सिरसाहरियाणा

राज्यपाल ने सुखदेव सिंह को किया राज्य पुरस्कार से सम्मानित

Hisar Today

जब कोई भी व्यक्ति किसी भी विभाग में ज्वाइन करता है तब उसके मन में यह विचार आता है कि वह उस विभाग में कोई अचीवमेंट प्राप्त करें। यह कहना है सिरसा जिले के गांव रंगड़ी खेड़ा में पंजाबी अध्यापक के तौर पर कार्यरत सुखदेव सिंह ढिल्लो का। इन्हें हाल ही में राज्यपाल हरियाणा सत्य देव नारायण द्वारा राज्य शिक्षक दिवस के अवसर पर राज्य पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। इस वर्ष जिला सिरसा से एकमात्र राज्य स्तर पर पुरस्कार विजेता सुखदेव सिंह ढिल्लो में पढ़ाई के साथ-साथ सेवा करने व अन्य सामाजिक गतिविधियों में भाग लेने का जज्बा था। उन्होंने रैडक्रॉस, स्काउट, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ आदि कार्यक्रम में भी सक्रिय भूमिका निभाई। जिला में नशे के खिलाफ लोगों को जागरुक करने में पुलिस अधीक्षक के साथ मिलकर बहुत बड़ी मुहीम चलाई। साथ ही पहल-द टर्निंग प्वाईंट फिल्म के माध्यम से भी समाजसेवा के अन्य कार्य भी किये गए। इससे पहले भी तीन बार महामहीम राज्यपाल से सम्मानित हो चुके हैं। रैडक्रॉस, भारत स्काउट का गवर्नर अवार्ड भी उन्होंने अपने नाम किया है। जिला प्रशासन द्वारा 6 बार उन्हें सम्मानित किया जा चुका है।

स्टेट अवार्डी सुखदेव सिंह ढिल्लो ने अन्य शिक्षकों व लोगों को संदेश देते हुए कहा कि मेरा कुणबा, भाईचारा देख रहे हैं कि जब मैं एक छोटा सा आदमी कुछ कर सकता हूं तो वे क्यों नहीं कर सकते। सब में जोश है हिम्मत है, वे भी कर सकते हैं। वे भी आगे बढ़ें और जी तोड़ मेहनत कर मुकाम हांसिल करें।

गौरतलब है कि शिक्षा विभाग में 9 अक्टूबर 1996 में राजकीय उच्च विद्यालय मिर्जापुर में बतौर पंजाबी अध्यापक  कार्यभार संभाला था। सात मई 1997 को हरिपुरा में स्थानांतर होने पर वहां रहते हुए उन्होंने बच्चों की शिक्षा के साथ-साथ अन्य गतिविधियां करने की भी ठानी तथा इसके लिए उन्होंने स्काउट ग्रुप भी ज्वाइन किया। वर्ष 1999 में उनके द्वारा प्रशिक्षित किया हुआ पहला बच्चा राष्ट्रपति अवार्ड से नवाजा गया, इसमें 32 प्रकार के कौशल विकास के टेस्ट पास किए गए जिसमें दविंदर सिंह गांव हरीपुरा स्काउट राष्ट्रपति अवार्डी बना।
उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान यह जाना की जो विद्यार्थी विभिन्न गतिविधियों के तहत बाहर जाते हैं उनका आई.क्यू. अन्य बच्चों के मुकाबले अधिक होता है। इसके लिए उन्होंने ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को बाहर अनेक प्रकार के शिविरों में ले जाना शुरु किया। इसके फलस्वरुप उनके द्वारा प्रशिक्षित अनेक बच्चे राज्यपाल अवार्ड से सम्मानित हुए। इसके उपरांत राजकीय सीनियर सैकेंडरी स्कूल दड़बी में स्थानांतरण होने पर उन्होंने वहां स्काउट ग्रुप बनाया और बच्चों के साथ कड़ी मेहनत की। इसके फलस्वरुप उनके द्वारा प्रशिक्षित अनेक बच्चे राज्यपाल व राष्ट्रपति  पुरस्कार के सम्मानित हुए। यहां पर उन्होंने स्काउट में स्वयं की योग्यता भी बढाई और ये राज्य स्तर के ट्रेनर बनें।

इसके बाद राजकीय हाई स्कूल कीर्तिनगर में उन्हें बच्चों को शिक्षित करने के साथ-साथ समाजसेवा का भी अवसर मिला। उन्होंने यहां पंजाबी सत्कार सभा के साथ मिलकर पंजाबी भाषा सभ्याचार पर भी काफी कार्य किया। उन्होंने योग शिक्षक की भी उपाधि प्राप्त की और निरोग जीवन कैसे जिया जाए इस पर भी कार्य किया। इसके फल स्वरुप वे स्कूल कॉलेज प्रभारी भी रहे और लगभग 50 शिविर ग्रामीण क्षेंत्रों, विद्यालयों व महाविद्यालयों में लगा कर लोगों को अच्छे खान-पान व सेहतमंद बने रहने के लिए प्रेरित किया।

इन संस्थाओ को किया गया सम्मानित

लॉयंस क्लब रानियां, एमओएफपीआई, सर्वधर्म एकता सोसायटी, महात्मा ज्योति बा फूले ट्रस्ट भिवानी द्वारा, दो बार डा. सर्वपल्ली राधा कृष्णन शिक्षक अवार्ड, पंजाबी सत्कार सभा सिरसा द्वारा दो बार सम्मानित हुए, पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला द्वारा 4 बार, यूवा क्लब लक्ष्य 2020 द्वारा दो बार, श्री सालासर पैदल यात्रा संघ मंडी डबवाली व द इंटरनेशन एसोसिएशन लॉयंस क्लब मंडी डबवाली द्वारा भी सम्मानित हो चुके हैं। उन्होंने एनसीसी के शिविरों में भाग लेकर बी-सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया।उन्हें दो बार स्काउट का गवर्नर अवार्ड भी मिला , जिसमें एक बार महामहीम राज्यपाल जगन्नाथ पहाडिय़ा द्वारा तथा एक बार महामहीम राज्यपाल कप्तान सिंह सौलंकी द्वारा सम्मानित हो चुके हैं। इसके अतिरिक्त रैडक्रॉस में उल्लेखनीय कार्य करने पर महामहीम राज्यपाल कप्तान सिंह सौलंकी द्वारा गवर्नर अवार्ड से सम्मानित किया गया हैं।

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