संपादकीय

हिसार में वंशवाद के बीच मुकाबला

दोस्तों मैंने सुना है कि कुछ पार्टी हमेशा कहती हंै कि हम वंशवाद को बढ़ावा नहीं देते। आपको तो पता ही चल गया होगा कि मैं किसकी बात कर रहा हुं। भाजपा को लेकर लोगों के मन में यह धारणा जबरन बिठाई गयी है कि राजनीति में उन्होंने वंशवाद नामक जहर को खत्म कर दिया है। अक्सर पीएम मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को हमने कई बार कांग्रेस पर प्रहार करते हुए देखा है, कांग्रेस को वंशवाद की पार्टी करार देते हुए राहुल गांधी और सोनिया गांधी के साथ इन दिनों प्रियंका गांधी पर भी भाजपा के कुछ मंत्री परिवारवाद का आरोप लगाते हुए कह रहे हंै कि यह देखो कांग्रेस और यह देखो हमारी पार्टी भाजपा। जहां हमने परिवारवाद को खत्म कर दिया। मगर महाशय जी कृपया हमारे हिसार तो आओ, आपको सब नजारा दिखेगा। क्योंकि यहां आपकी पार्टी ही नहीं दूसरे पार्टीयों के नेता भी वंशवाद को बढ़ावा दे रहे हैं।
जी हां, सही सुना आपने हिसार। हिसार लोकसभा सीट के इतिहास में पहली बार होगा जब सभी पार्टी ने बेटों को चुनावी मैदान में उतारा है। भारतीय जनता पार्टी ने बीरेंद्र सिंह के बेटे बृजेन्द्र सिंह को खड़ा करके परिवारवाद पर मुहर लगाई। वैसे बीरेंद्र 73 साल के है और भाजपा की नीतियों के अनुसार 75 साल बाद वैसे भी वह चुनाव के लिए एलिजबल नहीं होंगे तो जाते-जाते उन्होंने अपने बेटे बृजेन्द्र सिंह को अपने जगह सेट कर दिया और उसके लिए टिकट ले आये। ऐसे में भाजपा वाले कितना बोले बीरेंद्र सिंह ने इस्तीफा दिया, तो यह तर्क संगत बात लगती है कि इस्तीफा दिया किसको और क्या वो मंजूर हुआ ? अगली बारी आती है मौजूदा सांसद दुष्यंत की। दुष्यंत जिनके खुद के दादा और परदादा राजनीति के पक्के खिलाड़ी हैं। दुष्यंत ओमप्रकाश चौटाला के बेटे अजय चौटाला के बेटे हैं। उन्होंने अभी नई पार्टी जजपा का गठन किया है। ऐसा लगा था कि शायद दुष्यंत परिवारवाद को रोकेंगे। मगर वह खुद हिसार से और उनका भाई सोनीपत से चुनावी मैदान में किस्मत आजमाने उतरे हैं। यहीं फिर एक और बार परिवारवाद। बात आती है कांग्रेस की। जो खुद को सबसे पुरानी पार्टी कहती है। आज उन्होंने भी स्वर्गीय भजनलाल के बेटे कुलदीप बिश्नोई के पुत्र भव्य बिश्नोई अर्थात भजनलाल परिवार की तीसरी पीढ़ी को भी चुनावी मैदान में उतारकर चुनाव में वंशवाद का दंश देना अभी भी बरकरार रखा है। क्या लगता है इन पार्टियों को परिवारवाद के खिलाफ बात करने वाली पार्टी का जो हाल है वही हाल सभी पार्टीयों का है। सबको बस अपनी राजनीतिक कुर्सी और सत्ता से प्यार है।
पाठकों मैं आपसे कहना चाहूंगा कि आप किसी भी पार्टी के बहकावे में मत आयंे। यहां कोई सच्चा नहीं। उनको पता है जनता को मुर्ख बनाया जा सकता है, मगर क्या आप मुर्ख बनेंगे ? मुझे तो लगता है कि आज की पीढ़ी बहुत ज्यादा जागरूक है उसे पता है कि कौनसी पार्टी सत्ता में आने के लिए कौनसा दांव खेल रही है। इसलिए अब से आपसे अनुरोध है कि कभी कोई कहे की हमारी पार्टी ने परिवारवाद खत्म कर दिया तो उनका आप खुद ही जवाब देना कि ओ साहब झूट मत बोलो।
चुनाव आया है अब ऐसे ही झूट बिकेंगे मंचो में, भाषणों में, वादों में और जनता बदलाव की उम्मीद करते हुए उसे सच मान लेगी। कृपया आप से निवेदन है ऐसे उम्मीदवार को वोट दें जो आपको लगता है उसने आपका काम किया है। क्योंकि ऐसा न हो कि आप ऐसा प्रत्याशी चुने जो आपको पूछता क्या बिठाता भी नहीं। वोट की ताकत को समझें और परिवारवाद की बात करने वालों को कह देना आप कौनसे दूध के धुले हैं। क्योंकि इस बार हिसार लोकसभा में जंग प्रत्याशियों के बीच नहीं वंशवाद और परिवावाद के बीच है। नेताजी सुन लो यह पब्लिक है सब जानती है। कितना भी कह लो सब एक जैसे हो।

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