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करण दलाल पर यह क्या कह गए दीप मंगला !

संपादकीय :महेश मेहता

हिसार टुडे

मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के राजनीतिक सचिव दीप मंगला ने कहा पिछले 25 सालों से यहां राज कर रहे करण दलाल का पाॅलिटिकल आतंक अब खत्म हो गया है, अब डरने की जरूरत नहीं है। यह बात सीएम के राजनैतिक सचिव दीपक मंगला का है, मौका भी था बसंतगढ़ गांव के स्कूल के अपग्रेडेशन की खुशी में दीपक मंगला के स्वागत कार्यक्रम का। इस अवसर पर गांव के कुछ लोग कांग्रेस पार्टी को छोड़कर भाजपा में शामिल भी हुए। दीपक मंगला ने इसी मौके का फायदा उठाकर कांग्रेस को निशाने में लिया और दिखा दिया कि भाजपा का राज आ रहा है।

मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के राजनीतिक सचिव दीपक मंगला के हर बयान इस बात का सबूत है कि सरकार किस दिशा में आगे बढ़ रही है और किस रणनीति के तहत काम कर रही है। दीपक मंगला ने एक बड़ी बात कही उन्होंने गांव के लोगों से कहा कि तुम्हें अब वोट देते समय किसी से डरने की कोई जरूरत नहीं है। वोट देते समय इस बार पहचान करके वोट देनी है, ना कि किसी के भय और डर से। गौरतलब है कि बसंतगढ़ पलवल से कांग्रेस के विधायक करण दलाल के गांव किठवाड़ी का नंगला है। इस गांव में मुख्य रूप से दलित एवं कमजोर वर्ग के लोग रहते हैं। अक्सर ऐसा आरोप लगाया जाता है कि इन गांव वालो के ऊपर कांग्रेसी विधायक एवं उनके समर्थकों का वोट डालने के लिए दबाव रहता था।

बसंतगढ़ गांव में सीएम के राजनैतिक सचिव दीपक मंगला का जब गांव में स्वागत किया गया तो हैरत की बात है कि समारोह के बाद यहां की महिलाओं ने कहा कि उन्होंने अब तक कभी भी अपनी मर्जी से वोट नहीं डाला था, हमेशा करण दलाल के डर से दलाल को ही वोट दिया। दीपक मंगला ने आरोप लगाते हुए कहा वोट नहीं देने पर उनके समर्थक गांव में से भगा देने की धमकी दिया करते थे। कहते गांव को खाली करा देंगे। जिस के डर से उन्हें मजबूरी में दलाल को ही वोट देना पड़ता था। लोगों को भयभीत और आतंकित कर वोट लेने के मुद्दे पर विधायक दलाल ने भी स्पष्टीकरण देते हुए कहा की हमारे इस इलाके के लोग बहादुर लोग हैं, हमने अपनी बहादुरी से पलवल की अलग से पहचान बनाई है। तीस साल तक कोई किसी के भय से वोट नहीं देता। लोगों को डराने-धमकाने का काम तो बीजेपी के छुटभैये नेता कर रहे हैं। खैर यह तो राजनीति है। वैसे बता दें करण दलाल हुड्डा समर्थकों की फेहरिस्त में सबसे आगे है जो चाहते हैं कि अशोक तंवर को हटा दिया जाए और उस जगह भूपेंद्र सिंह हुड्डा को मौका दिया जाए। वैसे करण दलाल के मामले में कहा जाता है कि उनकी चौटाला परिवार से 18 साल पुरानी दुश्मनी है। क्योंकि जो करण दलाल हुड्डा समर्थक माने जाते है वो पहले कभी राजनीति में ओमप्रकाश चौटाला के करीबी हुआ करते थे। मगर बाद में यह प्यार तकरार में बदल गया। दलाल 1991, 1996 में चौधरी बंसीलाल की हरियाणा विकास पार्टी (हविपा) की टिकट पर पलवल से चुनाव जीते थे। वर्ष 1999 में दलाल ने भाजपा के रामबिलास शर्मा के साथ मिलकर चौधरी बंसीलाल की सरकार गिराने और ओमप्रकाश चौटाला को मुख्यमंत्री बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। हालांकि ओमप्रकाश चौटाला ने बाद में बंसीलाल की सरकार गिराने वाले अधिकतर हविपा विधायकों को किनारे लगा दिया। इस पर चौधरी बंसीलाल ने भी ओमप्रकाश चौटाला को बधाई प्रेषित की थी। इसके बाद करण दलाल चौटाला का साथ छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे।

2000 के चुनाव में ओमप्रकाश चौटाला का भाजपा के साथ समझौता हो गया और करण दलाल के भाजपा में जाने के बावजूद चौटाला ने पलवल की सीट इनेलो के खाते में रख ली। इस चुनाव में दलाल का टिकट ओपी चौटाला के दबाव में भाजपा ने काट दिया। इस पर दलाल आरपीआइ की टिकट पर चुनाव लड़े और उनके खिलाफ देवेंंद्र सिंह चौहान गठबंधन के संयुक्त प्रत्याशी बने। दलाल यह चुनाव जीत गए और इसके साथ ही दलाल की चौटाला परिवार से रंजिश शुरू हो गई। इसके बाद दलाल और चौटाला परिवार के बीच ऐसी तलवारें खिंचीं कि दोनों ने अब तक एक-दूसरे पर कोई वार करने में चूक नहीं की। इस दौरान वह कांग्रेस के नजदीक आ गए। 2004 में कांग्रेस विधायक के रूप में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुडडा के काफी नजदीक आ गए थे।

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