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हरियाणा में स्वच्छ पानी की त्राहि-त्राहि मचने से पहले हो जाएं सचेत

संपादकीय : महेश मेहता

हिसार टुडे

संकट आपकी दहलीज तक पहुंच कर दस्तक दे रहा है। आज हरियाणा के 22 में से 19 जिलों के 81 ब्लॉक डार्कजोन में आ चुके हैं। सुना कुछ आपने ? समझ में आया क्या कुछ? नहीं….. समझ भी कैसे आएगा। चुनाव में एक दूसरे पर छींटाकशी करना बंद करो, मुद्दों की बात करो, वैसे उन नेताओं को सलाम करना चाहिए जो जानते हैं पानी का मोल को समझ रहे हैं और इसलिए वह इस पानी के संवर्धन के लिए कदम भी उठा रहे हैं। उनमें से एक है भाजपा की विधायक सुनीता दुग्गल।

चलिए बात करते हैं हरियाणा में जल संकट की। हरियाणा में जल का संकट लगातार गहराता जाता रहा है। अगर देश में जल का यही संकट बना रहा तो 2030 तक देश में पानी की मांग उपलब्धता के मुकाबले दोगुनी हो जाएगी। अभी देश में करीब 60 करोड़ लोग पानी की गंभीर किल्लत का सामना कर रहे हैं। करीब दो लाख लोग स्वच्छ पानी न मिलने के कारण हर साल जान गंवा देते हैं। और यह आंकड़े हमारे नहीं बल्कि सरकार के नीति आयोग द्वारा 16 जून 2018 को जारी रिपोर्ट में दी गयी है। रिपोर्ट में स्वतंत्र संस्थाओं की ओर से जुटाए गए डाटा में बताया गया है कि करीब 70 प्रतिशत प्रदूषित पानी के साथ भारत जल गुणवत्ता सूचकांक में 122 देशों में 120वें पायदान पर है।

रिपोर्ट इस बात की तरफ भी उल्लेख कर चुकी है कि झारखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार और हरियाणा जल प्रबंधन के मामले में सबसे खराब प्रदर्शन वाले राज्य रहे हैं। यहां भारत की लगभग आधी आबादी रहती है। केंद्रीय भू-जल प्राधिकरण ने भूजल सर्वेक्षण के अनुसार देश के 5,723 में से 839 ब्लॉकों ने भू-जल का आवश्यकता से अधिक दोहन कर लिया है।

इसलिए इन ब्लॉकों में अब और कुएं खोदने की अनुमति नहीं मिल सकती। दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, कर्नाटक और तमिलनाडु की स्थिति अत्यधिक गंभीर है। क्या यह जानकार आपको चिंता नहीं हो रही। याद है यह हमारा कृषि प्रधान राज्य है। हरियाणा में भू-जल का स्तर निरंतर गिर रहा है। इस बात का साबुत इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2018 में 13 जिलों में 36 ब्लॉक डार्क जोन बन गए थे, इस बार यह अकड़ा बढकर 2019 में 22 जिलों में से 19 जिलों के 81 ब्लॉक डार्कजोन तक पहुंच चुके है।

जब हरियाणा की बात करे तो भूजल का अत्यधिक दोहन अंबाला, करनाल, कुरुक्षेत्र, कैथल, हिसार, झज्जर, भिवानी, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, सिरसा, सोनीपत, पानीपत, जींद में डार्क जोन वाले ब्लाक हैं। पर्यावरण और नदियों के लिए काम कर रही संस्था आकृति के अध्यक्ष अनुज सैनी ने एक साक्षात्कार में बताया था कि हरियाणा में सबसे प्रमुख समस्या यह है कि हरियाणा में पानी को लेकर अभी कोई स्पष्ट नीति नहीं है।

सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाओं को एक दम से अपनाना होगा, लेकिन इस दिशा में कुछ नहीं हो रहा है। हालांकि सरकार 85 प्रतिशत सब्सिडी मुहैया करा रही है, लेकिन यह सब्सिडी किसानों तक पहुंच ही नहीं रही है। होना तो यह चाहिए कि सरकार सिंचाई के लिए सूक्ष्म सिंचाई विधि को लागू करने के लिए हर संभव कोशिश करे। इस मसले पर सीएम मनोहर लाल ने कुरुक्षेत्र के डेरा फतेह सिंह गुमथला गढु गांव में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत देश के पहले सूक्ष्म सिंचाई योजना के पॉयलट प्रोजेक्ट शुरू किया।

उन्होंने बताया कि यह मॉडल है, जिसे किसानों को दिखा कर इसे अपनाने पर जोर दिया जाएगा। हरियाणा में 76 प्रतिशत सिंचाई नलकूपों से होती है। राज्य के 19 जिलों में से 95,043.2 लाख घनमीटर पानी में से 70,816.3 घनमीटर पानी की निकासी कर ली गई है और अब सिर्फ 24,226.9 घनमीटर पानी बचा है।

अध्ययन के मुताबिक, 74 प्रतिशत भूमिगत जल की निकासी की जा चुकी है। भूमिगत जल की दृष्टि से भिवानी, हिसार और फतेहाबाद की स्थिति भी चिंताजनक है।रोहतक जिले के कुछ गांवों के साथ-साथ झज्जर व सोनीपत में भी पानी का संकट लगातार गहरा रहा है। सोनीपत में पानी की निकासी इसी प्रकार जारी रही तो वहां भी पानी का घोर संकट पैदा हो जाएगा। यहां के राई, मुंडलाना और गन्नौर ब्लॉक में भूमिगत जल की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है।

हरियाणा के लिए दिक्कत यह है कि यहां सिर्फ एक नदी यमुना है। इसके पानी में भी दिल्ली, यूपी, राजस्थान और पंजाब का हिस्सा है।
इधर बरसात भी कम हो रही है। वर्ष 1995 से 2000 के बीच छह वर्षों के बीच सिर्फ 12,356 मिलीमीटर औसत वर्षा हुई है। पंजाब और हरियाणा में एक नए अध्ययन से पता चला है कि भू-जल में गिरावट का संबंध फसल पद्धति से भी है।

चावल की फसल सबसे अधिक जिम्मेदार है। 1980-81 में दोनों राज्यों में चावल की खेती 18 प्रतिशत क्षेत्र में होती थी। अब चावल का रकबा 70 प्रतिशत हो गया है। ऐसे में अब जरुरी हो गया है कि सरकार ही नहीं आप और हम पानी की बर्बादी रोकने की दिशा में सक्रियता से काम करे।

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