टुडे न्यूज़संपादकीय

नया मोटर व्हीकल एक्ट

गुजरात लगा चुकी ब्रेक तो सीएम साहब आप किसका कर रहे इंतजार!

संपादकीय महेश मेहता

नया संशोधित मोटर वाहन अधिनियम के तहत ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर वाहन चालकों से भारी-भरकम जुर्माना वसूला जा रहा है। कई राज्य सरकारों ने इसमें छूट की घोषणा की है तो कई ने इसे लागू न करने का फैसला लिया है। हरियाणा में तो इसपर 3 दिन की छूट देकर जनजागृति फैलाने का काम किया गया था। हो सकता है कि विधानसभा चुनाव में भाजपा के प्रति जनता के रोष व्याप्त होने का डर हो। क्योंकि यह कहना गलत नहीं होगा की इसी नए मोटर वेहिकल एक्ट के तहत भाजपा को चुनाव में इसका खामियाजा उठाना पड़ सकता है। इतना ही नहीं इस नए कानून के अंतर्गत चालान काटने में भी सख्ती पहले की अपेक्षा कम है। अचानक यह चलन काटने की प्रक्रिया भी ठंडी पड़ गयी है। जाहिर है जब अचानक कुछ अलग दिखाई दे तो लोगो का यह सोचना तो लाजमी ही है कि हो सकता है सरकार को आगामी चुनाव का डर है।

मगर यह हाल केवल हरियाणा का नहीं बल्कि यह हाल उत्तराखंड का भी है जहां विधानसभा चुनाव होने वाले है। आगमी चुनाव का ऐसा डर था कि अचानक उत्तराखंड सरकार ने संशोधित अधिनियम को जुर्माने में कटौती के साथ अपनाने का फैसला किया। राज्य मंत्रिमंडल ने फैसला किया कि अगर कोई अनधिकृत व्यक्ति वाहन चलाते पकड़ा जाए तो उस पर 2,500 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा, जबकि केंद्र ने 5,000 रुपये का जुर्माना प्रस्तावित किया था। इसी तरह, बिना लाइसेंस के वाहन चलाने या नाबालिग द्वारा सार्वजनिक स्थान पर वाहन चलाने पर 2,500 रुपये का जुर्माना लगेगा, जो केंद्र द्वारा प्रस्तावित 5,000 रुपये से कम है। अगर कोई ड्राइविंग लाइसेंस के लिए अयोग्य घोषित हो जाता है और वह सार्वजनिक स्थान पर वाहन चलाता है तो उस पर केंद्र द्वारा प्रस्तावित 10,000 रुपये के बजाय 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। ड्राइविंग करते समय मोबाइल पर बात करने पर केंद्र सरकार ने 5,000 रुपये का जुर्माना प्रस्तावित किया, लेकिन उत्तराखंड ने इसे घटाकर 1,000 रुपये तक काटने का फैसला किया। इतना ही नहीं झारखंड की बात करे तो लोगो के रोष से बचने के लिए झारखंड सरकार ने नए कानून के तहत भारी भरकम जुर्माने से तीन माह तक राहत देने का फैसला किया।

झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि तीन माह तक यातायात नियमों को लेकर लोगों के बीच सघन जागरूकता अभियान चलाया जाए। इस अवधि में लोगों को अपनी गाड़ियों के कागजात अपडेट कराने का भी समय मिल जाएगा। यह हाल जहां झारखण्ड का रहा तो वही ठीक दूसरी तरफ दिल्ली सरकार की ओर से अभी तक नए मोटर व्हीकल एक्ट को लेकर अधिसूचना जारी ही नहीं की गई, लेकिन चालान नए नियम के तहत ही किए जा रहे हैं। इस चालान को कोर्ट में जमा करने को कहा जा रहा है। वही कर्नाटक सरकार ने जुर्माने को कम करने की अनुमति के लिए केंद्र सरकार से संपर्क साधने का फैसला लिया है। सरकार इस बारे में गुजरात सरकार से भी परामर्श करेगी। यह सुनिश्चित करने के प्रयास किए जाएंगे कि जुर्माने की राशि आम लोगों पर भारी न पड़े।

इस नए मोटर व्हीकल एक्ट के अनुसार पीएम मोदी के घर अर्थात गुजरात में उल्टा गुजरात सरकार ने अधिनियम के तहत 15 मामलों में जुर्माना राशि में कटौती की है। अधिकांश मामलों में केंद्र द्वारा प्रस्तावित जुर्माने की राशि 50 फीसद कम की गई है तो कुछ में 70 फीसद तक की कमी की गई है। गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने साफ कहा कि सरकार कठोर जुर्माना लगाकर लोगों को परेशान करना नहीं चाहती है। हमारी प्राथमिकता मानव जीवन की सुरक्षा है। काश यह बात हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल के कानो में पढ़ती तो अच्छा होता क्योंकि अगर पीएम नरेंद्र मोदी के राज में गुजरात में जुर्माने में कटौती की गयी है तो हमारे मुख्यमंत्री इसमें कटौटो करने की सिफारिश क्यों नहीं कर रहे। वो केंद्र को क्या दिखाना चाहते है।

इतना ही नहीं भाजपा शाषित राज महाराष्ट्र में संशोधित अधिनियम लागू ही नहीं किया गया है। और तो और ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में कई जगहों पर पुलिस और जनता के बीच विवाद को देखते हुए संशोधित अधिनियम का क्रियान्वयन तीन महीने के लिए रोक दिया गया है। मुख्यमंत्री बीजू पटनायक ने परिवहन विभाग को लोगों को इस कानून के बारे में बताने के लिए कहा है, ताकि इसे आसानी से लागू किया जा सके।

यानी सभी मुख्य राज्यों ने इस नए मोटर व्हीकल एक्ट को ब्रेक लगाया हुआ है , मगर हमारे मुख्यमंत्री किस बात का इंतज़ार कर रहे है यह मंथन का विषय है। अब आम जनता भी यह जानकारी सुनकर जाहिर है सवाल तो पूछेगी सबने एक्ट को लगया ब्रेक तो आप(मुख्यम्नत्री मनोहर लाल) किस बात का इंतज़ार कर रहे है।

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