हरियाणा

दिसंबर तक गड्‌ढा मुक्त होंगी सड़कें : बजाज

हरपथ एप के माध्यम से आने वाली शिकायतों के समाधान के लिए डिजिटल हरियाणा वर्कशॉप में दिया अधिकारियों को प्रशिक्षण

Today News| हिसार

मुख्यमंत्री कार्यालय में स्पेशल लॉ ऑफिसर व हरपथ योजना के स्टेट नोडल ऑफिसर बुद्धप्रिय बजाज ने कहा कि हरपथ एप के माध्यम से प्रदेश भर की सडक़ों को दिसंबर तक गड्ढा मुक्त किया जाएगा ताकि नागरिकों को अच्छी सडक़ें मिलें और दुर्घटनाओं की संख्या में कमी आए। बुद्धप्रिय बजाज हरपथ एप के सफल क्रियान्वयन तथा आमजन को इसके माध्यम से बेहतर सेवाएं देने के लिए इससे संबंधित विभागों की डिजिटल प्रशिक्षण वर्कशॉप को संबोधित कर रहे थे। वर्कशॉप में सीएम सैल, चंडीगढ़ से आए हार्दिक राठौड़ ने भी अधिकारियों को हरपथ एप के संचालन व इस पर आने वाली नागरिकों की शिकायतों के समाधान के संबंध में विस्तार से प्रशिक्षण दिया।

उन्होंने बताया कि हरपथ एप पर आने वाली शिकायतों के समाधान के लिए उनकी श्रेणियों के अनुसार समय सीमा निर्धारित की गई है तय से अधिक समय में समाधान करने पर संबंधित विभाग व जिला की रैंकिंग प्रभावित होगी। तय समय में 90 प्रतिशत से अधिक शिकायतों का समाधान करने वाले जिलों व विभागों को अधिकतम 4 स्टार दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि यह योजना मुख्यमंत्री मनोहर लाल की महत्वपूर्ण योजनाओं में से एक है जिसके माध्यम से उन्होंने प्रदेशवासियों को गड्ढा मुक्त सडक़ें देने का सपना देखा है।

हिसार ने किया था हरपथ को इजाद

बुद्धप्रिय बजाज ने कहा कि हरपथ एप 2015 में हिसार प्रशासन द्वारा ही इजाद किया गया था और इसका पायलेट प्रोजेक्ट भी यहीं से शुरू हुआ था। इसी एप को विकसित करके आज प्रदेश भर में लागू किया गया है। इस एप के प्रभावशाली संचालन के लिए हरियाणा सरकार ने इसरो के साथ करार किया है और लोकेशन के लिए इसे गूगल मैप नहीं बल्कि भुवन मैप जीओ पोर्टल पर आधारित किया गया है। हरपथ एप को सभी एंड्रोयड मोबाइल पर इंस्टॉल किया जा सकता है। अब तक इस एप को 22 हजार लोगों द्वारा अपने मोबाइल पर डाउनलोड किया गया है और इस पर अब तक 44 हजार शिकायतें आई हैं।

ऐसे काम करेगा हरपथ एप

उन्होंने बताया कि इस एप को प्ले स्टोर से अपने मोबाइल में इंस्टॉल करके कोई भी व्यक्ति एप के माध्यम से टूटी व गड्डे वाली सडक़ का फोटो लेकर उसे अपलोड कर सकता है। उस स्थान की जीपीएस लोकेशन के अनुसार यह फोटो व इससे संबंधित शिकायत उस विभाग के पास जाएगी जिसके पास इस सडक़ का स्वामित्व होगा। सडक़ मरम्मत योग्य है या दोबारा बनाने के लिए टेंडर आधारित कार्य होना है, इसके आधार पर इस शिकायत के समाधान का समय निर्धारित होगा। मरम्मत करवाकर विभाग इसका फोटो पोर्टल पर अपलोड करेगा जिसके बाद शिकायत का समाधान माना जाएगा। यदि विभाग किसी शिकायत को रिजेक्ट करता है तो उसे उसका कारण बताना होगा।

श्री बजाज ने अधिकारियों से कहा कि टूटी सडक़ की मरम्मत तो उन्हें करनी ही है। यदि वे शिकायत मिलते ही अपना काम कर देंगे तो यह न केवल उनके लिए सुविधाजनक होगा बल्कि उनके विभाग व जिला की रैंकिंग को भी सुधारेगा। यदि वे इस काम में विलंब करेंगे तो सडक़ की क्षति बढ़ती जाएगी जिसके समाधान में उनका समय और सरकार का पैसा, दोनों खराब होंगे। इसलिए सभी संबंधित विभाग हरपथ पर आने वाली प्रत्येक शिकायत को गंभीरता से लेते हुए तय समय से पहले इनका समाधान करने को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि ठेकेदारों के माध्यम से बनने वाली सडक़ें यदि डिफेक्ट लाइबिलिटी पीरियड में टूट जाती हैं तो उन्हें ठेकेदार से ठीक करवाना भी संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि अन्य विभागों से समन्वय के लिए सभी विभाग अपने यहां एक-एक नोडल अधिकारी भी नियुक्त करें।

विभागों को दिए आपसी समन्वय से कार्य करने के निर्देश

सीटीएम शालिनी चेतल ने प्रदेश सरकार द्वारा हरपथ को लॉन्च करने का मकसद बताते हुए कहा कि यह नागरिक सेवा आधारित योजना है जिसके माध्यम से सभी सडक़ों को बाधारहित वाहन चालन के योग्य हालत में रखना है। उन्होंने जिला के सभी विभागों को आपसी समन्वय से कार्य करने के निर्देश देते हुए कहा कि हमें 31 अक्तूबर तक चार स्टार लेते हुए 25 दिसंबर से पहले जिला की प्रत्येक सडक़ को गड्डा मुक्त करने के लक्ष्य को पूरा करना है।

हार्दिक राठौड़ ने दी एप के संचालन की जानकारी

सीएम सैल से आए हार्दिक राठौड़ ने एप के माध्यम से आने वाली शिकायतों के पश्चात विभाग द्वारा की जाने वाली गतिविधियों, एप के सभी कॉम्पोनेंट व की-प्रफोर्मिंग इंडीकेटर के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसी विभाग के पास आने वाली कुल शिकायतों में से वह कारण बताते हुए अधिकतम 10 प्रतिशत तक शिकायतें रिजेक्ट कर सकता है। शेष 90 प्रतिशत शिकायतों का समाधान विभाग को अगले 10 दिन में करना अनिवार्य है। विभाग द्वारा निपटाई या रिजेक्ट गई 10 प्रतिशत शिकायतों को सरकार या शिकायतकर्ता द्वारा रि-ओपन भी किया जा सकता है। इस दौरान हरपथ एप पर आई जिला की विभिन्न शिकायतों और विभागों द्वारा उनके समाधान के तरीकों की विस्तार से समीक्षा की गई।

 

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