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सोशल मीडिया से चोरी बचाने से सुगम उपाय

अनुप शुक्ल | सोशल मीडिया

पता चला कि सुशोभित शेखावत की कुछ पोस्टस किन्ही नामचीन साहित्यकार ने चोरी करके अपनी कहानी में इस्तेमाल कर ली। सोशल मीडिया किसी का लिखा इस्तेमाल करना आसान है। पकड़ा जाना भी उतना ही आसान है। जैसा इस मामले में हुआ। लेकिन अब अगर आप लिखते हैं और चाहते हैं कि आपका लिखा चोरी न किया जा सके तो कुछ उपाय मैंने सुझाये थे। ये उपाय ब्लॉग से चोरी बचाने के लिये थे। पर दीगर माध्यमों के लिये भी इस्तेमाल किये जा सकते हैं। वैसे तो किसी भी लेखक यह लेखक के लिये बड़ी खुशी की बात है उसका लिखा लोग पढ़ें-चाहे चुरा-चुरा के ही सही। नोबल पुरस्कार विजेता लेखक गैबरीला मार्खेज अपने जीवन के सबसे आल्हादित करने वाले अनुभवों में एक उस अनुभव को मानते हैं जब उन्होंने देखा कि उनकी किताब ‘हन्ड्रेड यीयर्स इन सालूट्यूड’ को लड़के दस भागों में बांट-बांट करके पढ़ रहे थे। लेकिन हमारे तमाम साथी जो चाहते हैं कि उनका ब्लाग बिना उनकी अनुमति के कोई चुरा न सके तो उसके कुछ तरीके हमने खोजे हैं। अगर आप अपने ब्लाग को इस लायक समझते हैं उसकी चोरी की जा सकती है तो इन तरीकों को आजमाने के बारे में विचार करें।

ये तरीके हालांकि हमने खोजे हैं लेकिन इनको अगर आप अपना बनाकर भी अपनाते/प्रचार करते हैं तो हमें कोई एतराज नहीं होगा। दुनिया के तमाम लोकगीत उनके रचयिताऒं के नाम के बगैर गाये जा रहे हैं। दूसरा उपाय जगत प्रसिद्ध चिर सनातन आलस्य और शर्म के सिद्धान्त पर आधारित है। आपका सुनने में अटपटा लग रहा होगा कि आलस्य और शर्म का कैसा मिलन! क्योंकि आलसी तो बेशर्म होता है। लेकिन हम आपको बतायें यह सच है। ये कुछ सुगम उपाय हैं जिनमें से आप अपने लिये कोई एक उपाय छांटकर अमल में ला सकते हैं।। जब गांगुली और चैपेल मिल सकते हैं, लोकतांत्रिक अमेरिका राजतांत्रिक अरब देशों से जुड़े रह सकते हैं तो आलस्य और शर्म ने कौन आपकी भैंस खोली है जो आप इनको मिलने नहीं देना चाहते। आप से भले तो वे जाट हैं जो ऊंची-नीची जातियों वाले प्रेमियों को भले ही काट के मार दें लेकिन उनको अलग नहीं करते। आप इस बात को अच्छी तरह समझने के लिये पहले दोनों सिद्धान्त अच्छी तरह समझ लें तब हो सकता है आप हमारी बात से हमसे ज्यादा सहमत हो सकें।

 

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