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कुर्बानी देगा कौन!

संपादकीय : महेश मेहता

हिसार टुडे

“आप मेरा साथ दें तो बड़ी कुर्बानी देने को हूं तैयार” यह वक्तव पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के हैं। जो आज हरियाणा की राजनीति में चर्चा का विषय बने हुए हैं। सवाल यह उठखडा होता है कि आखिरकार हुड्डा के लिए कुर्बानी देगा कौन? अशोक तंवर? पार्टी हाईकमान? खैर हुड्डा की बात से आज लोग सोच रहे हैं कि क्या पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा कहीं कांग्रेस पार्टी छोड़ने की फिराक में तो नहीं है। वो किस बलिदान की बात कर रहे हैं? सवाल यह भी उठ रहे हैं कि इस पूरी सभा के दौरान जो गाँधी परिवार हुड्डा की जुबान में सरचढ कर बोलता था, आज ऐसा क्या हुआ कि वो नाम भी उनके सूची से गायब है। वो गाँधी परिवार जिन्होंने भजनलाल के हिस्से की कुर्सी छीनकर हुड्डा को दे दी थी। आज उसी हुड्डा को गाँधी परिवार या उनके नाम से किस बात की एलर्जी हो गयी है? हालांकि एक बात जरूर गौरतलब है कि इस दौरान उन्होंने अपना पूरा ध्यान भाजपा की खट्टर सरकार को कोसने में जरूर लगा दिया। वो तो अब सीधे मुख्यमंत्री मनोहर लाल से सवाल कर रहे हैं कि वो अपने पिछले वादों को गिनाए कि उन्होंने जनता के कितने वादों को पूरा करने का काम किया है। इतना ही नहीं हुड्डा इस बात को लेकर हुड्डा को चुनौती देने से भी पीछे नहीं हटे। बता दंे कि हुड्डा को जिन विभिन्न भ्रष्टाचार के कथित आरोप पर सीबीआई, ईडी और कोर्ट के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं उन्होंने तो सीधे-सीधे मनोहर सरकार पर जोरदार प्रहार करते हुए कहा है कि उन्होंने भ्रष्टाचार के सारे रिकाॅर्ड तोड़ दिए हैं।

गौरतलब बात है कि लोकसभा चुनाव जीतने में जितना भाजपा को राष्ट्रवाद का मुद्दा काम आया उतना ही कांग्रेस की गुटबाजी भी उन्हें सांसदों के जिताने की वजह बनी। मगर अब भी हुड्डा कहते हैं कि राष्ट्रवाद के मुद्दे पर भाजपा जीती, मगर विधानसभा चुनाव में यह सब चीजें नहीं चलेगी। वैसे हकीकत तो यह है कि हुड्डा और हरियाणा कांग्रेस के नेता अब भी यह बात समझने को तैयार नहीं कि यह कांग्रेस की फूट ही उनके लिए हार की सबसे बड़ी वजह बनकर साबित हुयी है। वैसे जानकारों का मानना है कि हरियाणा की जो आज की स्थिती है उससे देखकर भाजपा के लिए मिशन 75 पूरा करना आसान है। जबकि कांग्रेस के पाले में 10 सीट भी आ जाए तो बहुत बड़ा करिश्मा हो जायेगा। मगर हुड्डा को ठीक दूसरी तरफ यह विश्वास है कि उनके नेतृत्व में हरियाणा में कांग्रेस भाजपा को 75 की जगह 15 सीटों पर ही समेत कर रख देगी। वैसे सच कहें तो यह बात सुनाने में अच्छी लगती है मगर वास्तविकताओं से कोसों परे है।
वैसे हरे चुनाव में एक मशहूर जिंगल चुनाव को और रोचक बनाता है। याद है “अबकी बार-मोदी सरकार”, उसी प्रकार “फिर एक और बार मनोहर सरकार” आजकल ट्रैंड में चल रहा है, मगर अब पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपेंद्र हुड्डा ने भी एक नया जिंगल निकाला है। उन्होंने नारा दिया ‘खट्टर सरकार एक धोखा है, हरियाणा बचा लो एक मौका है।’

बहुत खूब कही हुड्डा जी ने। वैसे आजकल विपक्ष सरकार पर हावी होने की कोशिश कर रहा है और यह बात स्वीकारनी चाहिए कि जो कमाल अशोक तंवर नहीं कर पाए वो कमाल हुड्डा के भाषण जरूर कर जाते हैं। इतना ही नहीं वर्त्तमान कांग्रेस विधायकों का समर्थन भी तो हुड्डा के पास है। ऐसे में उनकी शक्ति बलवान तो है, मगर हुड्डा को समझाना चाहिए कि ऐसा न हो जाये की जिनके बलबूते वह फैसला लें, आगे चलकर वही उनका हाथ छोड़ कर किसी और का हाथ थाम ले और हुड्डा को महज पछतावे के अलावा कुछ न बचे। खैर हुड्डा भी राजनीति के कोई कच्चे खिलाडी नहीं, वह कोई भी फैसला लेंगे सोचसमझकर ही लेंगे। महागठबंधन की बात सामने आना, पार्टी छोड़ने की विधायकों की धमकी कहीं न कहीं इस बात को साबित करती है कि दबावतंत्र इस बार हुड्डा कुछ ज्यादा लगा रहे हैं। ऐसा न हो जाए कि जैसे वह स्वर्गीय भजनलाल का हक लेने में कामयाब हुए वैसे ही वह अशोक तंवर का हक छीनने में कामयाब हो जाए। खैर यह तो आने वाला समय ही बताएगा।

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