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कांग्रेस को फिर तंग करेगा “EVM का भूत”

संपादकीय : महेश मेहता

हिसार टुडे

मेयर चुनाव हो या लोकसभा चुनाव हर बार कांग्रेस की तरफ से यही बात निकल कर बाहर आती है कि भाजपा ने ईवीएम के साथ छेड़छाड़ की, ईवीएम में गड़बड़ियां करवाई गयी। याद है जींद उपचुनाव जब कांग्रेस के दिग्गज नेता रणदीप सुरजेवाला को हार का सामना काना पड़ा था। उनके हारते ही कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर कहने लगे कि ईवीएम में भाजपा वालो ने गड़बड़ियां की। याद है लोकसभा चुनाव जब कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर भारतीय जनता पार्टी की प्रत्याशी सुनीता दुग्गल के समक्ष चुनाव में खड़े थे। तब उस समय भी बेहद हंगामा हुआ था जब एक ईवीएम से भरी ट्रक का मुद्दा उठाते हुए कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने यह आरोप लगाया था कि भाजपा के इशारे में ईवीएम बदलने के लिए लाया गया था। अब दुबारा लगता है कि ईवीएम का भूत कांग्रेस को तंग करने वाला है।
क्योंकि हाल में हरियाणा प्रदेेेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. अशोक तंवर ने निर्वाचन आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि चुनाव से पहले निर्वाचन विभाग गुपचुप तरीके से ईवीएम की मरम्मत करवा रहा है। उन्होंने तो सीधा सरकार को कटघरे में लेते हुए साफ कर दिया कि “दाल में काला है।”

खैर यह मुद्दा उठाना लाजमी था क्योंकि अब चुनाव विधानसभा का है। 90 सीटों के साथ प्रदेशाध्यक्ष का पद भी दाव पर लगा है। अब की जो कांग्रेस की स्थिती है उसे देखकर यह कहना गलत नहीं है कि उन्हें पिछले के मुकाबले आधी सीटें भी नहीं आये। ऐसे में अब ईवीएम के मुद्दे पर ही राजनीति का सहारा लग रहा है। सवाल यह उठ खड़ा होता है कि अगर अशोक तंवर को ईवीएम पर कुछ सवाल है तो वो इसको लेकर तीव्र आंदोलन क्यों नहीं छेड़ रहे। अशोक तंवर कुलदीप बिश्नोई के ऊपर हुयी आयकर विभाग की कार्यवाई के लिए आ सकते है तो क्या वो जिस गंभीर ईवीएम के मुद्दे पर सवाल उठा रहे है उस पर आवाज नहीं उठा सकते। वो खुद प्रदेशाध्यक्ष है। मगर मुझे मालूम है वो सिर्फ बयानबाजी करेंगे ऐसा आंदोलन नहीं। क्योंकि आज प्रदेश में भाजपा की जो स्थिती है उसे देखकर कोई भी यह विश्वास के साथ कहेगा कि मिशन 75 भाजपा के लिए पूरा करना कोई ख़ास मुश्किल नहीं।

वैसे तंवर के लिए यह कहना गलत नहीं होगा कि वो आजकल अधिकतर कोंग्रेसी कार्यकर्ताओं और नेताओं के लिए सरदर्द बन चुके हैं। कांग्रेस नेता सुभाष बत्रा ने जहां अशोक तंवर को बदलने की सिफारिश करते हुए कहा कि राहुल गाँधी ने इस्तीफा दे दिया था मगर अशोक तंवर ने नहीं दिया जो दुर्भाग्यपूर्ण है। इतना ही नहीं हुड्डा गुट अशोक तंवर के पीछे हाथ धो कर कितना पड़ा है इसकी हकीकत तो किसी से छुपी नहीं तो वही बची कुछ कसर जयतीर्थ दहिया ने निकाल दी। उन्होंने तो साफ कह दिया कि अशोक तंवर ने उन्हें गाली दी और उसपर कोई एक्शन नहीं हुआ इसलिए वह पार्टी छोड़ रहे है। वैसे उनका यह जवाब शायद ही किसी को हजम हो। अशोक तंवर अगर पार्टी को मजबूत करना चाहते है तो उन्हें चुपचाप बैठकर तो नहीं चलेगा।

सभा हुयी, सभा में चले जाने और भाषण देने से बात नहीं बनेगी बल्कि उन्हें गंभीर मुद्दे पर उग्र होना चाहिए। जिस प्रकार विधानसभा चुनाव के नजदीक आते ही वह ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहे है, मगर उस मुद्दे को लेकर वह प्रखर नहीं। इसका अर्थ है कि अशोक तंवर इस मुद्दे को बयानबाजी के जरिये भुनाना तो चाहते है मगर चुनाव आयोग से भिड़ना नहीं। अशोक तंवर को पता भी है कि कांग्रेस किस दौर से होकर गुजर रही है। ऐसे में जानकारों को लगता है कि कांग्रेस द्वारा ईवीएम पर सवाल उठाकर वह विधानसभा चुनाव के नतीजों को लेकर अपनी तरफ से खानापूर्ति करने के फिराक में है। अगर हार गए तो ईवीएम है न। ईवीएम का जिन्न जब तक जिन्दा है पार्टी की कमजोर स्थिति को लेकर उनसे वैसे भी कोई सवाल नहीं कर पायेगा। वैसे भाजपा भी जानती है कि चुनाव नजदीक आते ही यह सब जिन्न बहार निकलने लगते है। क्योंकि सामने विपक्ष को अपनी हार जो नजर आती है।

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