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सीए कोर्स में आईआईटी और आईआईएम की तुलना में एंट्री आसान

Hisar Today

सीए स्टूडेंट्स को अपनी साइकोलॉजी को बदलने की जरूरत है। आपको सेल्फ क्रिएटेड मोटिवेशन ही हमेशा आगे लेकर जाएगा। सीए एंट्रेंस एग्जाम को आईआईटी और आईआईएम के मुकाबले बहुत आसान बनाया गया है। तभी तो इसमें एंट्री आसान है लेकिन फाइनल में पास होना मुश्किल है। कुछ ऐसा ही चेन्नई से आए सीए वी.मुरली ने स्टूडेंट्स से कहा। वे बिड़ला ऑडिटोरियम में आयोजित दो दिवसीय सेमिनार में स्टूडेंट्स से रूबरू हुए।

उन्होंने कहा, वे अपने रोल मॉडल बनाएं। आईआईटी और आईआईएम के एंट्री एग्जाम टफ होने से एडमिशन आसान नहीं होते, लेकिन इन कोर्स में सेमेस्टर पास करना आसान है। लेकिन सीए कोर्स में एंट्री जितनी आसान है उतना मुश्किल इसकी डिग्री लेना है। इस कोर्स में कॅरिअर बनाने के लिए हमने एंट्री कोर्स को मॉडरेट लेवल पर डिजाइन किया है। प्रैक्टिकल नॉलेज इतनी मिल जाती है कि अगर स्टूडेंट फेल भी होगा तो फाइनेंशियल कुछ भी सेटअप कर सकते हैं। वहीं अविनाश गुप्ता ने कैशलेस इकोनॉमी को देश के लिए बेहतर बताते हुए स्टूडेंट्स को ब्लैक मनी, स्पेशल टैक्सेशन और न्यू आईटीआर की जानकारी दी। सेमिनार में इंदौर के असीम त्रिवेदी, दिल्ली के अविनाश गुप्ता और चेन्नई के वी. मुरली ने स्पीकर के रूप में विचार रखे।

सीए खुद को अपडेट रखें

स्पीकर असीम त्रिवेदी ने कहा कि वर्तमान चुनौतियों के मद्देनजर अब जरूरत है कि सीए अपनी बिजनेस नॉलेज को भी बढ़ावा दें। साथ ही कंपनी के इंटर्नल कंट्रोल पर पैनी नजर बना कर रखें। कोई भी डाउट हो तो तुरंत आगे बढ़कर चैक करें। प्रबंधन को इसकी जानकारी दें। सबसे जरूरी आपका ऑडिट प्रोसिजर मजबूत होना चाहिए। बैंकों में हुए फ्रॉड पर सीए की जिम्मेदारी पर भी सवाल उठाए गए, लेकिन यहां ऑडिटर की कोई गलती नहीं दिखाई दी।

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