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बिल्लू “रस्सी जल गयी मगर बल नहीं गया”

संपादकीय: महेश मेहता

हिसार टुडे

“रस्सी जल गई, मगर बल नहीं गया।” लोकसभा चुनाव में बुरी तरह से हार के बावजूद इंडियन नेशनल लोकदल के नेता और अपनी नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी गवा चुके अभय चौटाला कहते हैं कि अगर इनेलो पार्टी छोड़कर जाने वाले अपनी भूल स्वीकार कर वापस आते हैं तभी उनको पार्टी में लिया जायेगा, वरना नहीं। इतना ही नहीं उन्होंने यह भी कहा कि वह इस बार विधानसभा चुनाव में वह किसी भी पार्टी से गठबंधन की गुजारिश नहीं करेंगे बल्कि ऐसी स्थिति पैदा करेंगे कि दूसरी पार्टी इनेलो के साथ गठबंधन के लिए कोशिश करे। समझ नहीं आता कि अभय ऐसा कैसे कह सकते हैं। क्या अभय को इस बात का बिलकुल भी अंदाजा नहीं कि अब स्थिति उनके अनुरूप नहीं रह गयी। न केवल नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी गयी है बल्कि पार्टी से भी विधायकों का एक-एक कर लगातार जाने का सिलसिला शुरू है। ऐसे में उनके तेवर को देखकर यह कहना गलत नहीं है कि “रस्सी जल गई, मगर बल नहीं गया।”

दरअसल इन दिनों इनेलो पार्टी की हालत इतनी खस्ता हो चुकी है कि जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। इनेलो में आज तूफ़ान और कोहराम सा छाया हुआ है। हरियाणा में पिछले 15 साल से सत्ता पर काबिज होने की चाहत पाले बैठी इनेलो के लिए आज की घड़ी इतनी धीमी चल रही है कि मानो सत्ता पर काबिज होना अभी भी उनके लिए दूर के ढोल सुहावने जैसा है। आज जहां अभय कहते हैं कि वह किसी के सामने गठबंधन के लिए हाथ नहीं फैलाएंगे, बल्कि हकीकत तो यह है कि आज पार्टी के साथ कोई भी अन्य पार्टी गठबंधन करने को राजी नहीं है।

बता दें कि 2014 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बाद इनेलो ने जिस प्रकार से अपने प्रचार, मुद्दे और लोगों की समस्याओं पर बल देना शुरू किया था, उसके बाद से ऐसा लगने लगा है कि आगामी चुनावों में इनेलो वाकई अन्य पार्टियों को धूल चटाएगी। इतना ही नहीं यह भी लग रहा था कि भाजपा को अगर कोई प्रदेश में कड़ी टक्कर दे सकता है तो वह इनेलो है। मगर इनेलो को न जाने किसकी नजर लगी कि पार्टी में ही ग्रहण लग गया। अभय चौटाला और अजय चौटाला परिवार की राह जुदा हो गयी। जब ओमप्रकाश चौटाला के पोते दुष्यंत चौटाला और दिग्विजय चौटाला ने जननायक जनता पार्टी के नाम से अलग दल बना लिया।

बस उसी दिन के बाद से इनेलो ने आज की तारीख तक एक भी अच्छा दिन नहीं देखा। पहले पार्टी के विधायक, पूर्व सांसद, नेता जजपा में गए और अब विधानसभा चुनाव आते-आते इनेलो के एक-एक कर सभी नेता भाजपा में शामिल हो रहे हैं। पार्टी की इस हालत के पीछे कई कारण है जैसे ओपी चौटाला का जेल में होना, दुष्यंत का अलग पार्टी बनाना, नेताओं के बीच वर्चस्व की लड़ाई होना, पार्टी का मुख्य जनहित के मुद्दों से दूर रहना, किसी जनहित के मुद्दों पर सफलता न मिलना, 5 साल से एसवाईएल का मुद्दा न सुलझना आदि।

अब कोई यह बताये अभय की पार्टी इंडियन नेशनल लोकदल किस कार्य को लेकर इस बार विधानसभा में जनता के सामने अपना मुंह दिखाएगी। कौन से मुद्दों को रखेगी? वैसे सच कहुं तो कभी-कभी लगता है कि आज की परिस्थिति देखकर लगता है कि दुष्यंत चौटाला को पार्टी से निकालना सबसे बड़ी गलती है। कारण है कि आज की स्थिती को देखकर यह प्रतीत हो रहा है कि इस बार विधानसभा चुनाव में इनेलो को अपना खाता खोलना मुश्किल हो जायेगा।

क्योंकि न उनके पास काबिल उम्मीदवार बचेंगे और न ही उन्हें वोट देने वाले मतदाता। यही कारण है कि अभय कह रहे हैं कि जिस कार्यकर्ता को चुनाव लड़ना है वो आगे आये। खैर इनेलो के साथ जजपा के अंदर भी कोई खास रौनक नहीं है। भले ही वो खुद को मजबूत विपक्ष बताता हो मगर अभी भी पार्टी के अंदर सब ठीक नही है। स्वाति यादव पार्टी छोड़ चुकी है।

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