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हुड्डा को धोबी पछाड़ कर दुष्यंत की लोकप्रियता से बदलेंगे चुनावी गणित

संपादकीय महेश मेहता

 हिसार टुडे

भाई सुना था हुड्डा का दम है और कांग्रेस मजबूत विपक्ष है। मगर आज के हालात को देखें तो हरियाणा कांग्रेस कितना भी जीत का दवा करे, मगर अशोक तंवर ने जितना कांग्रेस को डैमेज किया है शायद कांग्रेस हाई कमान को उसके आफ्टर एफेक्ट का नजारा नहीं दिखाई दे रहा। आज नौबत ऐसी आ गयी है कि जिस रणनीति के साथ जजपा ने चुनावी मैदान में ऐसे ऐसे नेताओं को टिकट थमाई उससे हो न हो कांग्रेस और भाजपा के पसीने जरूर छूटने वाले हैं। जो लोग कांग्रेस को हरियाणा का मजबूत विपक्ष के तौर पर पुकारा करते थे, अब उन लोगों के आँखों में दुष्यंत चौटाला द्वारा सरकार के खिलाफ मजबूती से खड़े होकर आवाज बुलंद करने के कारण आज हरियाणा में सबसे मजबूत विपक्ष के तौर पर जननायक जनता पार्टी का शुमार होता जा रहा है। एक तो 5 साल में अकेले अशोक तंवर पार्टी का काम करते रहे और बाकी दिग्गज नेता अपनी रोटियां सेकते रहे। जब से पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर ने कांग्रेस पार्टी के अंदर सीटों के बेचे जाने की घटना का जिस मुखरता के साथ पोल खोल कर अपना इस्तीफा दिया। उससे कांग्रेस जिस हाशिए में आने के साथ बदनाम हुयी उससे जो जाट मतदाता उनके साथ थे वो भी कांग्रेस के इस तमाशे से खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।

तंवर के इस्तीफे के साथ कांग्रेस में इस्तीफे के बौछार सी आ गयी। इस सूची में शामिल है महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सुमित्रा चौहान, पूर्व सांसद कैलाशो सैनी, पूर्व सांसद ईश्वर सिंह, महेंद्रगढ़ से पूर्व विधायक राधेश्याम शर्मा, सोनीपत से पूर्व विधायक अनिल ठक्कर, फरीदाबाद से पूर्व मंत्री एसी चौधरी, रतिया से पूर्व मंत्री रामस्वरूप रामा, गुहला से पूर्व विधायक फूल सिंह खेड़ी, सिरसा से वरिष्ठ कांग्रेसी भूपेश मेहता, बादली से पूर्व विधायक नरेश शर्मा, नारनौंद पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी राजबीर संधू, जगाधरी से पूर्व मंत्री सुभाष चौधरी, नलवा से पूर्व मंत्री संपत सिंह, नारनौंद से पूर्व विधायक रामभगत शर्मा, बरवाला से पूर्व विधायक रामनिवास घोड़ेला, उकलाना से पूर्व विधायक नरेश सेलवाल, बाढ़डा से कांग्रेस नेता महा सिंह श्योराण, बाढ़डा से किसान कांग्रेस नेता राजू मान, पुन्हाना से पूर्व प्रत्याशी सुभान खां, रानियां से पूर्व मंत्री रणजीत चौटाला, बाढ़डा से पूर्व सीएपीएस रण सिंह मान, पूर्व विधायक कर्नल रघबीर सिंह छिल्लर, जींद से पूर्व मंत्री मांगे राम गुप्ता, टोहाना से देवेंद्र बबली, अंबाला कैंट से पूर्व मंत्री निर्मल सिंह, अंबाला कैंट से पूर्व निगम पार्षद चित्रा सरवारा, अंबाला सिटी से पूर्व प्रत्याशी हिम्मत सिंह, बल्लभगढ़ से पूर्व विधायक शारदा राठौर, दादरी से पूर्व मंत्री सतपाल सांगवान, भिवानी से नीलम अग्रवाल, फतेहाबाद से पूर्व विधायक दूड़ा राम, सफीदों से कांग्रेस नेता कर्मवीर सैनी, लाडवा से पूर्व विधायक रमेश गुप्ता प्रमुख है। इनके साथ ही लाखों समर्थक जो इन नेताओं से जुड़े थे उन्होंने भी कांग्रेस को अलविदा कह दिया। यानी टिकट बटवारे और अशोक तंवर के आरोपों के बाद कांग्रेस बहुत बुरी तरह डैमेज हो चुकी है।

यही कारण है कि आज जो जाट मतदाता कांग्रेस नेता हुड्डा के मूल वोटबैंक माने जाते थे, उन मतदाताओं को दुष्यंत चौटाला की मेहनत और पार्टी के कार्यशैली से कुछ उम्मीद जरूर जगी है। यह मतदाता अब धीरे-धीरे हुड्डा और इनेलो का साथ छोड़ अब जजपा की तरफ खिसकने लगे हैं। अपनी सिंपल और साफ सुथरा छवि के कारण दुष्यंत लोगों को और जजपा से जड़ने में कामयाब रहे हैं। दुष्यंत ने जिस प्रकार काफी दिग्गजों को टिकट देकर भाजपा के साथ कांग्रेस के पसीने छुड़ा दिए उससे यह पार्टी उभरने का नाम ही नहीं ले रही। अब इससे ज्यादा हैरानी की क्या बात हो जब कैबिनेट मंत्री सरीखे जैसे भाजपा नेता में दुष्यंत के प्रति बौखलाहट इतनी है कि वो उन्हें बन्दर कहने लगे हैं। एक मंत्री को ऐसा वक्तत्व तो शोभा नहीं देता ऊपर से एक और भाजपा नेता द्वारा बालसमंद गांव में जाकर लोगों को जबरन भारत माता की जय कहने के लिए मजबूर करने और ऐसा न करने पर लोगों को पाकिस्तानी कहने वाले नेताओं की खीज इस बात का संकेत दे रही है कि इस बार सभी के पाँव के नीचे की जमीन खिसक रही है। हैरत की बात यह है कि हुड्डा की बदनामी इतनी हो चुकी है कि पहले पार्टी से अलग होने के संकेत देने और पार्टी में शामिल होने को लेकर अब मतदाता भी समझ रहे हैं कि उनका कैसा तमाशा बनाया जा रहा है। पार्टी हाई कमान पर दबाव बनाने का समय आया तो जनता के विश्वास के साथ खिलवाड़ करना।
मगर इस बार की परिस्थिती को देखकर प्रतीत हो रहा है कि न जाट मतदाताओं के भरोसे बैठे हुड्डा को शायद इस बार अपने ही विधानसभा क्षेत्र में निराशा का सामना करना पड़े। विभिन्न हलकों में जननायक जनता पार्टी की तरफ झुकते वोटों को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि इस चुनाव के नतीजों के साथ दुष्यंत अपनी पार्टी की ताकत दिखाने में कामयाब होंगे और इस चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिती पैदा करके सत्ता बनाने में अहम भूमिका अदा करेंगे।

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