टुडे न्यूज़संपादकीय

कुलदीप+हुड्डा+शैलजा= “पहले रिपोर्ट, फिर वोट”

संपादकीय महेश मेहता

हिसार टुडे

बड़े दिनों बाद मानों देखने को मिल रहा है कांग्रेस की एकजुटता। एक तरफ कांग्रेस पार्टी प्रदेशाध्यक्ष कुमारी शैलजा थी, दूसरी तरफ हरियाणा में 2 बार मुख्यमंत्री रहे जाट नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा थे, कैप्टन अजय जादव थे और नॉन जाट नेता व कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद के दावेदार कुलदीप बिश्नोई। एक साथ इन कांग्रेस के दिग्गजों को देखकर इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस बार कांग्रेस विधानसभा चुनाव के लिए कितनी गंभीर है। इस बार कांग्रेस पूरे होमवर्क के साथ जमीन पर भारतीय जनता पार्टी की मनोहर लाल खट्टर और उनकी पूरी टीम से सीधी टक्कर लेने के मूड में है।

इस होमवर्क का नजारा तब देखने को मिला जब मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के 5 साल के वादों को झूठा करार देते हुए भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने अपने कार्यकाल के विकास कार्य को गिनाना शुरू कर दिया। इस बार कांग्रेस ने प्रदेश की माली स्थिती को देखते हुए चुन-चुन कर भाजपा के खिलाफ मुद्दे उठाये हैं। मुद्दा ऐसा कि भाजपा की वहां बोलती बंद हो जाए। जी हां कांग्रेस “पहले रिपोर्ट और फिर वोट” अभियान की शुरुवात करते हुए भाजपा के सर में दर्द लाने का काम कर सकती है।

खुद कांग्रेस पार्टी प्रदेशाध्यक्ष कुमारी शैलजा ने इस अभियान की शुरुवात के साथ अपने सोशल मीडिया अकाउंट में लिखा है कि “किसानों से हुए छल का…. युवाओं के भविष्य के साथ हुए खिलवाड़ का….. निरंतर बढ़ते अपराधों और जनता से किए झूठे वादों का….. लेंगे हिसाब। “पहले रिपोर्ट, फिर वोट” अभियान से करेंगे कुशासन पर चोट और मांगेंगे जवाब। इस वक्तत्व से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि कांग्रेस कितनी तैयार है।

लोकसभा में पीएम नरेंद्र मोदी और वर्तमान गृह मंत्री जब-जब आए उन्होंने पुलवामा हमले का जिक्र किया। जाहिर है इन बातों के साथ जनता भी देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत होकर भाजपा के कमल को अपना वोट दे बैठी। मगर अब जैसे ही विधानसभा का चुनाव नजदीक आया हरियाणा में पुलवामा के बाद अब जिक्र होने लगा आर्टिकल 370 का। इस मुद्दे को भी कई बार सार्वजनिक सभाओं में भाजपा ने भुनाने की कोशिश की। शायद उन्हें लगा हो कि इसका असर हरियाणा में हो। मगर इस बखान में जिस प्रकार से कुछ नेताओ ने कश्मीर में प्लॉट खरीदने और खुद मुख्यमंत्री द्वारा मजाकिया लहजे में बोली गयी बात वायरल हो जाने के बाद इस मुद्दे को कांग्रेस ने उठा लिया। जब कांग्रेस अपने अभियान की शुरुवात कर रही थी तब उन्होंने मुख्यमंत्री द्वारा आर्टिकल 370 को लेकर बात करते हुए महिलाओं पर की गयी टिपण्णी को अभद्र बताया। यह बात करके उन्होंने जिस 370 में क्रेडिट लेने की कोशिश करेंगे उन श्रेय की गुंजाइशों को कांग्रेस ने पहले ही ब्रेक लगाने का काम किया। इतना ही नहीं मुख्यमंत्री के गला काट देने वाले बयान को भी कांग्रेस ने जानकर तूल देने की कोशिश की। मंच पर बैठे कांग्रेस के दिग्गज अलग-अलग शैली में भाजपा को अलग-अलग मुद्दों पर घेरने की कोशिश कर रहे थे।

यही कारण है कि कांग्रेस का यह होमवर्क शायद भाजपा को आगामी विधानसभा चुनाव में भारी पड़े। हुड्डा ने जहां भाजपा को इवेंट मैनेजर करार दिया साथ ही सभी कांग्रेस दिग्गजों ने भाजपा को किसानों के मुद्दे, रोजगार के मुद्दे, घोटाले जैसे विभिन्न मुद्दे पर घेरने की कोशिश की। यही कारण है कि भाजपा अब टेंशन में भर गयी है।

सिर्फ अशोक तंवर और किरण चौधरी को छोड़ दिया जाए तो कांग्रेस के सभी नेता एकजुट नजर आये। बता दें कि कांग्रेस जहां पूरी रणनीति के तहत भाजपा को घेरने की कोशिश कर रही है तो दूसरी तरफ परिवारवाद का दृश्य न दिखे इसलिए दीपेंद्र सिंह हुड्डा इनदिनों कभी भी भूपेंद्र सिंह हुड्डा के साथ नजर नहीं आते जो इस बात का संकेत है कि परिवारवाद के मुद्दे को भी कांग्रेस इस विधानसभा चुनाव में जन्म लेने नहीं देगी। खैर इनदोनों भाजपा के नेता खुद हावी होते परिवारवाद के बलि चढ़ रहे हैं। उनके नेता नाराज चल रहे हैं। मनोहर लाल खट्टर को अधिक ताकती और मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाया गया है। यही कारण है कि इस बार भाजपा के लिए कुलदीप+हुड्डा+शैलजा = कठिन दिन आने वाले हैं?

Tags
Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Close