राजनीतिसंपादकीय

हरियाणा में ‘नशा’ बिगाड़ सकता है भाजपा का सियासी खेल

Hisar Today

पंजाब की तरह हरियाणा में भी लगातार नशे का साम्राज्य कायम होता जा रहा है। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से भारी मात्रा में नशे की खेप पकड़ी जा रही है। इस समस्या से प्रदेश को कैसे बचाया जाये ये सब छोड़ कर सत्ता पक्ष व विपक्ष एक दूसरे पर इन मौत के सौदागरों को शह देने का आरोप लगा रहे है। मुख्य विपक्षी पार्टी इनेलो इसके लिए सत्ताधारी पार्टी भाजपा को जिम्मेदार बता रही है। नेता प्रतिपक्ष अभय चौटाला ने नशे के अवैध कारोबार में मुख्यमंत्री मनोहर लाल के करीबियों का लिप्त होना बताया था और जल्द ही इन सब का नाम उजागर करने की बात की थी। विपक्ष के इन गंभीर आरोपों पर अपनी सरकार का बचाव करने और जवाब देने के लिए स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज को सामने कर दिया। अनिल विज ने राज्य में बढ़ते नशे के लिए इनेलो पार्टी को ही जिम्मेदार ठहराया था। विज का कहना था कि अगर इनेलो जानती है कि ये नशा कौन फैला रहे तो, जनता के सामने उनका नाम उजागर करें।

अगर वो छुपाते हैं तो बताये इस में आखिर क्या राज है। अनिल विज ने कहा कि जब इनेलो की सरकार थी, तब भी ये लोग रहे होंगे तो इन्होने उन्हें क्यों नहीं पकड़ा। अगर इन्हें पता है कि नशे का कारोबार कौन कर रहा है और कौन से पुलिस वाले उनकी मदद कर रहे हैं तो आप अभी तक पर्दा क्यों डाल रहे हैं, आखिर इसका क्या राज है। बता दे कि 2016 में इनेलों नेता अभय चौटाला ने भाजपा पर जमकर बरसते हुए उन्होंने हरियाणा में बढ रहे नशे की बात पर स्वास्थ्य मंत्री के ब्यान पर कहा था कि स्वास्थ्य मंत्री का स्वयं का इलाज होने वाला है और उन्हें आगरा भेजने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यह तो भाजपा अपनी नाकामी छिपाने के लिए ऐसे हथकंडे अपना रही है। जब से विपक्ष ने उन्हें घेरने की कोशिश की उसके बाद से भाजपा सरकार व मुख्यमंत्री ने हरियाणा में नशा के कारोबार के खिलाफ “ऑपरेशन क्लीन” शुरू कर दिया है। हालांकि अब देखने योग्य बात यह है कि क्या हरियाणा सरकार आगामी चुनाव के पूर्व हरियाणा से नशा कारोबार को ख़त्म कर पाती है या विपक्ष के हाथो मुद्दा दे जाती है। फ़िलहाल हरियाणा सहित देश में अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनावों को लेकर भाजपा सधी हुई रणनीति के तहत आगे बढ़ रही है।

उत्तर भारत के राज्यों में नशे के बढ़ते प्रकोप का हर हाल में खात्मा करने का कार्ड भाजपा की ओर से खेल दिया गया है।हरियाणा में भी नशा तस्करों का जाल तेजी से फैला है, हिमाचल प्रदेश भी इससे अछूता नहीं है। चंडीगढ़, उत्तराखंड, दिल्ली व राजस्थान में नशाखोरी की समस्या इतनी गंभीर नहीं, जितनी पंजाब के बाद हरियाणा और हिमाचल में बनती जा रही है। पंजाब के बाद अब हरियाणा भी नशे की आग में जलना शुरू हो चुका है। हरियाणा की युवा पीढ़ी भी पंजाब की तरह नशे में डूबकर न रह जाए, इसे देखते हुए सीएम मनोहर लाल नशे के खिलाफ जंग में मुख्य भूमिका में आए हैं। उन्होंने नशे के खिलाफ उत्तर भारत के राज्यों को न केवल एक मंच पर लाने का काम किया, बल्कि नशे के खिलाफ जंग को लेकर शुरू हुई क्रेडिट वार में भी बाजी मार गए। नशे के खात्मे के लिए रणनीति बनाने को बुलाई गई पहली क्षेत्रीय कांफ्रेंस की मेजबानी भी हरियाणा ने की। प्रदेश में इस समय भाजपा की सरकार है।

हिमाचल, राजस्थान, उत्तराखंड भी भाजपा शासित राज्य हैं।पंजाब की राजनीति में नशे का मुद्दा चुनाव में अहम भूमिका निभाता है। नशे के मुद्दे को चुनावी रण में खूब भुनाया। बीते विधानसभा चुनाव में भी नशे का मुद्दा मुख्य रहा। कांग्रेस इस मुद्दे पर ठोस कार्रवाई का आश्वासन देकर सत्ता पाने में कामयाब रही। कैप्टन अमरिंदर सिंह सीएम की कुर्सी संभालने के बाद ही नशे के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई में जुटे हुए हैं। मगर, उन्हें व्यापक समर्थन नहीं मिल रहा था। अब यही स्थिति हरियाणा की है , यहां भी नशे का कारोबार इतना बढ़ रहा है कि अब इसके खिलाफ हरियाणा सरकार को भी गंभीर रहना “जरुरी और मज़बूरी” हो गयी है, क्यूंकि उसके खिलाफ वह चुनाव आसानी से जित नहीं पाएंगे। इसलिए हरियाणा की भाजपा सरकार इस मामले में बेहद गंभीर है और जगह जगह रेड मारकर अपनी सरकार के लिए सबसे बड़ा खतरा नशे का कारोबार को खत्म करने में लगी हुई है।

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