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हुड्डा की “महापरिवर्तन रैली” किसी फिल्मी ड्रामे से कम नहीं

संपादकीय:महेश मेहता

हिसार टुडे

बस अब महज एक दिन ही शेष बचा है यह जानने के लिए कि आखिर 18 अगस्त को हुड्डा ऐसा क्या करने वाले है जिससे प्रदेश की हवा ही बदल जाए। हुड्डा की इस परिवर्तन रैली किसी सस्पेंस और ड्रामा से कम नहीं है। जितने लोग उतनी किसम की बातें। कोई कहता है कि हुड्डा अलग पार्टी बनाएंगे, कोई कहता है पार्टी नहीं छोड़ेंगे। हिसार में जब हुड्डा आये तो वह भी इशारों ही इशारों में बात करते चलते बने। यानी जिनको समझाना है समझ जाए, नहीं समझे तो कोई बात नहीं।

एक फिल्म से कम रोमांचक नहीं है हुड्डा जी की परिवर्तन रैली की यह फिल्म। मगर लगता है उनके अपने ही नेता इस फिल्म के सस्पेंस पर से ही पर्दा हटाने में लगे है। हाल में कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता एवं पूर्व मंत्री कृष्णमूर्ति हुड्डा व पूर्व विधायक एडवोकेट संत कुमार ने दावा किया है कि 18 अगस्त को भाजपा को कड़ी चुनौती देने के लिए भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व में नया विकल्प उभरकर सामने आ सकता है। दोनों नेताओं ने कहा कि 18 अगस्त को हुड्डा नया विकल्प लेकर जनता के बीच जाएंगे।

हद्द तो तब हो गयी और सस्पेंस तब और गरमा गया जब उन लोगों ने कहा कि हो सकता है कि आज उनकी कांग्रेस भवन में आखिरी प्रेस कॉन्फ्रेंस हो। वैसे यह बात सभी को ज्ञात है कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा 18 तारीख को जो रैली करने जा रहे है, मगर उनके खेमे में कुछ कार्यकर्ता और नेता कह रहे हैं कि हुड्डा को नई पार्टी बनाने की बजाय कांग्रेस में ही रहकर भाजपा से दो-दो हाथ करना चाहिए। लेकिन हाईकमान जिस तरह से हरियाणा को लेकर मुंह फेर कर बैठा है, प्रदेश के नेतृत्व को लेकर कोई फैसला नहीं ले रहा, उससे हुड्डा के गरम मिजाज समर्थक गुस्से में हैं। हुड्डा समर्थक चाहते हैं कि चुनावी रण में उतरने से पहले हाईकमान हरियाणा के बारे में स्पष्ट फैसला ले।

वैसे रोहतक की 18 अगस्त की महा परिवर्तन रैली के लिए भूपेंद्र हुड्डा और उनके बेटे दीपेंद्र हुड्डा पूरे जी-जान से उसे सफल बनाने में जुटे हुए हैं। इस रैली में 2014 में हुई गोहाना रैली से डबल भीड़ जुटाने का उन्होंने लक्ष्य भी रखा है। हुड्डा समर्थक विधायकों ने भी अपने-अपने क्षेत्रों में रैली के लिए तैयारियां तेज कर रखी हैं। सोनिया गांधी के अंतरिम अध्यक्ष बनने के बावजूद हरियाणा के मामले में हाईकमान का रवैया ढुलमुल रहा तो पार्टी के विधायक ही हुड्डा पर अलग पार्टी बनाने का दबाव बढ़ा सकते हैं। दीपेंद्र सिंह हुड्डा के समर्थकों की भी यही राय है, लेकिन राजनीति के धुरंधर खिलाड़ी भूपेंद्र हुड्डा किसी भावना में बहकर नहीं बल्कि भविष्यगामी सोच को देखते हुए अपने विधायकों व खास समर्थकों के साथ मंथन कर किसी नतीजे पर पहुंचना चाहते हैं।

वैसे हुड्डा समर्थकों की लड़ाई न केवल प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर है, बल्कि टिकट बांटने की पावर भी हुड्डा को दिए जाने को लेकर भी है। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हुड्डा की महापरिवर्तन रैली पर कांग्रेस हाईकमान के साथ-साथ सत्तारूढ़ भाजपा, इनेलो, जजपा, बसपा और आम आदमी पार्टी की भी निगाह टिकी हुई है। हालांकि एक खबर ने इस रैली को रोचक मोड़ में ला खड़ा किया है।
अपनी रोहतक रैली को लेकर वरिष्ठ कांग्रेस नेता व पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी नेता शरद पंवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के नेताओं से मुलाकात कर रैली की तैयारियों पर चर्चा की है। इस मुलाकात के मायने काफी निकाले जा रहे है। कोई कहता है कि क्या हुड्डा महाराष्ट्र की तर्ज पर हरियाणा में एनसीपी के साथ गठबंधन कर चुनाव में उतरना चाहते है या इन नेताओं के सहारे वह केंद्र में दबाव बनाना चाहते हैं यह तो आने वाला समय ही बताएगा।

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