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सबसे मजबूत जाट नेता “बीरेंद्र सिंह”

संपादकीय

बीरेंद्र सिंह अपने वक्तत्व के लिए हमेशा सुर्खियों में छाए रहते हैं। कांग्रेस में थे तब और अब भाजपा में है तब। वैसे भाजपा में रहते हुए उन्होंने जितनी मजबूती से खुद को साबित कर दिखाया है और बेहतर राजकीय अनुभव और परिपक्वता का परिचय दिया है उसे देखकर कोई उनकी अनदेखी कर सकता।

बीरेंद्र सिंह उस दौर के नेता है जिन्होंने ताऊ देवीलाल, चौधरी भजनलाल, चौधरी बंसीलाल का दौर देखा है। ऐसे में उनके कद और अनुभव को कोई झुटला नहीं सकता। लोकसभा चुनाव में बीरेंद्र सिंह ने जिस प्रकार से अपने आईएएस बेटे के लिए टिकट निकलवाई और बृजेन्द्र सिंह जिस मार्जिन से जीत कर आये उन्होंने उनके इस कद को पार्टी हाई कमान की नजरो में और बढ़ा दिया है।
वो ऐसे नेता है जिन्हे पता है कि दुसरो की लाइन काटने में पसीने बहाने की जगह उसके सामने खुद की लाइन ऐसी बड़ी कर दो कि सामने वाला छोटा पड़ जाए। जब कांग्रेस पार्टी में खुद के खिलाफ षड्यंत्र और साईड लाइन करने की घटना से बीरेंद्र सिंह ने मौके को समझा, आगे भविष्य किसका उज्जवल दिख रहा है वह देखा और भाजपा का दामन थामने के साथ उन्हें केंद्रीय इस्पात मंत्री बनाया गया। हालांकि उनकी एक ख्वाइश जहां वे खुद को मुख्यमंत्री के शीर्ष पद पर बैठे देखना चाहते थे वो न कांग्रेस के जमाने में पूरी हुयी न भाजपा के दौर में। मगर हां भाजपा में बीरेंद्र सिंह की पहचान एक मजबूत जाट नेता के तौर पर जरूर बनी। हालात आज यह हैं कि उनके कद के सामने अब कोई टिक नहीं पाया है।

16 अगस्त को बीरेंद्र सिंह को भाजपा से जुड़े 5 साल पुरे हो जायेंगे। जाहिर सी बात है कि बीरेंद्र सिंह को एक मौका मिला है कि वो भाजपा के अंदर अपने दम-खम को दिखा सके। यही कारण है सर छोटूराम की विरासत लिए आगे बढ़ रहे बीरेंद्र सिंह इस तैयारी में है कि जाट नेता के तौर पर हरियाणा में सबसे मजबूत नेता के तौर पर अपनी पहचान बना चुके बीरेंद्र सिंह जाट बेल्ट जींद में पार्टी हाई कमान को बुलाये और जोशोखरोश के साथ भाजपा के अपने 5 साल पूरा होने का जश्न मना सके। जाट-बांगर बेल्ट में अपना दमखम दिखाने की तैयारी में बीरेंद्र रैली के लिए शाह को लाने वाले हैं। बता देें कि राज्यसभा सदस्य बीरेंद्र सिंह को कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए 16 अगस्त को पूरे पांच साल हो जाएंगे। इसके तुरंत बाद अक्टूबर में विधानसभा चुनाव हैं। ऐसे में बीरेंद्र सिंह ने रैली के लिए सही मौका चुना है और इस रैली के बहुत मायने लगाए जा रहे हैं। बीरेंद्र सिंह ने शुक्रवार को भाजपा अध्यक्ष व केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात कर रैली का निमंत्रण दिया है। बीरेंद्र सिंह यह रैली अपने गृह जिले जींद में करना चाहते हैं। जींद के उचाना कलां से बीरेंद्र सिंह विधायक रह चुके हैं और अब उनकी धर्मपत्नी प्रेमलता यहां से विधायक हैं। बीरेंद्र सिंह के बेटे बृजेंद्र सिंह हाल ही में हिसार लोकसभा सीटें से सांसद चुनकर आए हैं।

वैसे बीरेंद्र सिंह को हिसार संसदीय क्षेत्र में पार्टी ने प्रभारी बनाकर भेजा है। यही कारण है कि अब भी उनका राजनीति में अब भी बोलबाला बरकरार है। हालांकि उनपर भी विभिन्न विधानसभा में काबिल उम्मदवारो के चयन की जिम्मेदारी सौपी गयी है। शायद आपको याद हो कि बीरेंद्र सिंह पीएम नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से अच्छे ताल्लुकात हैंं। इसका नजारा लोकसभा चुनाव के पहले दिखाई दिया था जब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रोहतक बुलाकर अपने नाना दीनबंधु सर छोटू राम की आदमकद प्रतिमा का अनावकरण करवाया था।

जाट आंदोलन के दौरान बीरेंद्र सिंह की सही ताकत और कद की पहचान केंद्र नेताओ को हुयी। जब हरियाणा में जाट आरक्षण आंदोलन की आग में प्रदेश झुलसा था तब उस दौरान वह बीरेंद्र सिंह ही थे जिन्होंने अपने घर अमित शाह और जाट आरक्षण आंदोलन के नेताओ की बैठक और बात करवाकर सरकार में छायी अस्थिरता के दौर को खत्म करने में अहम योगदान निभाया। उसके बाद से आजतक आरक्षण की आग का वो नजारा कभी देखने को नहीं मिला। आज भी शांति के साथ जाट आरक्षण की बात सरकार तक पहुंचाने का काम किया जाता है, जिसके चलते यह कहना गलत नहीं होगा कि बीरेंद्र सिंह वह नेता है जिहोने जाट समुदाय को भड़काने की जगह उन्हें न्याय देने की बात की।

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