संपादकीय

ऐ बेखबर “तेरी जीत से ज्यादा तो चर्चे मेरी हार के हैं ”

हिसार टुडे। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिह हुड्डा ने हाल में कार्यकर्ताओं के साथ ली बैठक में एक ऐसा बयान दिया जो आज सभी के लिए चर्चा का विषय बन चुका है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने केवल हमारे सदियों पुराने भाईचारे को खंडित करने का काम किया है। आखिर किस भाईचारे की बात हुड्डा कर रहे हैं। वह क्यों कह रहे हैं कि सब संगठित हो, भाईचारा मजबूत करें और बूथ पर मजबूती से लड़ाई लड़ने की कार्ययोजना बनाएं।

आखिर हुड्डा को किस बात का डर खाये जा रहा है। क्या हुड्डा को यह डर सताने लगा है कि उनका वोट बैंक छटकता जा रहा है। दरहसल अपनी हार के बाद अपने कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ने हुड्डा जी पहुंचे थे। घर का बड़ा जिस प्रकार अपने घर वालों को दुःख की घड़ी में ढांढस बांधता है यही हाल हुड्डा का भी था वह कह रहे थे अपने कार्यकर्ताओं से कि मायूस न हों। सब संगठित हों, भाईचारा मजबूत करें और बूथ पर मजबूती से लड़ाई लड़ने की कार्ययोजना बनाएं।

इतना ही नहीं हुड्डा ने बड़ी-बड़ी डींगे हांकने वाले भाजपा नेताओं को अपने चित परिचित अंदाज में बड़े शायराना अंदाज में कहा कि “इतना भी गुमान ना कर अपनी जीत पर, ऐ बेखबर शहर में तेरी जीत से ज्यादा मेरी हार के चर्चे हैं।” हुड्डा जी यह बात तो माननी होगी शहर में दुसरों की जीत से ज्यादा आपकी हार की चर्चा ज्यादा है। ज्यादातर लोगों का यही सवाल था हुड्डा जीते? इसका अंदाजा लगाया जा सकता है कि चर्चा किसकी ज्यादा है। वैसे हुड्डा ने एक बात दोहराई जिसका जिक्र कई बार मैंने जिक्र किया था “भाईचारे का।” हुड्डा ने कहा कि भाजपा ने केवल हमारे सदियों पूराने भाईचारे को खंडित करने का काम किया है।

प्रदेश की भाजपा सरकार प्रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट को दबाये बैठी है। जिस दिन यह रिपोर्ट बाहर आयेगी, सच्चाई बाहर आ जाएगी और यह स्पष्ट हो जाएगा कि हरियाणा में आरक्षण के नाम पर जो बवाल हुआ, उसमें सीधे तौर पर भाजपा सरकार का हाथ था। यानि हुड्डा भी मानने लगे हैं कि आरक्षण की आग से नाराजगी का खामियाजा उन्हें और उनके बेटे को इस चुनाव में उठाना पड़ा। यानी जाट-नॉन जाट के मुद्दे के साथ जाट आरक्षण का मुद्दा भी हुड्डा को ले डूबा। यही कारण है कि हुड्डा लगातार अपना पक्ष साफ करके दिखने में जुट गए हैं। क्योंकि इस लोकसभा चुनाव में भाजपा ने जाट आरक्षण के मुद्दे को उजागर कर हुड्डा के खिलाफ हरियाणा में हवा बनायी थी। आरक्षण के मामले में हुड्डा के करीबियों का नाम आना भी भाजपा को मौका दे गया चुनाव में मुद्दा उठाने का। मगर लगता है कि जाट आरक्षण का मुद्दा ही हुड्डा को आगामी चुनावों में भी बहुत बुरा प्रभाव डालने वाला है। वो कितना भी चाहे कि वह अपनी छवि धो ले, मगर लगता है कि यह जल्दी मुमकिन होने वाला नहीं है। आज हुड्डा भाजपा को पेपर लीक सरकार कहते हैं। वो कहते है कि उनके पास 10 ऐसे प्रमाण भी हैं, जो सरकार की कथित पारदर्शिता को बेनकाब करते हैं। वे शीघ्र ही इन प्रमाणों को चंडीगढ में जाकर उजागर भी करेंगे।

अब मुझे यह समझ नहीं आता कि फिर चुनाव में भाजपा जिन नौकरी के मुद्दे पर अपनी ईंमानदार छवि दिखाकर लोगों का भरोसा जीत रही थी और कहा रही थी कि हुड्डा के कार्यकाल में बिना पर्ची-खर्ची के काम नहीं होता था, जब हुड्डा ने क्यों यह बात नहीं उठायी। खैर विधानसभा ही सही कुछ मुद्दे हाथ में होना भी जरुरी है। वैसे भूपेंद्र हुड्डा का मानना है कि हरियाणा में विधानसभा चुनाव में स्थानीय मुद्दे प्रभावित रहेंगे। इसीलिए इस बार कांग्रेस पार्टी अपने 10 वर्ष के शासनकाल की उपलब्धियों और भाजपा की खट्टर सरकार की 5 वर्ष की नाकामियों को मुद्दा बनाकर चुनाव मैदान उतरेगी। मगर हुड्डा जी बस कार्यकताओं के सामने बतियाने से कुछ नहीं होगा आपको भी सड़कों में उतर कर माहौल बनाना होगा। देखो भाजपा तो शुरू हो गयी माहौळ बनाने में 5 तारीख से हर लोकसभा क्षेत्र में अभिनन्दन सभा ले रही है। क्योंकि आपके ऊपर जाट आरक्षण की आग का जो ठप्पा लगा है उस दाग को धोना भी आपके लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर साबित होगी।

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