सिरसाहरियाणा

Hisar Today|खेत-खेल और सियासत की भूमि है सिरसा

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सिरसा लगभग 43 वर्ष का हो गयाहै। सिरसा ने जहां, खेत, खेल और सियासत में नई ऊंचाइयों को छुआ,वहीं पिछले 4 दशक में सिरसाउद्योग, सड़क, परिवहन के लिहाजसे अपेक्षित तरक्की भी कर पाया।भौगोलिक लिहाज से 7 खंडों और4277 वर्ग किलोमीटर में फैले और सियासी नजरिए से 5 विधानसभा हलकों वाले सिरसा को जिला बने हुए 43 वर्ष हो गए है। 1 सितंबर1975 को सिरसा जिले के रूप में अस्तित्व में आया था।सिरसा के लोगों ने अनेक क्षेत्रों में पिछले कुछ अरसे में नए आयाम रचे हैं। गेहूं उत्पादन में सिरसा देश में दूसरे पायदान पर जबकि प्रदेश में पहले स्थान पर है।
प्रदेश की 40 फीसदी कॉटन का उत्पादन यहां होता है। उत्पादन में भी यह जिला प्रदेश में पहले स्थान पर है। प्रति व्यक्ति आय में यह जिला कभी देश में अव्वल रहा है। यहां की अनाज मंडी भारत की सबसे बड़ी है। सामाजिक सरोकारों का निर्वहन यहां के लोग शिद्दत के संग कर रहे हैं। रक्तदान में यह जिला विश्व रिकॉर्डधारी है। देश को यह जिला नेत्रदान का भी पाठ पढ़ा रहा है। यह वह जिला है, जिस ने देश को उप-प्रधानमंत्री, प्रदेश को एक सी एम और अनेक मंत्री दि ए हैं, परंतु तस्वीर के उजले पहलू संग धुंधला पहलू भी है।
प्रदेश के एक कोने पर बसा सिरसा उद्योगों के लिहाज से लंगड़ी चाल लिए हुए है। अति क्रमण, धूल-मि ट्टी, यातायात जाम जैसी समस्याओं से लोग आजिज हैं। कभी सरस्वती नगर, कभी राजा सारस की नगरी, कभी बाबा सरसाईनाथ की नगरी तो अब सिरसा। कहते हैं कि पहुंचे हुए संत बाबा सरसाईनाथ के नाम पर सिरसा का नाम पड़ा ।
आध्यात्मिक नगरी
वैसे सिरसा को आध्यात्मिक नगरी भी कहा जाता है। यहां पर चारों दिशाओं में डेरे हैं। बेगू रोड पर डेरा सच्चा सौदा है जो 1948 में स्थापित हुआ। जीवनगर नामधारी समुदाय का पवित्र स्थल है तो हिसार रोड पर सिकंदरपुर में डेरा राधा स्वामी है। शहर में डेरा बाबा सरसाईनाथ और रानियां गेट के पास
बाबा बिहारी की समाधि है जबकि रानियां रोड पर श्री तारकेश्वर धाम है। हिसार रोड पर गांव संघर साधा में डेरा बाबा भूम्मण शाह है। इसके अलावा नगर में अनेक मंदिर,ऐतिहासिक महत्व के गुरुघर और सुभाष चौक पर जामा मस्जिद है जबकि पुराने बस स्टैंड के पास करीब 150 वर्ष पुराना सैंट मैथोडिस्ट चर्च है।

खेल से लेकर फिल्मी दुनिया में चमकाया नाम

भारतीय हॉकी टीम के कप्तान सरदार सिंह इसी जिला के छोटे से गांव संतनगर के रहने वाले हैं। मिट्टी वाजां मारदी, मेरा पिंड, मुंडे यूके दे जैसी फिल्मों का निर्देशन कर पंजाबी सिनेमा को नया जीवन देने वाले मनमोहन सिंह भी सिरसा के रहने
वाले हैं। भारतीय हॉकी टीम के कप्तान सरदार सिंह सिरसा जिला के गांव संतनगर के रहने वाले हैं।

राजनेताओं की नगरी

सियासी रंग भी सिरसा में खूब हैं। प्रदेश में या तो जाटलैंड रोहतक को राजनीति का गढ़ कहा जाता है या फि र प्रदेश के
अंतिम छोर पर बसे सिरसा को। पूर्व उप-प्रधानमंत्री देवीलाल सिरसा के गांव चौटाला में जन्मे ।उनके बेटे ओमप्रकाश चौटाला भी राज्य के मुख्यमंत्री रहे।
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