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हुड्डा के गढ़ में सेंध लगा पाएंगे आप नेता नवीन “जयहिंद”

Hisar Today

हरियाणा कि सबसे हॉट सीट रोहतक की मानी जा रही है। रोहतक में इस बार राज्य के दो प्रभावशाली राजनीतिक घरानों – हुड्डा और चौटाला की प्रतिष्ठा दांव पर होगी। वैसे रोहतक सीट इस समय तो कांग्रेस के कब्जे में है और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बेटे दीपेंद्र हुड्डा यहां से सांसद हैं। पिछले अढाई दशक से यह सीट कांग्रेस का मजबूत गढ़ बनी हुई है और हुड्डा परिवार का यहां लंबे समय से दबदबा कायम रहा हैं। कारगिल युद्ध के बाद 1999 में हुए चुनावों की लहर में इनेलो उम्मीदवार कैप्टन इंद्रसिंह यहां से विजय रहे थे। इस के अलावा 1991 से ही यह सीट पूरी तरह हुड्डा परिवार के कब्जे में है। वर्ष 2019 के चुनाव में भी यहां से हुड्डा परिवार से का ही कोई व्यक्ति – पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, उनकी पत्नी श्रीमती आशा हुड्डा और इन दोनों के पुत्र दीपेंद्र सिंह हुड्डा में से ही कोई एक कांग्रेस की तरफ से चुनाव मैदान में उतरेगा, यह तय है। इन तीनों में से पार्टी किसे अपना उम्मीदवार बनाएगी इसका फैसला कांग्रेस आलाकमान वक्त आने पर करेगी। अन्य किसी उम्मीदावर की रोहतक में चर्चा नहीं है।

पिछली बार बीजेपी ने रोहतक से हरियाणा के कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ को दीपेंद्र सिंह हुड्डा के मुकाबले में चुनावी अखाड़े में उतारा था, लेकिन धनखड़ का सिक्का मोदी की राष्ट्रव्यापी लहर में भी यहां पर नहीं चल पाया था। इस बार धनखड़ शायद ही लोकसभा का चुनाव लड़ने में कोई रूचि लें। बीजेपी की तरफ से इस बार महम क्षेत्र के नेता शमशेर खरकडा यहां पर ताल ठोक सकते है। पिछली बार शमशेर खरकडा इनेलो का चुनाव निशान ‘चश्मा’ पहनकर चुनावी अखाड़े में कूदे थे, लेकिन उनकी जमानत भी मुश्किल से बच पाई थी। महम क्षेत्र में सक्रिय एक अन्य नेता बलराज कुंडू भी लोकसभा चुनाव में बीजेपी के उम्मीदवार हो सकते हैं और वे पिछले कई वर्षों से समाज सेवा के जरिए जनता में अपनी पैठ और पहचान बनाने में जुटे हैं। बीजेपी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक रोहतक में हुड्डा परिवार के वर्चस्व को तोड़ने के लिए पार्टी पूर्व आक्रामक बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग पर भी दांव लगा सकती है जो कि जाट समुदाय से भी है ओर युवाओं में खासें लोकप्रिय भी है। उधर, इंडियन नेशनल लोकदल के नेता भी रोहतक के अपने पुराने गढ़ को फिर से फतह करने के लिए छटपटा रहे हैं।

रोहतक में इनेलो के पास ढंग का फिल्हाल एक ही उम्मीदवार नजर आता है और वह हैं पार्टी के जिलाध्यक्ष – सतीश नांदल। सतीश नांदल लोकदल के कार्यकर्ताओं में खासे लोकप्रिय है और उन्होंने पूरे लोकसभा क्षेत्र में लगातार सक्रियता से अपनी अच्छी खासी पहचान बनाई है। इस बार बहुजन समाज पार्टी के साथ गठबंधन होने से इनेलो उम्मीदवार पहले से बेहतर प्रदर्शन करने की स्थिति में भी आ सकता है। इनेलो के पास सतीश नांदल के मुकाबले का कोई और उम्मीदवार अभी दूर-दूर तक नजर नहीं आता। रोहतक के रणक्षेत्र में आम आदमी पार्टी को नजर अंदाज करना भी ठीक नहीं होगा। पिछली बार ‘आप’ के उम्मीदवार नवीन जयहिंद ने नया चेहरा होने के बावजूद 60 हजार के लगभग मत हासिल करके अपना अच्छा खासा प्रभाव छोडा था। आप नेतृत्व इस बार फिर से नवीन जयहिंद पर ही अपना दांव खेल सकता हैं। इस दफा नवीन के पास अनुभव भी है, साधन भी है और कार्यकर्ताओं की एक बड़ी वाहिनी भी। वह जीतने की स्थिति में भले ही न हो लेकिन किसी बड़े नेता की हार में अहम भूमिका वह जरूर निभा सकते हैं। यदि नवीन जयहिंद क्षेत्र के हिसाब से मुद्दों पर जनआंदोलन करें तो वे आमजन की आवाज बन सकते हैं। लेकिन लगता है अभी दिल्ली दूर है।

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