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ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वाले अफसर को कौन देगा सजा!

संपादकीय महेश मेहता

हिसार टुडे

क्या नया मोटर व्हीकल कानून लागू करने को जनता ने पसंद किया या जिस पीएम मोदी के नाम पर जनता ने वोट दिया था उन्हें अपने भूल का अंदेशा हुआ? यह बात मैं नहीं बल्कि सोशल मीडिया में इस बात की चर्चा जोरों पर है। अक्सर सरकार के नए-नए नियम और कानून आ रहे हैं। जो समाज हित में होने की बात करते हैं।

केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी इस बात से अवगत हैं कि अगर सडकों में बढ़ रही सड़क दुर्घटनाओं को रोकना है तो कोई न कोई कठोर कदम उठाना आवश्यक है। क्योंकि आंकड़े भी बताते हैं कि इन कुछ सालों में उन्होंने जिस प्रकार नए नियम और बदलाव लाये उससे सड़क दुर्घटनाओं के प्रमाण में कमी आयी। मगर भाई पब्लिक खुश नहीं। बोल रही है इतना ज्यादा चालान की क्या जरुरत है। चालान बढ़ाना ही था तो थोड़ा बढ़ाया होता।

आज वैसे पब्लिक पूछ रही है कि नियम और कानून का पाठ पढाने वालों को इतना नहीं पता कि जो नियम वह आम लोगों पर लगा कर थोप रहे हैं और जो लोग आम लोगों से यातायात नियमों के उल्ल्घन के बाद चालान के रूप में जुर्माना वसूल रहे हैं। वो ट्रैफिक अफसर क्या खुद कभी नियमों का पालन करते हैं? अक्सर किसी के बाइक पर बैठकर निकल जाने वाले यह अफसर खुद नियमों को ताक पर रखते हैं, सभी ऐसे बिल्कुल नहीं है। यातायात विभाग में बहुत से ऐसे लोग भी हैं

जो नियमों का पालन करते हैं। मगर सवाल यह उठखड़ा होता है कि जुर्माने के भूखतभोगीयों को नियम तोड़ते ट्रैफिक वाले ज्यादा दिखाई देते हैं। बीकानेर चौंक का ही हाल ले लीजिये। सबसे व्यस्तम चौंक के रूप में गिने जाने वाले बीकानेर चौंक के सामने बहुचर्चित मिराज सिनेमा है। जहां अक्सर लोगों का आना जाना होता है। इस चौंक के ही करीब विद्यार्थियों के लिए बने बहुचर्चित कोचिंग क्लासेज हैं, होटल हैं, बैंक हैं, दुकाने हैं। चौराहा है। मगर इसके बावजूद रोज सुबह इस चौंक में ट्रैफिक की जिम्मेदारी संभालने वाले अफसर कुर्सियां लगाकर बैठकर गपशप करते नजर आते हैं, बहुत कम दिखता है कि सुबह के समय वह ट्रैफिक का हाल चाल देखें। अक्सर बीकानेर चौंक में ट्रैफिक लाइट बंद रहती है। ऊपर से अधिकारी कुर्सियों में बैठकर आराम फरमाते हैं। ऐसे में अगर इस हालात के बावजूद कोई लोगों से चालान मांगे तो कोई क्यों नाराज होकर उन अफसरों पर सवाल न उठाये। नि:संदेह नये कानून का मकसद वाहन चालकों को यातायात नियमों के अनुसार ही वाहन चलाने और अपने साथ सभी आवश्यक दस्तावेज रखने के लिये बाध्य करना ही नहीं, बल्कि यातायात नियमों के अनुसार ही वाहन चलाना सुनिश्चित करना है। देखा जाता है कि लोग यातायात नियमों को धता बताते हुए दोपहिया वाहन और कार चलाते हुए मोबाइल पर बात कर रहे हैं या फिर इयर फोन लगाकर गाने सुनते हुए वाहन चलाते हैं। ऐसी स्थिति में दुर्घटना होने की संभावना काफी रहती है। इस पर भी जुर्माना किया जा रहा है।

मगर लोगों का कहना है कि बेहतर होता यदि कानून पर सख्ती से अमल करने से पहले यातायात पुलिस जनता को इस बारे में जागरूक करती। ऐसा करने पर संभव था कि इस कानून के तहत भारी भरकम जुर्माने से बचने का लोग प्रयास करते। सड़क परिवहन मंत्रालय के अनुसार 2015 में वाहन चालकों की गलती के कारण हुई 3,86,481 सड़क दुर्घटनाओं में से 2,40,463 दुर्घटनायें तेज रफ्तार से वाहन चलाने की वजह से हुई, जिनमें 64633 व्यक्तियों की मृत्यु हई थी। प्राप्त जानकारी के अनुसार देश में राजमार्गों पर 2015 में 1,42,269 दुर्घटनायें हुई, जबकि 2016 में ऐसी दुर्घटनाओं की संख्या 1,42,359 थी। वर्ष 2017 में राजमार्गों पर होने वाली दुर्घटनाओं में मामूली कमी आई और इनकी संख्या 1,41,466 थी।

वाहन चालकों पर भारी जुर्माना किये जाने को लेकर व्याप्त आक्रोश के संबंध में परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने सफाई दी कि नये कानून का उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा पैसा वसूलना नहीं बल्कि जनता को नियमों का पालन करने के लिये बाध्य करना है। नये कानून के तहत हो रहे चालान और इसमें हजारों रुपये का जुर्माना लगाये जाने की घटनाओं को देखते हुए अकेले दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण में होने संबंधी प्रमाणपत्र के लिये प्रदूषण जांच केन्द्रों पर लगी वाहनों की लंबी कतारों से ही अनुमान लगाया जा सकता है कि वाहन चालक किस हद तक नियमों की धज्जियां उड़ाते रहे हैं। खैर कोई कुछ कहे मगर उन अफसर पर भी एक्शन लेना चाहिए जो खुद ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं करते।

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