संपादकीय

कुलदीप का इस्तीफा और तंवर का दांव “हुड्डा” पर लगाएगा “बिग ब्रेक”

संपादकीय : महेश मेहता

अब तक लोग दबे जुबान में कहते थे, मगर अब खुले तौर पर कहने लगे हैं कि इतना दबाव बनाने वाले भूपेंद्र हुड्डा की अगर हाईकमान ने नहीं सुनी तो वह पार्टी को छोड़ अपने समर्थकों के साथ अलग पार्टी का गठन करेंगे अन्यथा भाजपा से हाथ मिला लेंगे। मगर हुड्डा को अब भी उम्मीद है कि अशोक तंवर को हटाने की वह जितनी कोशिश कर रहे हैं उसमें वह जरूर कामयाब होंगे। मगर अब तो अशोक तंवर ने ऐसी बात कह दी जिसने इस बात के साफ संकेत दे दिए हैं कि हुड्डा का जादू खत्म और उनके दबाव के आगे पार्टी हाई कमान झुकने को बिल्कुल तैयार नहीं है।

अब तक आप लोग कहते थे कि विधानसभा चुनाव सर पर है और कांग्रेस अब तक आपस में उलझी हुयी है, ऐसे में वह विधासनसभा चुनाव में क्या आगे आएगी और क्या भाजपा से मुकाबला करेगी। मगर अब अशोक तंवर ने वाकई विधानसभा चुनाव की तैयारियां करना शुरू कर दिया है। उन्होंने हुड्डा के नेतृत्व वाली समन्वय समिति की तर्ज पर नई कमेटी बनाकर हुड्डा को सीधा ललकारा है। आखिर अशोक तंवर को इतना मनोबल मिल कहां से रहा है? क्या वो वाकई अध्यक्ष पद से नहीं हटने वाले? परिस्थितियां देखकर लगता तो यही है। क्योंकि अशोक तंवर ने पत्रकारों का जवाब देते हुए एक ऐसा बयान दिया जिससे हुड्डा समर्थक हाईकमान से नाराज और आगे की रणनीति बनाने में जुट गए हैं।

दरअसल अशोक तंवर ने कहा कि अगर मैं अध्यक्ष के नाते आपके (पत्रकारों) सामने बैठा हूं तो इसका मतलब साफ है कि हाईकमान ऐसा ही चाहता है। हाईकमान के निर्देश पर हमने विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू की है।” बस होना क्या था यह बयान जब से सामने आया है हुड्डा समर्थक निराश और हताश हैं। इस बीच यह चर्चा भी चली थी कि हुड्डा के दबाव के सामने हाई कमान मस्तक टेक उन्हें ही प्रदेशाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंप सकता है, मगर हुड्डा के इन मंसूबो पर ब्रेक लगाने के लिए न केवल अशोक तंवर बल्कि खुद कुलदीप बिश्नोई ने हाई कमान के सामने अपने इस्तीफे की पेशकश पहले ही कर दी थी। उन्होंने यह तो दिखा दिया कि वह पार्टी के प्रति कितने निष्ठावान हैं। जबकि जो उम्मीद हुड्डा से पार्टी हाईकमान कर रहा था हुड्डा ने उन उम्मीदों पर पानी फेर दिया और पार्टी से खुद को प्रदेशाध्यक्ष बनाने का दबाव बनाना शुरू कर दिया।

जो बात पार्टी हाईकमान को अनुचित लग रही है। मगर हुड्डा हैं जो समझने को तैयार नहीं। वह अपने दम-खम को दिखाने में कोई को कसर नही छोड़ रहे हैं। हालात आज यह हैं कि हुड्डा न घर के राह गए हैं ना घाट के। वहीं अशोक तंवर ने तो हुड्डा की परवाह किये बगैर विधानसभा चुनावों की तैयारियों में जुट गए हैं। उन्होंने हुड्डा की तर्ज पर अलग से चुनाव समन्वय समिति का गठन कर दिया है।

जिसके बाद माना जा रहा है कि इस फैंसले से हुड्डा और हुड्डा समर्थक बौखलाए हुए हैं। इतना ही नहीं अशोक तंवर ने अपनी ताकत दिखते हुए सभी वरिष्ठ कोंग्रेसी नेताओं को दरकिनार करते हुए कांग्रेस में अपनी समस्त भारतीय पार्टी का विलय करने वाले सुदेश अग्रवाल को इस कमेटी का संयोजक बनाया है। ऐसा ही रहा तो हुड्डा हाथ मलते रह जायेंगे, वहीं तंवर और कुलदीप बिश्नोई अपने कदम से हुड्डा की मनमानी और दबाव को रोकने में कामयाब हो सकते हैं। क्योंकि कुलदीप अभी किसी भी प्रकार के विवादों में सामने नहीं आये हैं और उनके सबसे अच्छे सम्बन्ध हैं। मगर उनका खुद का भी एक अच्छा खासा दबदबा है इसलिए उन्हें पता है कि एक बार हुड्डा को ब्रेक लगा या वो पार्टी छोड़ते हैं तो कुलदीप और अशोक तंवर का रास्ता साफ हो जायेगा।

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