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हुड्डा -चौटाला के प्रेम से जलते क्यों हो ?

हिसार टुडे 

उनका बेटा मेरा बेटा और मेरा बेटा उनका बेटा यह बात आज वो दो राजनीतिक घराने के बिच चल रहे है , जिसका आने वाले विधानसभा चुनाव के पहले महागठबंधन के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। मगर भाजपा को लगता है की यह बात परवान चढ़े उससे पहले ही उन्हें तो जलन होने लगी है। दरहसल यह वक्तत्व भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला के उस वक्तत्व पर दिए जहां उन्होंने कहा था की दीपेंद्र जैसे अच्छे लड़के को बहार के आदमी ने हरा दिया यह ठीक नहीं हुआ। यही से एक नए राजनीतिक समीकरणों की तरफ देखा जा रहा है।

मगर ओमप्रकश चौटाला ने यह वक्तत्व क्या दिए भाजपा प्रहार के मोड़ में नजर आ रही है। अब बारी भाजपा की है उनपर गरजने की। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने सबसे पहले अपनी आवाज़ बुलंद करते हुए इन करीबी बढ़ते रिश्तो पर प्रहार करना शुरू कर दिया है। हाल में लोकसभा चुनावों में पार्टी की अप्रत्याशित जीत से लबरेज भारतीय जनता पार्टी ने अब विधानसभा चुनाव की जंग फतह करने की पृष्ठभूमि तैयार कर ली है। मगर इन तैयारियों में विपक्ष की योजना में पानी फेरना भी शामिल है। यही कारण है कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने हुड्डा और चौटाला परिवार के एक होने की चल रही चर्चाओं के जवाब में कहा कि मैं चाहता हूं कि दोनों परिवार एक हो जाएं।

कमाल है सुन कर आपको यकीं नहीं होगा न। खैर आगे का वक्तत्व सुने बिना तो यकीं होने से रहा। वह कहते है कि भाजपा में ही सच्चा लोकतंत्र है। यहां नरेंद्र मोदी जैसे कार्यकर्ता प्रधानमंत्री बन जाते हैं और अमित शाह जैसे कार्यकर्ता राष्ट्रीय अध्यक्ष। शेष दलों में वंशवाद चलता है। इनेलो हो अथवा उससे अलग हुआ दल, लूट-खसोट ही इनका लक्ष्य है। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस को भी कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि ये लोग मंच पर ही भिड़ जाते हैं। एक-दूसरे के खिलाफ एफआइआर भी दर्ज करवाते हैं। हुड्डा और चौटाला परिवार के एक होने की चल रही चर्चाओं के जवाब में मुख्यमंत्री ने इतना ही कहा कि मैं चाहता हूं कि दोनों परिवार एक हो जाएं।

आखिर क्यों वह चाहते है की यह गठबंधन हो जाए ? दरहसल सीएम साहब का हर वक्तत्व कुछ संकेत देता है और अब यही संकेत निकलकर सामने आ रहा है कि इनेलो कांग्रेस की तारीफ करने में व्यस्त है और इनेलो के विधायक पार्टी छोड़ने में। मुख्यमंत्री ने ऐसे सवाल पैदा कर दिए है कि अगर वो अपने विधायकों को ही संभल पाने में विपल रहे है तो आगे उनके पार्टी का क्या होगा।

भाजपा के विधायक अरविन्द शर्मा ने भी मुख्यमंत्री मनोहर लाल खटटर की तरह इनेलो और हुड्डा के बिच चल रहे रिश्तो पर अपनी चुटकी ली है है। भाजपा के यह नव-निर्वाचित सांसद अरविंद शर्मा जो हाल में कांग्रेस से टिकट की लालच में भाजपा में शामिल हुए . उनकी तो इस चुनाव में लॉटरी लग गयी। यही कारण है कि अपने बुलुंद हौसलों के साथ वो विधानसभा चुनाव में विपक्ष के गठबंधन की संभावनाओं को ही दरकिनार करते दिखाई दे रहे है।

वो कहते है कि इस चुनाव में गठबंधन कोने में धूल फांकते नजर आएंगे, अगर लोगों को दिखाई देगा तो वह सिर्फ कमल का फूल होगा। शर्माजी बड़े कॉंफिडेंट है भाई। वैसे क्या करे हर भाजपा वाला आजकल कॉंफिडेंट है। ब्लॉक अध्यक्ष भी कहता है भाई मुझे कोई नहीं हरा सकता। वैसे सांसद शर्मा ने कहा था कि हुड्डा परिवार और इनेलो सुप्रीमो का उमड़ रहा प्रेम विधानसभा चुनाव में विपक्ष का गठबंधन होने की तरफ इशारा करता है। लेकिन इस प्रकार के गठबंधन यूपी में भी हुए थे। वहां की जनता ने जैसे गठबंधन को धूल चटाई वैसे ही हरियाणा में भी होगा। हरियाणा में ऐसा हो न हो यह बाद की बात है मगर है भाजपा वाले जल जल के भून गए है।

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