संपादकीय

विपक्ष को विधानसभा की टेंशन

भाजपा 70+ नारे के साथ आगे चल रही है तो वहीं अन्य विपक्षी पार्टियां भी चुप नहीं

हिसार टुडे 

महेश मेहता | हिसार

इस बार लोकसभा चुनाव में भाजपा ने जिस प्रकार से सभी पार्टियों की दुर्गती करते हुए बड़े मार्जिन से जीत हासिल की। उसने कहीं न कहीं विपक्ष के मन में यह डर पैदा कर दिया है कि अगर यही आलम रहा तो हो सकता है की विधानसभा में भाजपा उनकी पार्टी को पूरी तरह से साफ कर दे।

कांग्रेस हो, जजपा हो, इनेलो हो, बसपा हो, लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी हो या आम आदमी पार्टी सभी के सभी इसी प्रयत्न में है कि अब मायूस होकर चुप बैठने से कुछ नहीं होगा। जरुरी है कि अब और कड़े तेवर एवं मेहनत से आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी प्रत्याशियों की जीत को और सुनिश्चित किया जा सके। यही कारण है कि जहां भाजपा 70+ नारे के साथ आगे चल रही है तो वहीं अन्य विपक्षी पार्टियां भी चुप नहीं बैठी हैं।

विपक्ष यह कहकर अपने आप को तस्सली देने का काम कर रहा है कि मोदी लहर और राष्ट्रवाद के मुद्दे पर भाजपा के प्रत्याशी जीत कर आये, मगर विधानसभा चुनाव में ऐसा नहीं होगा। विपक्ष को लगता है कि आगामी चुनाव में मोदी लहर और भाजपा की रणनीति काम नहीं कर पाएगी। मगर विपक्ष को अंधेरे में रहने से ज्यादा इस हकीकत को स्वीकारना पड़ेगा कि जैसी बढ़त और लीड इस बार लोकसभा चुनाव में भाजपा को मिली है अगर ऐसा ही विधानसभा में करिश्मा चला तो शायद उनके लिए मुसीबत ज्यादा हो सकती है।

वैसे चुनावी नतीजे जिस प्रकार से आए हैं वह वाकई मंथन का विषय है। अब कुछ पार्टियां तो आगामी चुनाव की तैयारियों में जुट गयी हैं तो कुछ अभी तक एक दूसरे पर हार का दोषारोपण कर रहे हैं। सबसे पहले बात होगी कांग्रेस की। कांग्रेस अभी मंथन के दौर और टीवी डिबेट से दूर है।

उनको यह लगता है कि कहीं न कहीं मीडिया में विपक्ष को जगह न मिलने से कांग्रेस का यह हाल हुआ। वहीं बात करे बसपा-लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी की तो उन्होंने लोकसभा के बाद इनेलो से बेहतर प्रदर्शन कर दिखा दिया कि वह भी हरियाणा के राजनीति में अपना मुकाम बनाने में आज या कल कामयाब जरूर हो पाएगी।

इसलिए उन्होंने घोषणा कर दी है कि हरियाणा में विधानसभा चुनाव 2019 में वह मिलकर चुनाव लड़ेंगी। दोनों दलों के बीच सीटों का फार्मूला भी तय हो गया है। राजकुमार सैनी की लोसुपा 55 और बसपा 35 सीटों पर चुनाव लड़ने को लेकर मंजूरी दे दी है। यानी हरियाणा की सबसे फास्ट पार्टी जो ताबड़तोड़ निर्णय ले रही है।

इसी के मद्देनजर उन्होंने सोनीपत में विधानसभा चुनावों के मद्देनजर अहम बैठक बुलाई है। मगर सवाल यह उठा खड़ा होता है कि लोकसभा चुनाव में 10 में से 7 सीटों पर तीसरे नंबर पर रही पार्टी के पास क्या चुनाव के लिए प्रत्याशी होंगे? क्योंकि राजनीतिक पंडितों का मानना है कि हरियाणा की 3 पार्टियों को इस बार विधानसभा चुनाव में पार्टी का उम्मीदवार तलाशने में दिक्क्त आने वाली है।

उसमें पहली पार्टी तो इनेलो है, दूसरी जजपा और तीसरी बसपा और लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी है। माना जा रहा है कि भाजपा के सामने प्रबल उम्मीदवार खोजने में उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। इतना ही नहीं हो सकता है कि विधानसभा चुनाव में बचे-कूचे प्रबल नेता भी दलबदल कर लें।

वैसे इनेलो सुप्रीमो ओ.पी. चौटाला भी पार्टी को मजबूत करने और विधानसभा चुनाव के मद्देनजर प्रयत्न में जुटे हैं। इस बीच चर्चायें यह भी चल रही हंै कि इनलो और जजपा का गठबंधन हो जाना चाहिए मगर जननायक जनता पार्टी के नेता दुष्यंत चौटाला ने साफ किया कि इनेलो और जेजेपी अब कभी एक नहीं हो सकती। दुष्यंत चौटाला ने यह भी कहा कि आम आदमी पार्टी के साथ उनका गठबंधन अभी जारी रहेगा। जिसका अर्थ है कि विधानसभा चुनाव में जजपा आप का साथ नहीं छोड़ेगी। इसके मद्देनजर दुष्यंत 9 जून को नेशनल और स्टेट एग्जिक्यूटिव की बैठक संयुक्त रूप से करने जा रहे हैं।

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