर का यह चुनाव विधायक के चुनाव से भी बड़ा और अहम माना जा रहा है।

इन चुनावों से एक तो महापौर पर किसी पार्षद का दबाव नहीं रहेगा और सीधे चुनाव के बाद मेयर को कुर्सी जाने का भय भी नहीं होगा। जो मेयर चुनकर आएगा, उसकी शक्तियां भी बढ़ेगी। इसके अलावा अधिकारियों की मनमानी पर भी रोक लगेगी। एक वार्ड विशेष की बजाय पूरे शहर की जनता का मेयर से सीधा जुड़ाव होगा। मेयर पर भेदभाव के आरोप भी कम होंगे। हालाँकि इस फैसले को लेकर विभिन्न राजकीय गलियारों में चर्चाये होना शुरू हो गयी है। कुछ इसे भाजपा की साजिश बता रहे है तो कईयों का मानना है कि पार्षदों की खरीद फरोख रुकेगी और भ्रष्टाचार कम होगा।

राजनीतिक मायने

इस चुनाव के जरिए भाजपा को शहरों में अपनी मजबूती का पता चलेगा। शहरों में भाजपा को मजबूत माना जाता रहा है। अगर निगमों में भाजपा अपने मेयर बना लेगी तो लोकसभा चुनाव के लिए माहौल बनाने में उसे काफी मदद मिलेगी। साथ ही भाजपा को ग्राउंड रियालिटी का पता भी लगेगा। कांग्रेस तथा इनेलो के लिए भी अपनी शक्ति प्रदर्शन करने का यह मौका है। गौरतलब है कि सीधे चुनाव के चलते जो लोग बहुमत जुटाकर मेयर की कुर्सी हासिल करने की फिराक में थे उनकी राजनीति खत्म हो जाएगी। कुछ भावी मेयर ने तो पहले से ही भावी पार्षदों से मिलकर जोड़तोड़ शुरू कर दिया था। अब इस फैसले से पूरे समीकरण बदल गए हैं।

महापौर को जनहित में खर्च करने की मिले पॉवर, उपायुक्त का न हो हस्तक्षेप

अभय चौटाला (नेता प्रतिपक्ष , हरियाणा)
अभय चौटाला (नेता प्रतिपक्ष , हरियाणा)

अभय चौटाला ने महापौर के सिंधी चुनाव के फैसले पर सहमति जताई और कहा कि चुनाव सीधा हो हम इससे सहमत है लेकिन उसको ये अधिकार मिलने चाहिए कि जहां कॉरपोरेशन का मेयर है, उसका पैसा वो सीधा इस्तेमाल कर सके और डीसी का दखल नहीं होना चाहिए।

मेयर पर रहेगा जनता का दबाव

बजरंग दस गर्ग (व्यापार मंडल के प्रान्तीय अध्यक्ष)
बजरंग दस गर्ग (व्यापार मंडल के प्रान्तीय अध्यक्ष)

सीधे जनता द्वारा मेयर चुने जाने से पार्षदों की अदला बदली, लेनदेन सब ख़त्म हो जायेगा। महापौर पर सीधे आम आदमी का अधिकार होगा, सीधा संपर्क होगा और मेयर को जनता के प्रति जवाबदेह होते हुए उनका काम निष्पक्ष भावना से करना होगा।

ब्लैकमेलिंग नहीं होगी

डॉ कमल गुप्ता, विधायक (भाजपा)
डॉ कमल गुप्ता, विधायक (भाजपा)

मुख्यमंत्री ने बहुत अच्छा निर्णय लिया है। इस निर्णय के बाद अब महापौर बनने के लिए खरीद फरोक नहीं होगी। महापौर को जनता के कार्यो को करने का दबाव रहेगा और सबसे बड़ी बात पार्षदों की ब्लैकमेलिंग रुकेगी।

पहले अधिकारी को ट्रांसफर का डर लगा रहता था, अब ऐसा नहीं होगा

पंकज दीवान (पूर्व पार्षद, हिसार)
पंकज दीवान (पूर्व पार्षद, हिसार)

इस बात की ख़ुशी है की अब खरीद फरोख की राजनीती नहीं चलेगी। पहले जिस पार्टी का मेयर रहता था तो अधिकारियों को ट्रांसफर का भय दिखाकर अपने इलाकों में काम करवाया जाता था। मगर अब ऐसा नहीं होगा। अब जनता की जिम्मेदारी होगी कि वह काम करने वाले को अपना महापौर चुने।

भाजपा डरी हुई है, उनके इस फैसले में साजिश की बू आ रही है

भाजपा डरी हुई है, उनके इस फैसले में साजिश की बू आ रही है
तरुण जैन (हल्काध्यक्ष इनेलो, हिसार

निर्णय तो सराहनीय है मगर इस निर्णय में कही न कही भाजपा के साजिशो की बू आ रही है। चुनाव के एक महीने पहले यह निर्णय लेना इस बात को साबित करता है की भाजपा डरी हुई है कि उसके एक भी पार्षद चुनकर नहीं आएगा, इसलिए वह यह फैसला ले रही है। 4 सालो में भाजपा ने सिर्फ झूट का राग अलापा है। मुझे लगता है लोग उन्हें पहचान चुके है। इसलिए आने वाले समय में महापौर क्या, पार्षद, विधायक और सांसद का चुनाव भी भाजपा जीत कर नहीं आएगी।

महापौर के पसंदीदा पार्षदों के काम कर लगेगी रोक

राजेंद्र गौदारा (निर्दलीय प्रत्याशी व व्यवसायी)
राजेंद्र गौदारा (निर्दलीय प्रत्याशी व व्यवसायी)

इस निर्णय के आने के बाद अब आशा है कि हिसार के सभी विभाग का कार्य निष्पक्ष और सही प्रकार से चलेगा। इसके पूर्व मेयर अपने पसंदीदा पार्षदों का काम करवाया करता था। परन्तु अब ऐसी घटनाओ को रोक लगेगी और सामान्य विकास हो सकेगा।

गलत मंशा दर्शाता यह निर्णय

भीम महाजन (उपमहापौर)
भीम महाजन (उपमहापौर)

सरकार कुछ अच्छे के लिए यह फैसला ले रही है, मैं उनके फैसले का स्वागत करता हूं। मगर अक्टूबर के चुनाव के ठीक एक महीने पहले सरकार द्वारा लिया गया निर्णय सरकार की गलत मंशा को उजागर करता है। भाजपा ने यह सब सोची समझी रणनीति के तहत यह फैसला लिया है। क्यूंकि उन्हें डर है की उन्हें वोट नहीं मिलेंगे।

महापौर की तरह सीएम, पीएम का चुनाव भी जनता ही करे

गौतम सरदाना (अध्यक्ष, हिसार जनसंघर्ष समिति, हिसार)
गौतम सरदाना (अध्यक्ष, हिसार जनसंघर्ष समिति, हिसार)

मुख्यमंत्री ने बेहतरीन फैसला लिया है। इस फैसले से भ्रष्टाचार रुकेगा। पार्षदों के बिकने का सिस्टम ख़त्म होगा। मेरा मानना है कि महापौर की तरह मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री का चुनाव भी जनता द्वारा होना चाहिए।

अफरातफरी में लिया गया फैसला:

डी.एन.सैनी (वरिष्ठ उपमहापौर)
डी.एन.सैनी (वरिष्ठ उपमहापौर)

निर्णय सही है, मगर अफरातफरी में लिया गया फैसला है

 

 

 

 

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