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राहुल के लिए एनसीपी का विलय करेंगे शरद पवाऱ !

शरद पवार राजनीति के वो माहिर खिलाडी है जिनकी काबलियत और बुद्धिमत्ता आज भी हर किसी के सर चढ़कर बोलती है

हिसार टुडे

महेश मेहता | हिसार

शरद पवार राजनीति के वो माहिर खिलाडी है जिनकी काबलियत और बुद्धिमत्ता आज भी हर किसी के सर चढ़कर बोलती है। मगर इन दिनों शरद पवार की पार्टी एनसीपी उस दौर में है जहां राजनीतिक विरासत की लड़ाई उनके भतीजे अजित पवार और उनकी बेटी सुप्रिया सुले के बीच है।

अजित पवार की धूमिल छवि जहां पार्टी को नुक्सान पंहुचा रही है तो वही पार्टी का अस्तित्व भी खतरे में पड़ता जा रहा है। यही कारण है कि हाल में जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी उनसे मुलाकात करने आये तो उस मुलाकात के कई मायने भी निकाले गए।

माना जाता है कि लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद एनसीपी नेता शरद पवार अपनी पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का राहुल गांधी के कांग्रेस में विलय कर सकते हैं। वैसे यह चर्चाये इसलिए भी गर्म है क्योंकि माना जा रहा है कि कांग्रेस में राकांपा के विलय से राहुल गांधी को लोकसभा में नेता विपक्ष का दर्जा मिल सकता है क्योंकि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष पद के लिए कम से कम 55 सांसदों की पार्टी का नेता होना जरूरी है।

जबकि कांग्रेस के पास 52 और एनसीपी के पास 5 सांसद हैं। विपक्ष में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी है लेकिन वो नेता विपक्ष के दर्जा से 3 सीट कम है और ऐसे में पवार की पार्टी के विलय के बाद कांग्रेस के सदस्यों की संख्या 57 हो सकती है और राहुल गांधी को लोकसभा ने विपक्ष के नेता का पद मिल सकता है।

2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को 44 सीट मिली थी और नेता विपक्ष का पद उसे नहीं मिला। कांग्रेस संसदीय दल के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को सरकार ने सीबीआई निदेशक या लोकपाल जैसे पदों पर नियुक्ति के लिए बुलाया लेकिन बतौर सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के नेता के तौर पर, ना कि नेता विपक्ष के तौर पर।

नेता विपक्ष को कैबिनेट मंत्री का दर्जा होता है और उसे कैबिनेट मंत्री रैंक की सुख-सुविधाएं मिलती हैं। यही कारण है कि कांग्रेस यह चाहती है कि शरद पवार दुबारा कांग्रेस में शामिल होकर उनकी इज्जत बचा ले। वैसे आपको पता ही होगा कि शरद पवार ने बीस साल पहले सोनिया गांधी के विदेशी मूल का कारण उठाकर 1999 में कांग्रेस से अलग होकर पीए संगमा और तारिक अनवर के साथ एनसीपी बनाई थी।

पीएम संगमा बाद में उनसे अलग हो गए और तारिक अनवर हाल में ही एनसीपी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। एनसीपी को इस समय राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा भी हासिल है। इस लोकसभा चुनाव में एनसीपी ने महाराष्ट्र की 4 और लक्षद्वीप की 1 सीट जीती है।
वैसे इस बीच राहुल ने अपने अध्यक्ष पद न बनने के साथ ही साथ अपनी बहन प्रियंका गाँधी को भी अध्यक्ष पद से दूर रखने की सलाह दी।

ऐसे में सवाल यह उठ खड़ा होता है कि क्या शरद पवार अपनी पार्टी को कांग्रेस में विलय करने को तैयार होंगे और क्या मौके की नजाकत यही कहती है? क्योंकि हकीकत तो यह है कि खुद शरद पवार जो खुद को प्रधानमंत्री पद के दावेदार के रूप में एक जमाने में खुद को देखा करते थे, वह चाहते हैं कि उनका यह ख्वाब पूरा हो साथ ही उनकी बेटी सुप्रिया सुले का राजनितिक कॅरिअर भी सुरक्षित रहे, क्योंकि जिस प्रकार उनके भतीजे अजित पवार ने अपने बेटे को टिकट दिलवाई उससे शरद पवार नाराज थे और उन्होंने चुनाव न लड़ने का इरादा कर लिया था।

इतना ही नहीं शरद पवार यह जान रहे थे कि एक तरफ अजित पवार की गुटबाजी और पार्टी के अंदर नेताओं की नाराजगी के चलते एनसीपी कभी भी टूट सकती है। ऐसे में उनको भी शायद लग रहा है कि यही मौका है कि जब सभी लोग फेल हो गए तो शायद शरद पवार का करिश्मा कांग्रेस में चले। हालांकि यह कितना मुमकिन हो पायेगा यह तो आने वाला समय ही बताएगा।

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