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अशोक तंवर सुभान अल्लाह!

संपादकीय :महेश मेहता

हिसार टुडे

हाल में अशोक तंवर ने जो किया उसे देखकर यह कहना गलत नहीं होगा कि तंवर पक्के राजनीति के महारथी हो चुके हैं। कैसे वह पीछे से आगे फ्रंट फुट में आये और अब भूपेंद्र सिंह हुड्डा को सीधे टक्कर दे रहे हैं। बड़े जोशोखरोश के साथ लोकसभा चुनाव के दौरान हुड्डा के नेतृत्व में बनाये गए समन्वय समिती को लगता है अशोक तंवर ने फीका कर अपने हितचिंतको के साथ नयी फ़ौज के साथ चुनाव योजना एवं प्रबंधन ग्रुप की बैठक बड़े तामझाम के साथ आयोजित किया। बड़ी मजेदार बात है कि आज हरियाणा में हुड्डा के सामने अशोक तंवर ने किसके इशारे में ऐसी परिस्थितियां लाकर खड़ी कर दी हैं कि हुड्डा खुद ही पार्टी छोड़कर चले जाएं। क्योंकि हरियाणा के विधानसभा चुनाव के पहले कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर ने चुनावी तैयारियों को लेकर हुड्डा की समन्वय समिती के तर्ज पर चुनाव योजना एवं प्रबंधन समिती बनायी।

तुरंत इस समिति के बनने के बाद ताबड़तोड़ गुलाम नबी आजाद ने समिती के बर्खास्तगी की बात कर उसे घर बैठकर बनायी समिती करार दिया, मगर गुलाम नबी आजाद को उसके ही तरीके से जवाब देते हुए अशोक तंवर ने चुनाव योजना एवं प्रबंधन समिती का नाम बदलकर ग्रुप किया और एक आलीशान होटल में बैठक का आयोजन कर लिया। क्या इसकी भनक गुलाम नबी आजाद को नहीं थी। क्या गुलाम नबी आजाद मान चुके हैं कि अशोक तंवर जो कर रहे हैं वह सही है? क्या गुलाम नबी आजाद मन चुके हैं कि अशोक पार्टी हाईकमान के इशारे में अशोक तंवर आगे बढ़ रहे हैं? क्या गुलाम नबी आज़ाद की चुप्पी कहीं इस बात का तो सबूत तो नहीं दे रही कि उन्हें पार्टी हाई कमान ने अशोक तंवर के मामले में चुप्पी साधने को कहा। अगर ऐसा नहीं है तो फिर बतौर प्रभारी गुलाम नबी आजाद क्यों नहीं अशोक तंवर के खिलाफ कार्यवाई की जुरर्रत नहीं दिखा पा रहे। सबसे खास बात यह है की कि इस बार अशोक तंवर के इर्द-गिर्द एक खास वह चर्चित चेहरा नजर आया। वह चहेरा था सुदेश अग्रवाल। सुदेश अग्रवाल को अशोक तंवर ने बैठक में इतनी तब्बजो दी जो वहां मौजूद सभी कार्यकर्ताओं ने देखी।

सुदेश के मामले में कहा जाता है दुबई के व्यापारी रहे हैं, उत्तम मैनेजमेंट के लिए उनको माना जाता है, साथ ही वह लोकसभा चुनाव के पहले सुदेश ने अपनी भारतीय समस्त पार्टी का विलय कांग्रेस में कर दिया। यह बात सभी जानते हैं कि कांग्रेस में पार्टी फंड की बेहद जरुरत है। अभी कुछ ही समय में विधानसभा चुनाव आने को हैं। ऐसे में जाहिर है फंडिंग की भी जरुरत है। ऐसे में ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि सुदेश अग्रवाल को इसी खास मुद्दे के चलते तब्बजो दी जा रही है।

इस बैठक में जहां हरियाणा के कई और दिग्गज जैसे पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा, कुलदीप बिश्नोई, सुरजेवाला खेमे के नेताओं के साथ खुद तंवर गुट के भी अनेक नेता बैठक से गायब रहे। न किरण चौधरी और न ही कैप्टन अजय सिंह यादव पहुंचे। मगर फिर भी अशोक तंवर ने किसी की परवाह किये बगैर चुनाव की तैयारी शुरू कर मैदान में कूदने के लिए कार्यकर्ताओं को 10 दिन का अल्टीमेटम दिया। इस दौरान अशोक तंवर ने उन कार्यकर्ताओं की भी कलाई खोलते हुए लोकसभा चुनाव में दगाबजी करने वाले कार्यकर्ताओं को भी चेता दिया। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव में किस कार्यकर्ता ने पार्टी प्रत्याशी का साथ दिया और किसने दूसरों को जिताने में मदद की इसकी भनक उन्हें बखूबी है। उन्होंने कहा कि जो खुद को विधानसभा चुनाव की टिकट का दावेदार मानता है वो पहले रैली व दूसरे आयोजन करके अपना दम दिखाए।

अशोक तंवर से इतना तो साफ हो गया है कि अगर ऐसा होता है तो वह हुड्डा की जी हुजूरी करने वाले वर्तमान विधायक और कार्यकर्ता हाथ मलते रह जायेंगे और टिकट कोई और ले जाएगा। गौरतलब बात है कि अशोक तंवर बार-बार इस बात की सिफारिश कर चुके हैं कि वह इस बार युवा और नए चेहरों को विधानसभा चुनाव में मौका देना चाहते हैं। अगर ऐसा हुआ तो हो सकता है कि हुड्डा के सामने ऐसी परिस्थितियां खड़ी हो जाए जहां उन्हें खुद ही कोई निर्णय लेना पड़ जाए।

पार्टी हाईकमान अब इस सोच के साथ आगे बढ़ रहा है कि अब वह किसी के दबाव के सामने न झुक कर उससे मुक्त होकर काम करना चाहेगी। अगर ऐसा रहा तो हो सकता है की हुड्डा के सारे म मनसुबे धराशाही हो जाएं और इस रणनीति को बनाने के लिए पार्टी हाईकमान भी कहे अशोक तंवर “सुभान अल्लाह”!

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