संपादकीय

Hisar Today| बिन चेहरे की कांग्रेस, क्या दिखा पाएगी अपना चेहरा?

Archana Tripathi, Hisar Today 

हरियाणा में कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष पद को लेकर चल रहे घमासान के बाद अब भविष्य में यदि हरियाणा में कांग्रेस की सरकार आती है तो कौन होगा कांग्रेस का भावी मुख्यमंत्री ? यह सवाल आज सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। अपनी ताकत दूसरे नेताओ से अधिक जताने की होड़ में, आज कांग्रेस के ही नेताओ में ‘रस्सा कशी’ का दौर शुरू हो चूका है। कांग्रेस के कई दिग्गज खुद को मुख्यमंत्री पद का प्रबल दावेदार मानते हैं और इसे लेकर कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी के दरबार में अपनी-अपनी लॉबिंग करने में जुट गए हैं। हरियाणा के दो बार मुख्यमंत्री पद पर रह चुके भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने यह कहकर एक नयी बहस को जन्म दे दिया है की “चुनाव जीतने के बाद जिस नेता पर कांग्रेसी विधायकों का ‘आशीर्वाद’ रहेगा, वहीं सूबे का मुख्यमंत्री बनेगा।” भूपेंद्र हुड्डा के इस बयान के बाद कांग्रेस के खेमे में एक गर्मा गरम बहस और सियासी मायने निकाले जा रहे है। हुड्डा के इस बयान से इशारा साफ है कि प्रदेश में जिस कांग्रेसी दिग्गज के खेमे में सबसे ज्यादा विधायक जीत कर
आएंगे, उसकी प्रदेश में मुख्यमंत्री पद के लिए दावेदारी सबसे ज्यादा मजबूत होगी।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने यहाँ तक कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पूरी तरह स्वीप करेगी और चुनाव जीतने के बाद कौन कांग्रेसी मुख्यमंत्री बनेगा, इसका अंतिम फैसला सभी ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी पर छोड़ दिया है। लेकिन हाईकमान भी उसे ही मुख्यमंत्री बनाता है, जिसे विधायक चाहते हैं। मुख्यमंत्री के बारे में विधायकों की राय ली जाती है। हुड्डा ने कहा कि जब “मैं 2005 में मुख्यमंत्री बना था, तो उस समय मैं सिर्फ सांसद था, प्रदेश के विधायकों
से जब पर्यवेक्षकों ने अलग-अलग राय पूछी तो उन्होंने मेरे नाम पर मुहर लगाई। विधायकों का रुझान देखने के बाद ही हाईकमान ने सभी दावेदारों में से मुझे सीएम पद के लिए आशीर्वाद दिया और सीएम बनने के बाद मैंने भी दस साल प्रदेश के विकास के लिए जीतोड़ मेहनत की और हाईकमान की उम्मीदों पर खरा उतरा” ।

वैसे हुड्डा के राह में “रोड ब्रेकर” की कमी नहीं। हुड्डा के मंसूबो पर पानी फेकने के लिए रणदीप सिंह सुरजेवाला, डा. अशोक तंवर ,कुमारी सैलजा, कुलदीप बिश्नोई, किरण चौधरी ने अपनी कमर कस ली है और पार्टी हाईकमान में अपनी-अपनी लॉबिंग करने में अभी से जुट गए हैं। डा. अशोक तंवर जहां साइकिल यात्रा से अपनी मौजूदगी जाहिर कर रहे हैं, वहीं रणदीप सुरजेवाला प्रदेश के विभिन्न इलाकों में “वीकेंड रैलिया” कर अपना शक्ति प्रदर्श न कर रहे हैं। कुमारी सैलजा व किरण चौधरी
ने भी कभी कभार रैलिया और बैठके कर लगातार अपनी मौजूदगी और सक्रिय ता दि खा रही है। वहीं कांग्रेस में दुबारा कमबैक करने वाले कुलदीप बिश्नोई भी अपनी सियासी मैदानी पिच दुबारा तैयार कर रहे हैं।

वैसे तो एक और वरिष्ठ कांग्रेसी एवं पूर्व मंत्री कैप्टन अजय यादव भी सीएम के दावेदार माने जाते हैं, लेकिन अभी फिलहाल वे लोकसभा का चुनाव लड़ने के मूड में है और अपनी सीट के लिए हाईकमान में माहौल तैयार कर रहे है। कांग्रेस का हाल प्रदेश में ऐसा हो गया है की टीम तो तैयार है मगर उसके कप्तान  अनेक है… यह हाल राहुल गांधी दिल्ली में बैठे देख रहे है। राहुल गाँधी को खबर है की अगर उन्होंने भाजपा की तरह पहले ही मुख्यमंत्री के नाम की चर्चा पर मुहर लगा दी तो कांग्रेस में भारी टूट – फुट का सामना उन्हें करना पड़ सकता है। जिसकी भरपाई करना खुद कांग्रेस पार्टी आलाकमान के लिए कठिन हो जायेगा। ऐसे में राहुल गाँधी ने एक नया दांव चलते हुए मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा न करते हुए तमाम नेताओ को अपनी लोकप्रियता साबित करने का मौका दिया है।

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