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गब्बर से “पंगा” !

संपादकीय

हिसार टुडे ।

50-50 कोस दूर जब भी कोई अधिकारी हिमाकत करने की सोचता है तो पता है दूसरा अधिकारी क्या कहता है भाई गलती मत कर वरना गब्बर आ जायेगा। जी हां यहां हरियाणा का वह बब्बर शेर जो अपने गब्बर अंदाज के लिए जाना जाता है वो है हमारे अनिल विज साहब। मुझे तो समझ नहीं आता जब भी कोई विवाद होता है तो उसके इर्द-गिर्द अनिल विज का नाम कहीं न कहींं जरूर आ जाता है। वैसे उनसे कोई जल्दी पंगा लेना नहीं चाहता। क्योंकि उनसे पंगा लेना यानी अपनी खैरियत की चिंता। अक्सर हरियाणा की राजनीतिक गलियारों में अक्सर अनिल विज और मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के बीच चल रहे कोल्ड वॉर किसी से छुपा नहीं है। आपको याद होगा कि इंद्रधनुष कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और मुख्यमंत्री का नाम और तसवीर लगायी गयी थी, मगर अनिल विज के नाम का उल्लेख तक नहीं था। नाराज अनिल विज कार्यक्रम में शामिल तक नहीं हुए। इतना ही नहीं नमाज खुले में पढ़ने को लेकर भी मुख्यमंत्री और अनिल विज के बीच तकरार हो चुकी है, मगर इस बार मौका था योग दिवस का।

अमित शाह हरियाणा आने वाले हैं। विधानसभा चुनाव के पहले इस कार्यक्रम की काफी अहमियत है मगर इसमें मनीष ग्रोवर और अन्य मंत्रियों का नाम और अनिल विज को कार्यक्रम की निमंत्रण सूचि से गायब कर दिया गया, होना क्या था बब्बर ने दिखाया अपना गब्बर अंदाज तो अधिकारी भी थर-थर कांपने लगे। दरअसल सरकार द्वारा रोहतक में राज्य स्तर पर अंतरराष्ट्रीय योग दिवस समारोह आयोजित होना था। इस समाराेह में हरियाणा के खेल, स्वास्थय एवं आयुष मंत्री होने के बावजूद अनिल विज को समारोह में नहीं बुलाया गया था। जिससे वह नाराज चल रहे थे। जैसे ही अनिल विज के नाराजगी के नाराजगी की खबरें आयी सरकार को रातों-रात कार्यक्रम में बदलाव करते हुए उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि बनाने के लिए बाध्य होना पड़ा। सबसे खास बात यह थी कि जो अनिल विज भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में से एक माने जाते हैं। योग कार्यक्रम में मुख्यमंत्री मनोहर लाल के साथ राज्यमंत्री मनीष ग्रोवर और सांसद डॉ. अरविंद शर्मा स्थानीय प्रतिनिधि होने के नाते शाह के साथ प्राणायाम करने के लिए बुलाया गया, मगर विज को नजर अंदाज कर दिया गया था। हैरत तो यह थी कि 21 जून को योग दिवस पर होने वाले प्रदेश स्तरीय कार्यक्रम में विज को बुलाने की बजाय पहले उन्हें अंबाला में जिला स्तरीय कार्यक्रम का मुख्य अतिथि बनाया गया था।

हंसी की बात तो यह है कि सरकारी स्तर पर बाकायदा उनका पूरा शेड्यूल जारी करके विज को दूसरे मंत्रियों की तरह अपने हलके में आसन लगाने की जिम्मेदारी दी गई। इस पर भड़के विज ने मुख्यमंत्री कार्यालय में अपनी आपत्ति दर्ज करवाते हुए उनका ऐसा शैड्यूल बनाने वाले अफसरों के खिलाफ तुंरत कार्रवाई करने की मांग कर डाली। विज ने जहां अपनी दहाड़ लगायी अफसरों के पैरों के नीचे से जमीं खसक गई। जब मुख्यमंत्री को पता चला कि बब्बर शेर नाराज हो गया तो होना क्या था फटाफट डैमेज कण्ट्रोल किया और पुरे के पुरे कार्यक्रम में बदलाव ला दिया।

अब हमारे अनिल विज साहब भी राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और मुख्यमंत्री मनोहर लाल के साथ अब योग क्रियाएं करेंगे। अब स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि बनाते हुए उनसे रोहतक पहुंचने का अनुरोध किया गया है। अनिज विज इस बात से नाराज थे कि रोहतक के सांसद डाॅ. अरविंद शर्मा और विधायक मनीष ग्रोवर को लोकल जनप्रतिनिधि के नाते शाह के कार्यक्रम का निमंत्रण दिया गया। लेकिन आयुष, स्वास्थ्य और खेल मंत्री के नाते अनिल विज को इसका कोई निमंत्रण नहीं मिला। सरकार की दलील है कि बाकी मंत्रियों की तरह अनिल विज को उनके गृह क्षेत्र अंबाला की जिम्मेदारी सौंपी गई। मगर क्या आपको लगता है अनिल विज इससे मानने वाले थे। भाई यह गब्बर का तेवर हैं। शायद अब के योग कार्यक्रम में उनके तेवर से फिर सरकार को समझ आ गया होगा।

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