संपादकीय

ईवीएम पर बयान देकर दुष्यंत ने एक साथ किये कई शिकार

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ईवीएम यह नाम लेते ही संदेह उत्पन होने लगता है उन विपक्ष को जो अपनी हार का सारा ठीकरा ईवीएम पर फोड़ने में लगे हैं। कुछ विपक्ष के आईटी सेल में तो बाकायदा ईवीएम के खिलाफ हाहाकार चल रहा है। हर दिन आईटीसेल में ईवीएम के बारे में चर्चा न हो तो मानो उनका दिन ही सुकुन से नहीं गुजरता। इसमें प्रमुखता से कांग्रेस और आम आदमी पार्टी का नाम आता है। खुद अरविन्द केजरीवाल ने ईवीएम के जरिये भाजपा की तरफ वोट ट्रांसफर होने का आरोप लगाकर सवाल खड़े कर दिए थे। कई बार अरविन्द ट्वीट करके ईवीएम की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठा चुके हैं। मगर ठीक इसके उलट हाल में ईवीएम की विश्वसनीयता के सवाल पर जननायक जनता पार्टी नेता दुष्यंत चौटाला की राय अपनी सहयोगी दल आम आदमी पार्टी से बेहद अलग है।

दुष्यंत चौटाला ने तो ईवीएम पर सवाल उठाने वालो को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि ईवीएम पर सवाल उठाकर नेता जनमत का अपमान कर रहे हैं। दरअसल दुष्यंत चौटाला ने वही भूमिका अख्तियार की है जो भूमिका भाजपा की है यानी उन्होंने ईवीएम को सही करार देकर एक तरफ तो एक शिक्षित और जिम्मेदार नेता का परिचय दिया है, वहीं उनकी इस भूमिका ने यह साबित कर दिया है कि जननायक जनता पार्टी और आम आदमी पार्टी के बीच के विचार कोई खास मेल नहीं खाते। जननायक जनता पार्टी के नेता दुष्यंत चाैटाला ने कहा है कि लोकसभा चुनाव के बाद ईवीएम पर सवाल उठाना जनमत का अपमान है। ऐसा वक्तव्य देकर उन्होंने भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर जोरदार निशाना साधा है।

लेकिन आपने सोचा है कि हुड्डा पर दुष्यंत का अचानक प्रहार किस बात के संकेत दे रहा है? उसे समझने के लिए पहले आपको वो वक्तव्य याद करने होंगे जो इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला ने हाल में पैरोल से बाहर निकलने के बाद हुड्डा के बेटे दीपेंद्र सिंह हुड्डा की तारीफ में एक वक्तव्य क्या दिया, सामने से कांग्रेस नेता भूपेंद्र हुड्डा ने ये कहा दिया कि उनका बेटा – मेरा बेटा और मेरा बेटा – उसका बेटा। हुड्डा की तरफ से इस बयान को लेकर भविष्यगामी राजनीति के विषय में चर्चा सहज गर्म हो गयी। सियासी गलियारों में यह चर्चा होने लगी कि क्या वाकई हुड्डा और चौटाला परिवार के बीच मतभेद खत्म हो गए? क्या इस विधानसभा में वह गठबंधन के साथ चुनाव में उतरेंगे?

यह तो महज सुर्खियां थी मगर इस बीच इस सुर्खियों पर पानी तब पड़ा जब दुष्यंत ने अपने दादा के उलट भूपेंद्र हुड्डा पर ईवीएम में गड़बड़ के आरोप पर निशाना साधते हुए कहा कि यह जनमत का अपमान है। यह जनता का फैसला है और इसे विनम्रता पूर्वक स्वीकार करना चाहिए। उनकी यह भूमिका एक प्रखर नेता के रूप में उभर कर सामने आ रही है। जहां एक तरफ दुष्यंत के दादा ओमप्रकाश चौटाला कांग्रेस का अप्रत्यक्ष समर्थन करते नजर आये तो ठीक दूसरी तरफ दुष्यंत चौटाला की भूमिका भाजपा के पक्ष में जाती दिखाई दी। क्योंकि दुष्यंत ने जो वक्तव्य दिया उससे यह तो साबित होता है कि कांग्रेस के पास कोई प्रधानमंत्री का चेहरा नहीं है और न ही कोई और पार्टी के पास कोई प्रधानमंत्री का सक्षम चेहरा है। दुष्यंत ने कहा लोकसभा चुनाव नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने को लेकर लड़ा गया और जनता ने मोदी को ही वोट दिए। देश में मोदी के अलावा कोई अन्य प्रधानमंत्री का चेहरा जनता के सामने नहीं था।

वैसे दुष्यंत चौटाला का जो कदम दिख रहा है वो इस बात की तरफ इशारा कर रहा है कि कांग्रेस के सहारे के बिना ही वह खुद का मुकाम बनाना चाहते हैं। मगर आम आदमी पार्टी के सहयोग के साथ। बता दें कि आप के नेता और दिल्ली के मुख्यमंत्री खुद ईवीएम में गड़बड़ी का आरोप लगाते रहे हैं। ऐसे में आने वाले समय में उनके यही राजनीतिक विचारधाराएं उनके सामने समस्या उत्पन कर सकते हैं। क्योंकि दुष्यंत से यह सवाल जरूर उठेगा कि कांग्रेस पर प्रहार के लिए उन्होंने ईवीएम के बारे में वक्तव्य दिया, मगर उनकी सहयोगी पार्टी जो कांग्रेस के पदचिन्हों पर चलते हुए ईवीएम को कोस रही है और तो और लोकसभा चुनाव में वह कांग्रेस के सामने गठबंधन करने के लिए गिड़गिड़ाती रही। उसने कहीं न कहीं दुष्यंत की जननायक जनता पार्टी के खिलाफ की विचारधारा को उजागर किया है और अगर यही हाल विधानसभा चुनाव में हुआ तो शायद दुष्यंत के सामने मुसीबत अधिक होगी। विचारधाराओं के मतभेद के कारण हो सकता है विधानसभा में आप के साथ रिश्तो में खटास आये और गठबंधन महज मजबूरी का गठबंधन न बनकर रह जाए।

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