हरियाणा

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के नाम पर किसानो से धोखाधड़ी, बैंक और बीमा कंपनी कि आपसी मिलीभगत से किसानो को नहीं मिल पाया बीमा

Archana Tripathi,Hisar Today

– 6000 प्रति एकड़ बीमा प्रदान करने के आदेश के बाद अचानक सभी किसानों के खातों में बीमा कंपनी ने लौटाए 11 महीनें के प्रीमियम

– न्याय के लिए बैंक और बीमा कंपनी में चक्कर लगाने को किसान मजबूर

किसानों की ख़राब फसलों की बीमा रकम के लिए कोई किसान पानी कि टंकी में चढ़कर जान देने में मजबूर हैं, तो कोई अचानक बीमा कंपनी द्वारा 11 महीनों से जमा पैसा वापस करने को लेकर आत्महत्या करने को मजबूर हैं। दरहसल प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत हरियाणा के किसानो के साथ धोखाधड़ी करने का मामला सामने आया हैं। प्रधामंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा कंपनी , बैंको के साथ मिलकर किस प्रकार धोखाधड़ी करती है , इसका जीता जागता सबूत हरियाणा के हिसार , सिरसा जैसे इलाको में देखने को मिल रहा हैं।  दरहसल पिछले साल 29 जून 2017 से जुलाई तक सिरसा SBI मय्यड़ ब्रांच ने तकरीबन 293 किसानों के बैंक अकाउंट से 550 रूपए हर महीनें कांटा जाता था। परन्तु पिछले साल कपास खेती बर्बाद होने के बाद जब केंद्र सरकार ने कपास खेती करने वाले किसानों को उनके खेती के नुक्सान के बीमा राशि देने की घोषणा कि तो अचानक बड़े ही नाटकीय ढंग से बैंक और बीमा कंपनी ने किसानो के 11 महीनें का प्रीमियम उन्हें वापस कर अपना पलड़ा झाड़ दिया। बैंक और बीमा कंपनियों की इन शरारत के कारण आज तकरीबन 300 किसानो का भविष्य अधर पर लटका हुआ हैं। किसानों का कहना हैं कि सरकार ने जब ख़राब फसलों पर 6000 रूपए प्रति एकड़ बीमा की राशि देने कि घोषणा कि तब सभी किसानों के नाम कि सूची बैंक को सुपुर्द कि गई,अब अचानक सभी किसानों के खाते खातों में बीमा कंपनी ने 11 महीनों कि जमा राशि उनके अकाउंट में डाल कर  अपना पलड़ा झाड़ने कि कोशिश कि। बैंको बीमा कंपनी की यह जालसाजी देश के कई राज्यों में देखी गई है इस सूची में अब हरियाणा के पीड़ित किसानों का नाम भी सामने आया हैं ।

गौरतलब बात है कि बैंको के सूत्रों के अनुसार जिन 293 किसानों का फसल बीमा योजना के तहत नाम दर्ज था।  उनकी तमाम जानकारी बैंक को सरकारी साईट पर डालनी अनिवार्य रहती हैं, परन्तु SBI मय्यड़ बैंक ने ऐसा नहीं किया। जब हिसार टुडे कि टीम ने बीमा कंपनी बजाज अलायंस इन्शुरन्स कंपनी से बात कि तो यहां के अधिकारी भी टालमटोल की भूमिका अख्तियार करते नजर आए।  बजाज अलायंस इन्शुरन्स कंपनी ,जूनियर अफसर(खेती विभाग)  रोबिन तो वह सीधा यह कहने लगा कि ‘सारा मामला महाराष्ट्र के पुणे इलाके में कंपनी के पास मिलेगा, हमें कुछ नहीं पता’. बीमा कंपनी का यह बर्ताव यह बताने के लिए काफी हैं कि उनके लिए किसान और पीड़ित किसानों कि भरपाई को लेकर कोई संवेदना नहीं। इन अधिकारियों को कोई फर्क नहीं पड़ता।  हालाँकि बीमा कंपनी के एक अन्य अधिकारी सोनू कश्यप ने इस बात कि जानकारी जरूर दी कि बैंक वाले लापरवाही करते हैं, जानकारी सरकारी पोर्टल पर नहीं डालते इसीलिए 5 -6 राज्यों में ऐसी समस्या जरूर आई हैं , जहां पैसे प्रीमियम के पैसे वापस किए गए हैं।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानो के साथ धोखाधड़ी : दीपक (भगाणा गांव )

किसानों ने सरकार की फसल बीमा योजना के तहत 11 महीनों तक बीमा भरवाए लेकिन SBI मय्यड़ बैंक और बजाज अलायंस बीमा कंपनी ने किसानों के साथ धोखाधड़ी करते हुए। हमें फसल बीमा योजना के तहत हमारे पैसे देने के बजाय।  हमें हमारा ही प्रीमियम वापस कर ,बीमा के पैसे नहीं दिए। जब हम इस मुद्दे को लेकर बैंक के पास गए तो हमारी वहां पर भी कोई सुनवाई नहीं कि जा रही हैं। उल्टा बैंक अपनी जिम्मेदारी बीमा कंपनी पर डाल रहीं हैं ,जब हम बीमा कंपनी के पास पहुंचे, तो वहां के अधिकारी भी हमसे मिलने के लिए राजी नहीं हुए। आज जिस प्रकार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानो के साथ धोखाधड़ी कि जा रही हैं उसके लिए बैंक जिम्मेदार हैं।

धोखाधड़ी करने वाले बैंको और बीमा कंपनी पर हो कठोर कार्यवाई :मनदीप (पीड़ित किसान)

हम इस उम्मीद में थे कि सरकार द्वारा कपास कि खेती में होने वाले नुक्सान कि भरपाई बीमा कंपनी देगी, मगर बैंक और बीमा कंपनी ने हमारे साथ धोखाधड़ी कि और हमें न्याय के लिए दर दर भटकना पड़ रहा हैं। हम बैंक जाते हैं तो वो हमें बीमा कंपनी का नंबर दे देती हैं, जबकि बीमा कंपनी में न कोई फ़ोन उठता हैं और न ही हमारे पास बैंक का कोई पता हैं। हमारी तो मांग हैं कि किसानो के साथ धोखाधड़ी करने वाले बैंको और बीमा कंपनी के खिलाफ कठोर से कठोर कार्यवाई की जाए।

बिना किसी कारण बीमा कंपनी ने वापस किया प्रीमियम :मोहनलाल ,डी.एम, SBI मय्यड़ 

हमारे बैंको में फसल बीमा योजना के तहत 293 अकाउंट हैं। 29 जून को किसानो का सारा प्रीमियम बिना किसी जानकारी के बैंक ने वापस किसानो के खातों में डाल दिए। बिना किसी कारण के प्रीमियम वापस आने पर हमने उनसे संपर्क साधने कि कोशिश कि मगर कोई फायदा नहीं हुआ।

अगर बीमा कंपनी को जानकारी नहीं मिली  तो हमसे पूछती : रामनिवास , पूर्व मैनेजर, SBI मय्यड़

बीमा कंपनी बोलती हैं हमें किसानों कि जानकारी नहीं मिली, इसलिए हमने प्रीमियम का पैसा वापस कर दिया। मगर असलियत यह हैं कि हमने हर किसान की पूरी जानकारी उन्हें भेजी थी और आधारकार्ड समेत सारे दस्तावेजों के साथ पोर्टल पर जानकारी डाली थी , अगर बीमा कंपनी को जानकारी नहीं मिली तो उन्हें हमसे पूछना चाहिए था। उन्होंने हमसे फ़ॉलोअप नहीं किया।

किसान फसल बीमा योजना के नाम पर सिर्फ ठग मारी का शिकार , उठाएंगे आवाज, वेद नारंग : विधायक , इनेलो    

भाजपा की सरकार किसान विरोधी सरकार हैं। उन्होंने किसानों को लाभ देने के बजाय सिर्फ झूठे वादे किए हैं। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना केवल ‘प्राइवेट कंपनी’ को मुनाफा पहुंचाने के लिए चलाई गई हैं। किसान फसल बिमा योजना के नाम पर सिर्फ ठग मारी का शिकार हुए हैं।  सरकार को ऐसी पॉलिसी बनानी चाहिए कि सरकार खुद बीमा कंपनी के पैसे किसान को दे। मेरी तो मांग है कि सरकार इन प्राइवेट बीमा कंपनी और दोषी बैंक अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाई करे, लेकिन सरकार बड़े घरानो को फायदा पहुंचाने के लिए इससे बचती नजर आ रही हैं। पिछले विधानसभा में हमने यह मुद्दा उठाया था और आगे भी प्रशसनीय स्तर एवं विधानसभा पर हम यह मुद्दा दुबारा उठाने का काम करेंगे।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Close