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चौधरी बीरेंद्र सिंह असली बाकी नकली

संपादकीय: महेश मेहता

हिसार टुडे

चौधरी बीरेंद्र सिंह जब भी बोले विवाद मानो खींचे चला आता है। उनकी बेबाक बोली और वक्तव का हर कोई कायल होता है इससे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अक्सर ऐसा देखा गया है कि जहां चौधरी बीरेंद्र सिंह की सभा हो तो सभी कार्यकर्ता पहले पहुंच जाते है क्योंकि उनको पता है कि वो जहां रहेंगे, वो कोई मौका नहीं छोड़ेंगे किसी को इंटरटेन करने का। ऐसा तब भी हुआ जब उन्होंने दूसरी पार्टी से भाजपा में शामिल हुए पार्टी कार्यकर्ताओं को व्यंग्यात्मक तरीके से बात करते हुए नकली करार दे दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी में परमेंद्र और ये दूसरे आ रहे हैं ऐसा लग रहा है कि यह नकली हैं, असली तो हम हैं।

असली तो हम है वह क्या खूब कही बीरेंद्र सिंह ने। यानी कि कुछ भी हो पार्टी में वरिष्ठता का परिचय देते हुए बीरेंद्र ने दिखा दिया है कि वो ही पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं और आने वाले यह न सोचे कि उनकी पूछ ज्यादा और पुराने कार्यकर्ताओं और नेताओं की पूछ कम होगी। बता दे कि जब से विभिन्न दलों से भारतीय जनता पार्टी में आते जा रहे है तब से कार्यकर्ताओं में यह भय सता रहा है कि कल तक भाजपा को कोसने वाले नेता भाजपा में आकर अपने रुतबे का धौंस जमाएंगे और पार्टी कहीं उन पुराने कार्यकर्ताओं को छोड़कर दूसरे नेताओं को तबज्जो न दे दे। मगर इस सोच को बार-बार समय-समय पर पुराने कार्यकर्ता और नेता निकालने का प्रयास कर रहे है। वो हमेशा पुराने कार्यकर्ता की मेहनत को तबज्जो देकर पार्टी के अंदर भविष्य में होने वाले टकराव को दूर करने की योजना बना रहे है।

वैसे आपको तो पता है कि जैसे कोई अपना जन्मदिन मनाता है वैसे ही राजयसभा सांसद चौधरी बीरेंद्र सिंह अपने पार्टी में 5 साल पूरा होने पर जश्न मन रहे है। जहां वह केंद्रीय मंत्री अमित शाह को 16 अगस्त को जींद में होने वाली आस्था रैली में लाने के लिए कामयाब भी हो गए हैं। यह सभी जानते है कि जब जींद में भाजपा की स्थिति और ताकत बेहद कम थी ऐसे समय पर वह चौधरी बीरेंद्र सिंह ही थे जिन्होंने कांग्रेस का दामन छोड़कर भाजपा का दामन थामा और वह भाजपा की ताकत को इतना बलवान करने में कामयाबी हासिल की, जिसके चलते आज भाजपा की स्थिति हुयी कि उस जिले से भाजपा के दो-दो विधायक चुनकर आये हैं।

वैसे बीरेंद्र सिंह को पार्टी हाईकमान तबज्जो इसलिए भी देता है एक तो वह स्ट्रांग होल्ड जाट नेता बनकर साबित हुए, दूसरे हरियाणा में जो जाट आंदोलन भारतीय जनता पार्टी के लिए गले की फांस साबित हो सकती थी उस मुद्दे को हल करने में बीरेंद्र सिंह की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है। क्योंकि वो मुलाकात सभी जानते है जब जाट नेता यशपाल मालिक और अन्य वरिष्ठ जाट नेताओं से अपने घर पर बीरेंद्र सिंह ने अमित शाह से मुलाकत करवाकर मामले को ठंडा करने का प्रयास किया था। सबसे खास बात यह रही कि अभी तक ठंडा पड़ा जाट आरक्षण सरकार को मुसीबत में डाल पाने नाकामयाब साबित हुआ।

वैसे इस ५ साल का जश्न मानाने के लिए बीरेंद्र सिंह ने वही स्थल चुना जिससे उनका नाता 5 साल पहले जुड़ा था। जी हां एकलव्य स्टेडियम। वही एकलव्य स्टेडियम जिसमें 5 साल पहले बीरेंद्र सिंह ने विशालकाय रैली के माध्यम से भाजपा में अपने हजारों कार्यकर्ताओं के साथ भाजपा ज्वाइन की थी। मगर अब स्थिति ऐसी है कि बीरेंद्र सिंह का लोहा पार्टी हाईकमान भी मानने लगी है। सबसे खाास बात यह की चौधरी बीरेंद्र सिंह ने जिस प्रकार से घोषणा की है कि वो राजनीति से संन्यास ले रहे है उसके चलते कोई उन पर पद के लोभी होने का आरोप तो फिलहाल नहीं लगा सकता। मगर अब माना जा रहा है कि हाईकमान में अपनी पेठ दिखाने के लिए वह अमित शाह के वजन के बराबर सदस्यता का फॉर्म उन्हें सौंप कर भाजपा की हरियाणा में शक्ति को बुलंद करने का परिचय देकर, अपना दमखम दिखाएंगे। पार्टी ने भी उन्हें हिसार संसदीय क्षेत्र का प्रभारी बनाया है जिसके चलते टिकट वितरण में उनके सुझावों को भी प्राथमिकता से लिया जायेगा ऐसा माना जा रहा है।

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