संपादकीय

मोदी 2.0: मोदी की टीम तैयार

हिसार टुडे 

जैसा कि पहले से माना जा रहा था कि मोदी सरकार 2.0 में शामिल नए और दिग्गज चेहरे के साथ मोदी सरकार एपीआई दूसरी सफल पारी खेलने की शुरुवात कर चुके है। अब इस सूची में अमित शाह को बड़ी जिम्मेदारी दी गयी है। पीएम मोदी के सबसे भरोसेमंद और गुजरात में उनके मुख्यमंत्री रहने के दौरान गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी निभा चुके अमित शाह को देश का नया गृह मंत्री बनाया गया है। वहीं, मोदी सरकार-1 में गृह मंत्री की भूमिका में रहे राजनाथ सिंह को रक्षा मंत्री के तौर पर नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। नितिन गडकरी को पहले की तरह ही सड़क परिवहन, जबकि अरुण जेटली के सरकार में शामिल न होने की स्थिति में रक्षा मंत्री रहीं निर्मला सीतारमण को इस बार वित्त मंत्री बनाया गया है। मोदी के ‘सरप्राइज मंत्री’ पूर्व विदेश सचिव एस. जयशंकर को विदेश मंत्री बनाया गया है। उन्हें अमेरिका, चीन और रूस तीनों महत्वपूर्ण देशों में काम करने का लंबा अनुभव है। उनके शपथ के साथ ही तय माना जा रहा था कि उन्हें विदेश मंत्रालय दिया जा सकता है। दरअसल, मोदी सरकार-1 में विदेश मंत्री रहीं सुषमा स्वराज ने इस बार चुनाव नहीं लड़ा था और ऐसे में जयशंकर को विदेश मंत्री बनाना महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

खास बात यह है कि एनडीए के सहयोगी दलों को पिछली बार मिले मंत्रालयों को इस बार भी बरकरार रखा गया है। एलजेपी प्रमुख रामविलास पासवान को इस बार भी उपभोक्ता एवं खाद्य, शिरोमणि अकाली दल से हरसिमरत कौर बादल को खाद्य प्रसंस्करण, आरपीआई के रामदास आठवले को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, शिवसेना के कोटे से आने वाले मंत्री अरविंद सावंत को भारी उद्योग मंत्रालय दिया गया है। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में पहले वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री और फिर रक्षा मंत्रालय संभालने वालीं निर्मला सीतारमण को अब वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है। वह देश की पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री बन गई हैं। प्रधानमंत्री रहते हुए इंदिरा गांधी ने 1970-71 के बीच वित्त मंत्रालय अपने पास रखा था। पहली पूर्णकालिक महिला रक्षा मंत्री बनने का गौरव भी निर्मला सीतरमण के ही नाम है।

इस मामले में भी उनसे पहले इंदिरा गांधी का ही नाम आता है। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में निर्मला को उद्योग एवं वाणिज्य मंत्रालय का जिम्मा राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार के रूप में सौंपा गया था। इसके बाद उन्हें कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई और उन्हें रक्षा मंत्री बनाया गया था। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दूसरे कार्यकाल में उन्हें वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी है। निर्मला का जन्म तमिल नाडु के एक साधारण से परिवार में 18 अगस्त 1959 को हुआ था। उनके पिता रेलवे में काम करते थे और मां घर संभालती थीं। पिता की नौकरी में बार-बार ट्रांसफर होता रहता था, जिसकी वजह से वह तमिलनाडु के कई हिस्सों में रहीं। निर्मला सीतारमण ने अपनी शुरुआती पढ़ाई तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली से ही की। उन्होंने अपनी ग्रेजुएशन अर्थशास्त्र में की थी। इसके बाद मास्टर्स के लिए वह दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में आईं। इसके बाद उन्होंने इंडो-यूरोपियन टेक्सटाइल ट्रेड में अपनी पीएचडी की रिसर्च की।

वैसे इस मंत्रिमंडल में एक ख़ास चर्चित चेहरा रहा एकदम साधारण वेशभूषा और सामान्य जनजीवन वाले प्रताप सारंगी का। प्रताप सारंगी चुनाव जीतने के बाद से ही काफी चर्चा बटोर रहे हैं। उन्हें ‘ओडिशा का मोदी’ भी कहा जाता है। सांसद चुने जाने से पहले प्रताप चंद्र सारंगी ओडिशा के नीलगिरी विधानसभा से 2004 और 2009 में विधायक चुने जा चुके हैं। इससे पहले वह 2014 के लोकसभा चुनाव में भी खड़े हुए थे लेकिन तब उन्‍हें हार मिली थी। प्रताप सारंगी को नरेंद्र मोदी का करीबी माना जाता है। बताया जाता है कि मोदी जब भी ओडिशा आते हैं तो सारंगी से मुलाकात जरूर करते हैं। सफेद दाढ़ी, सिर पर सफेद कम बाल, साइकिल और बैग उनकी पहचान है। गरीब परिवार से ताल्‍लुक रखने वाले प्रताप सारंगी का जन्‍म नीलगिरी में ही गोपीनाथपुर गांव में हुआ। इतना ही नहीं प्रताप चंद्र सारंगी ने बीजेडी के रबिन्द्र कुमार जेना को इस बार 12,956 वोटों से हराया। बालासोर सीट से 1951, 1957 और 1962 में कांग्रेस को कामयाबी मिली थी। 1967 में यह सीट कांग्रेस के हाथ से निकली और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया को मिली। साल 1971 के चुनाव में कांग्रेस ने फिर इस सीट पर कब्जा जमा लिया। 1977 में फिर कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया यहां से जीती। इसके बाद के दो चुनावों 1980 और 1984 में यहां से कांग्रेस जीत हासिल की। 1991 और 1996 में भी इस सीट पर कांग्रेस को जीत मिली थी। 1989 में इस सीट से जनता दल को कामयाबी मिली। 1998 के चुनाव में बीजेपी यहां से पहली बार जीती और इसके बाद 1999, 2004 में उसने अपनी कामयाबी को दोहराया। 2009 में कांग्रेस के श्रीकांत कुमार जेना चुनाव जीते थे। 2014 में यहां बीजेडी के रबींद्र कुमार जेना जीते थे।

वैसे इस बार सबसे ज्यादा चर्चा का विषय रहा है एनडीए के अहम सहयोगी जेडी (यू) के कोटे से मोदी सराकर में एक भी मंत्री नहीं है और इसको लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है। जेडी(यू ) अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस मसले पर कहा है कि पार्टी को सरकार में सांकेतिक भागदारी करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि बीजेपी की तरफ से मंत्रिपरिषद में एक सीट का ऑफर आया था, लेकिन जेडी (यू ) इससे सहमत नहीं। इसके साथ ही नीतीश ने यह भी स्पष्ट किया कि वह एनडीए के साथ मजबूती से बने रहेंगे। प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के बाद वापस पटना लौटे नीतीश ने कहा था कि, ‘भाजपा केवल सांकेतिक प्रतिनिधित्व देना चाह रही थी, लेकिन हमारी इसमें दिलचस्पी नहीं। हमने कुछ नहीं मांगा।’ एनडीए में बने रहने के सवाल पर नीतीश ने कहा कि हमें कुछ नहीं चाहिए, हम ऐसे ही सरकार के साथ हैं। लगातार दूसरी बार भारत के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने वाले नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद में 57 मंत्रियों को जगह मिली है।

नीतीश ने कहा, ‘भाजपा ने हमें बताया है कि नई सरकार में सभी एनडीए के घटक दलों को 1-1 सीट दे रहे हैं। उनकी बात से लगा कि एनडीए के घटक दलों और जेडीयू को सांकेतिक रूप से प्रतिनिधत्व देना चाहते हैं। बीजेपी के ऑफर पर जेडीयू की कोर टीम से बात की और निर्णय लिया कि केंद्र में सांकेतिक भागीदारी की कोई जरूरत नहीं है। भागीदारी सही अनुपात में होनी चाहिए।’ नीतीश ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को याद करते हुए यह भी कहा कि, ‘अटलजी के कार्यकाल में भी हम साथ थे। सीट के हिसाब से मंत्री पद मिला था। गठबंधन सरकार में ऐसा ही होता है। उनके समय तो मंत्रिमंडल में शामिल होने से पहले ही मंत्रालय पर चर्चा कर ली जाती थी। उचित अनुपात में सभी पार्टियों को प्रतिनिधत्व मिलना चाहिए।’ नीतीश से पहले जेडीयू के ही सीनियर नेता के. सी. त्यागी ने भी मंत्रिमंडल में शामिल नहीं होने पर बयान दिया। एक चैनल से बातचीत में त्यागी ने कहा, ‘ज्यादा मंत्री पद पर अड़ने की बात गलत है। जेडीयू की तरफ से किसी का भी नाम नहीं दिया गया था। केवल नाम मात्र के लिए ही सांकेतिक प्रतनिधित्व मंजूर नहीं है। भाजपा से कोई नाराजगी नहीं है, हम उनके साथ बने रहेंगे।’

बता दें कि बिहार की 40 लोकसभा सीटों पर एनडीए ने शानदार प्रदर्शन किया है। 40 में से 1 कांग्रेस को छोड़कर बाकी सभी 39 सीटें एनडीए के खाते में गईं। जेडीयू ने 16 और बीजेपी ने 17 सीटें जीती हैं। वहीं 6 सीटें जीतने वाली एलजेपी को रामविलास पासवान के रूप में एक मंत्री पद मिला है। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके मंत्रिपरिषद के सदस्यों के शपथ ग्रहण के बाद कांग्रेस ने शुक्रवार को कहा कि वह देश के विकास के लिए सरकार के साथ मिलकर काम करने की इच्छुक है। कांग्रेस ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी नई कैबिनेट के मंत्रियों को बधाई। हम उन्हें शुभकामनाएं देते हैं और भारत और उसके नागरिकों की प्रगति और विकास के लिए साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार हैं। यानी की राहुल गाँधी की स्पोर्टिंग स्पिरिट अभी भी बरकरार है। गौरतलब है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा है। लगातार दूसरी बार ऐसा हुआ है जब कांग्रेस को नेता प्रतिपक्ष बनने के लिए जरूरी 55 सीटें तक नहीं मिल पाई हैं। इस लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को सिर्फ 52 सीटें मिली हैं। दूसरी तरफ भाजपा को जनता ने 303 सीटों देकर बड़ी जीत दिलाई है। 2014 के चुनाव में कांग्रेस को केवल 44 लोकसभा सीटों से संतोष करना पड़ा था।

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