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बिखरते विपक्ष को देख भाजपा नेता “मिशन 85” का देख रहे सपना

मुख्यमंत्री 16 अगस्त से 15 दिन तक पूरे प्रदेश में प्रवास करेंगे।

संपादकीय :महेश मेहता

मुख्यमंत्री 16 अगस्त से 15 दिन तक पूरे प्रदेश में प्रवास करेंगे। एक दिन में 6 विधानसभा क्षेत्रों को कवर। इतना ही नहीं भाजपा के प्रत्येक कार्यकर्ता के लिए कम से कम 25 प्राथमिक सदस्य बनाने अनिवार्य। इतना ही नहीं मिस्ड कॉल करके सदस्य बनाने में जुट चुकी भारतीय जनता पार्टी आज विधानसभा चुनाव को लेकर इतनी गंभीरता और सुनियोजित तरीके से काम कर रही है, अगर ऐसा ही रहा तो आगामी विधानसभा चुनाव में विकास भाजपा के सामने कहीं पूरी तरह से ढेर न हो जाए।

शायद भाजपा को इस बात का भरोसा हो रहा है कि विपक्ष विधानसभा चुनाव में सामने टिक नहीं पायेगा इसलिए हाल में हिसार के विधायक कमल गुप्ता ने यह बयान दिया कि इस  बार भले ही मुख्यमंत्री मिशन 75 लेकर चल रहे हैं, मगर भाजपा के कार्यकर्ता इतना काम करें कि इसबार वह 85 पार कर जाए। यह भरोसा अचानक भाजपा के नेताओं को क्यों हो रहा है? कभी सोचा है? इसका कारण है हरियाणा में विपक्ष का कमजोर और दिशाहीन होना। जैसा कि आज नजारा दिख रहा है जींद उपचुनाव, मेयर चुनाव, लोकसभा चुनाव के बाद अब आगामी विधानसभा चुनाव से पहले हरियाणा में विपक्ष एक-एक करके बिखरता हुआ सा प्रतीत हो रहा है।

जहां कांग्रेस में खेमों की  लड़ाई अभी भी बदस्तूर जारी है, वहीं जजपा व इनेलो भी ताश के पत्तों की तरह बिखरती जा रही है। आए दिन इन सभी पार्टियों में से आयाराम-गयाराम की भूमिका बनी हुयी है। इतना ही नहीं सबसे खराब हालत जहां इनेलो की है तो वहीं जजपा छोड़कर भागने वालो की भी फेहरिश्त कम नहीं। दोनों पार्टियों के नेता भाजपा ज्वाइन कर रहे हैं। जजपा नेता और पूर्व सांसद दुष्यंत चौटाला द्वारा नई पार्टी  बनाने के बाद इनेलो राजनीतिक तौर जितना खोखला साबित हुआ है, उसे देखकर लगता तो नहीं कि आगामी विधानसभा चुनाव तक इनेलो अपना अस्तित्व ही बचा पाए। इनेलो पार्टी सुप्रीमो एवं पूर्व सीएम ओम प्रकाश चौटाला ने पार्टी में कई फेरबदल किए लेकिन कोई फायदा नहीं। ओमप्रकाश चौटाला के जेल में जाने के बाद से अभय चौटाला की इनेलो पार्टी का जिक्र सिर्फ विधायकों के पार्टी छोड़कर जाने के बारे में ही हो रहा है। क्योंकि नेता भी समझ चुके हैं अब इनेलो में कुछ नहीं बचा और राजनीतिक भविष्य इस पार्टी में रहकर बरकरार रखना मुश्किल है।

इतना ही नहीं इधर, इनेलो से अलग होकर अपनी पार्टी बनाने वाले दुष्यंत चौटाला की नींद भी उड़ी जब उनकी पार्टी से इस बार लोकसभा चुनाव में उतरी स्वाति यादव ने पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया, इतना ही नहीं खुद दुष्यंत चौटाला के चुनाव में
पराजय के साथ बाकी प्रत्याशियों का लोकसभा क्षेत्र में खराब प्रदर्शन भी उनके सामने चुनौती बनकर साबित हुआ है। विधानसभा चुनाव में अब कुछ महीने बचे हैं ऐसे में अभी जजपा नई-नई नियुक्ति लगातार कर रही है। ताकि नेताओं के पार्टी छोड़ने वाले कार्यक्रम को रोका जा सके। मगर क्या यह नियुक्तियां उनको विधानसभा चुनाव में मजबूती से बढ़त दिलवाने में कामयाब होगी, अभी यह कहना मुश्किल और जल्दबाजी है। मगर हां इनेलो का इस चुनाव में सूपड़ा साफ़ होगा इनमें दो राय नहीं। वहीं कांग्रेस के विधायक भी इस बार चुनाव में अपनी सीट बचाने में कामयाब होते हैं इसकी गुंजाइशे भी कम है। इसलिए इन स्थितियों को देखकर भाजपा को यकीन है कि इस बार वह मिशन 75 को आराम से पार कर मिशन 85 तक भी पहुंच सकती

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