राजनीतिसंपादकीय

23 की टैंशन मंे धड़कन तेज

Hisar Today

मतगणना के पहले हरियाणा में सियासी पलड़ा किसी का बनने तो किसी का बिगड़ने या बदलने वाला है यही कारण है कि 23 को क्या होगा, यह सोच सोच कर सभी प्रत्याशियों की दिल की धड़कन बढ़ते जा रही है। कोई बीपी की दवा खा रहा है, तो किसी को चिंता के कारण नींद नहीं। काफी प्रत्याशी रिजल्ट से पहले भगवान् के द्वार जाकर माथा टेक रहे है, तो कोई प्रत्याशी बुझे हुए चेहरे के साथ जनता के बिच में जीत के दावे कर रहा है। वैसे जब से एग्जिट पोल ने आकर जोर जोर से मोदी मोदी चिल्ला रही थी , उसी एग्जिट पोल के फर्जी होने की खबरे भी कुछ मीडिया ने प्रमुखता से उठाई। उन्होंने बताया की जितने एग्जिट पोल है उनमें से कुछ ऐसे है जिसके अंदर निवेश भी किसी पार्टी विशेष द्वारा किया गया। इतना ही नहीं कल जैसा की हमने बताया था कि अभिसार शर्मा ने अपने वीडियो में यह बताया था कि काफी मीडिया पर यह दबाव बनाया गया कि वह आकड़े थोड़ा बढ़ा चढ़ा कर बताये जाए। ताकि मतदाता में भाजपा की लहर बरकरार रहे। इसलिए जब एग्जिट पोल पर संदेह उठने लगा तो भाजपा को छोड़ अन्य पार्टी प्रत्याशी यह दावा कर रहे है कि उनकी जीत सुनिश्चित है। इतना ही नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह चुनाव जितने की इतनी चिंता थी की वह केदारनाथ पहुंच गए दर्शन करने , वहां उन्होंने चश्मा पहनकर ध्यान भी किया। आशीर्वाद लिया। खैर अब यह तो फैसला 23 को पता चेलगा कि किसे आर्शीवाद मिला। कौन बना मुकन्दर का सिकंदर।
पता है हमारे हरियाणा में हुड्डा जी एक ऐसी खबर वायरल हुई जिसको सुनने वाला यह सोचने पर मजबूर है की मानो उन्होंने कुछ बड़ा और अनोखा काम कर दिया है। जी हा सुना है सोनीपत के हुड्डा जी के लिए यह चुनाव उनके राजनीतिक कॅरिअर का सबसे कठिन चुनाव माना जा रहा है।यह चुनाव हुड्डा परिवार का राजनीतिक भविष्य के साथ, हरियाणा में हमेशा से छाए जाट -नॉन जाट मुद्दे का जवाब भी बनकर साबित होगा। यह चुनाव यह बताएगा की जनता 2016 के जाट आरक्षण की आग में मुद्दे को पीछे छोड़कर आगे निकल गयी है या उसकी सुलगती आग इस चुनाव के नतीजे के जरिये सामने आएगी की क्या उन्होंने जाट -नॉन जाट का मुद्दा छोड़ दिया या नहीं। इतना ही नहीं दशकों से रोहतक के हुड्डा की गढ़ में अगर भाजपा सेंध लगा पाने में कामयाब होती है तो यह भी हुड्डा परिवार के लिए मुसीबतो से कम नहीं होगा। यही कारण है कि हार जीत का उनको इतना टेंशन सत्ता रहा है कि वह उस देवी के दर्शन करने पहुंचे जिनके बारे में कहा जाता है कि उनके सामने दुश्मन न टिक पाए। वैसे आपको तो पता ही है हुड्डा का राजनीति में दुश्मन कौन है।
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा के देहरा के शत्रुनाशिनी देवी मां बगलामुखी मंदिर में अपनी जीत के लिए हुड्डा ही नहीं कई नेताओं ने अपनी हाजिरी लगा दी है। मगर इस बार माता के द्वार पहुंचे थे हुड्डा जी। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा यहां पहुंचे और अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने तांत्रिक अनुष्ठान भी करवाया। भूपेंद्र सिंह हुड्डा इस बार सोनीपत सीट से लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। बता दे कि इस मंदिर इतना प्रख्यात है कि अपने कार्यकाल में 15 मार्च 2015 को पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भी माँ बगलामुखी मंदिर में दर्शनों उपरांत हवन अनुष्ठान करवाया, जिसके बाद से ये मंदिर पूरे भारत में सुर्खियों में आया. सन 1977 में चुनावों में हार के बाद पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भी प्रदेश के इस प्राचीन मन्दिर में अनुष्ठान करवाया। उसके बाद वह फिर दोबारा सत्ता में आई और 1980 में देश की प्रधानमंत्री बनी।
क्या हुड्डा को भी \यही लगता है कि वह भी सोनीपत और रोहतक का गढ़ बचाने में कामयाब होंगे। `वैसे यह आस्था अपनी अपनी है। जब मोदी जी केदारनाथ जाकर माथा ठीक सकते है तो हुड्डा क्यों नहीं।

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