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सोशल मीडिया इफेक्ट:फेक खबरों के कारण गुजरात में उद्योग धंधे बंद होने के कगार पर

Hisar Today

जम्मू में कश्मीरी पंडितो का हाल। हाल में जिस प्रकार मोदी के घर अर्थात गुजरात में उत्तर भारतीयों के पलायन की बढ़ती घटनाओं ने जहां सरकार पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है वहीं मोदी के राज में कानून व्यवस्था के इस घटना की बलि आज बेगुनाह लोग चढ़ रहे हैं। दरअसल गुजरात में बलात्कार की एक घटना ने गैर-गुजरातियों के लिए प्रदेश में मुश्किल के हालत बना दिए हैं। साबरकांठा जिले में एक गैर-गुजराती को 14 महीनें की बच्ची के बलात्कार के मामले में गिरफ्तार किया गया। इसके बाद वहां स्थानीय लोगों में उत्तर भारत से आकर रह रहे लोगों के लिए गुस्सा चरम पर बढ़ रहा है। जिले के हिम्मतनगर में रह रहे बाहरी मजदूरों को शहर छोड़ने की धमकियां दी जा रही है। पुलिस के मुताबिक, इस घटना के बाद बाहरियों पर हमले की 18 घटनाएं हो चुकी हैं। साबरकांठा जिले के हिम्मतनगर में रह रहे बाहरी मजदूरों में डर का माहौल है और ये डर पास के जिलों में भी फैल रहा है। लोग जान का खतरा देख अपने घर छोड़कर गुजरात से बाहर पलायन करने लगे है।

यह स्थिति न आये इसकी जिम्मेदारी कहीं न कहीं अधिकारियों की है मगर वह भी हमेशा कि तरह अपनी जिम्मेदारी यह कह कर झाड़ रहे है कि व्हॉट्सएप और सोशल मीडिया के जरिये धमकी भरे संदेश फैलाए गए हैं और उसकी वजह से ऐसा माहौल बना है। गुजरात पुलिस ने गिरफ्तारी और गश्त बढ़ाने का काम शुरू कर दिया है। लेकिन लोग पुलिस की कोशिशों को नाकाफी बता रहे हैं। हालांकि कांग्रेस नेता और क्षत्रिय ठाकोर सेना अल्पेश ठाकोर ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। दरअसल 28 सितंबर को साबरकांठा जिले के हिम्मतनगर के ढुंढर गांव में 14 महीने की एक बच्ची से बलात्कार किया गया था। इस मामले में 19 साल के एक फैक्ट्री मजदूर रवींद्र गोंडे को गिरफ्तार किया गया। रवींद्र जिस फैक्ट्री में काम करता था, उसी के सामने छोटी सी दुकान पर चाय-नाश्ता करने जाता था। पुलिस के मुताबिक, उसी दुकान के पास सो रही बच्ची को खेतों में ले जाकर रवींद्र ने बलात्कार किया और फिर फरार हो गया।

घटना के बाद बच्ची का अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में इलाज चल रहा है। अस्पताल के पीडियाट्रिक विभाग के प्रमुख डॉ. राजेंद्र जोशी ने बताया, “काफी खून बह जाने से बच्ची की स्थिति नाजुक थी लेकिन अब वह खतरे से बाहर है।” बच्ची के दादा अमर सिंह (बदला हुआ नाम) का कहना है, “हमारे घर पर पर तो विपदा आ गई है। मेरी पोती के साथ ऐसा हुआ। उसके बाद पुलिस ने सुरक्षा कारणों से हमारी दुकान बंद करवा दी। कमाई बंद हो गई है। दो वक्त के खाने की भी दिक्कत है।” अभियुक्त रवींद्र गोंडे की गिरफ्तारी के बाद ये मुद्दा ‘गुजराती बनाम बाहरी’ में तब्दील हो गया है। इस स्थिति के लिए सबसे बड़ा योगदान है सोशल मीडिया पर नफरत भरे संदेशों का। जी हां ऐसी कितनी ही घटनाये हुई हैं जो केवल सोशल मीडिया और व्हाट्सअप मैसेज के कारण ही गले की फांस बनी हुई है। याद है बच्चा चोर गिरोह की अफवाह। आज सोशल मीडिया में नफरत के बीज बोने वाले कुछ शरारती तत्वों के कारण ही मॉब लिंचिंग की घटनाएं देश भर में बढ़ी तेजी से बढ़ रही हैं। इन संदेशो के कारण लोगो को अपनी जान से हाथ धोना पढ़ रहा है।

इस इलाके में करीब सवा लाख बाहरी लोग रहते हैं। अब तक अकेले गुजरात में बच्ची से बलात्कार मामले में सोशल मीडिया में फैले भड़काऊ संदेशो के कारण बाहरी लोगों पर हमले की 18 घटनाएं हो चुकी हैं जिसके चलते डर के मारे बाहरी लोग अपना घर छोड़कर जा रहे हैं। यह महज एक घटना नहीं सोशल मीडिया और व्हाट्सअप के बलि कई प्रदेश के लोग चढ़े हैं। बच्चा चोरी गिरोह की हवा सोशल मीडिया और व्हाट्सअप में इतनी फैली की लोगो ने एक दूसरे की जा लेनी शुरू कर दिया। सबसे पहले आपको बताते है महाराष्ट्र की घटनायें। जहां रानीपेड़ा- महाराष्ट्र में पांच लोगों की हाल ही में पीट-पीट कर हत्या कर दी गई। मामला रानीपाड़ा इलाके का है। महाराष्ट्र राज्य परिवहन की बस से पांच लोगों के साथ कुछ और लोग उतरे। उनमें से किसी एक ने लड़की से बोलने की कोशिश की। यहां के लोगों के दिमाग पर बच्चा चोर गिरोह के बारे में व्हाट्सएप में पढ़ी खबर का ऐसा असर था की कि लोगों ने कहना शुरू कर दिया कि बस से उतरे लोग बच्चा चुराने वाले गिरोह से ताल्लुक रखते हैं। बस क्या था सभी ने मिलकर बेगुनाह को पीटा।

पुलिस का कहना है कि पीड़ित लोगों को अस्पताल ले जाया गया लेकिन वो दम तोड़ चुके थे। वहीं ऐसी ही घटना महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले के महासवाड़ गांव में भी घटी। जहां अपनी इनोवा कार से जा रहे पूर्व नगर सेवक को लोगों ने बुरी तरह पीटा और फिर कार चला दी। वहीं रात करीब 11.30 बजे मालेगांव के आजाद नगर में इसी मैसेज के शिकार लोगों ने एक महिला और एक पुरुष को बच्चा चोर समझ कर एक बच्चे के साथ पकड़ लिया। भीड़ को शक था कि महिला और पुरुष बच्चा चोर हैं और उनके पास मौजूद बच्चा वे कहीं से चुराकर लाए हैं। जान बचाने के लिए ये दंपति घर में घुसे लेकिन भीड़ ने उस पर भी पत्थर फेंकने शुरू कर दिए। पुलिस वहां पहुंची तो उस पर भी हमला हुआ। किसी तरह लाठीचार्ज के बाद उन्हें बचाया जा सका। जिन पर आरोप लगा था वो दरअसल बच्चे के मां बाप थे। पुलिस सूत्रों के मुताबिक इन दोनों घटनाओं के पीछे एक खास वाट्सएप मैसेज था। वही गुजरात के अहमदाबाद में भी कुछ इसी प्रकार के मैसेज के शिकार लोगों ने अहमदाबाद के वाडज में चार महिलाओं को सरेआम पीटा था। दिमाग पर मैसेज का असर था और उन महिलाओं को बच्चा चोर समझ लिया गया। हालांकि, महिलाओं के पास उस वक्त कोई बच्चा नहीं था। दरअसल गुजरात के कुछ इलाकों में सोशल मीडिया पर बच्चा चोरी गैंग की अफवाह वायरल हो रही थीं। जिस वजह से महिलाओं पर बच्चा चोरी का शक जाहिर करते हुए भीड़ ने इतना पीटा कि उनमें से एक महिला की मौत हो गई।

गुजरात के साबरकांठा में एक दिव्यांग लड़के को बच्चा चोर समझकर लोगों ने इतना पीटा कि वो अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच अपनी सांसें गिनने लगा। वहीं सूरत में भी बच्चा चोरी के आरोप में एक मां को अपनी बेटी का ही चोर बताकर पीट दिया गया। वही सूरत में इसी मैसेज की शिकार महिला को बुरी तरह से पीटा गया। जिसे पुलिस ने बीच में आकर बचाया। जब उसका पति थाने पहुंचा तो पता चला कि ये बच्चा उसी महिला का था। इधर, एक महिला को इस हद तक पीटा गया कि उसकी मौत हो गई। असम के कारबी आंगलोंग इलाके में जून महीने में ही भीड़ ने बच्चा चोर होने के शक में 2 युवकों को पीट-पीटकर मार डाला। बच्चा चुराने वाले एक गैंग से जुड़ी अफवाह सोशल मीडिया पर फैलने के बाद हत्यारी भीड़ ने इन दोनों पर हमला किया। ये दोनों युवक अभिजीत नाथ और नीलोत्पल दास कार्बी ऑन्गलॉन्ग इलाके में छुट्टी मना रहे थे। दोनों गुवाहाटी से आए थे। लोगों के गुस्से के पीछे यही वाट्सएप मैसेज था। इतना ही नहीं झारखंड में भी सात लोगों की हत्या बच्चा चोरी के शक में हत्या कर दी गई थी। मरने वालों में झारखंड के दो युवक शामिल थे। जिन्हें यह कहकर अफवाह फैलाई गई कि वो बच्चा चोर गिरोह से हैं।

तमिलनाडु के त्रिची जिले के पेरुमापत्ति गांव में दो मुस्लिम युवकों को बच्चा चोरी के शक में दो लोगों की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। जांच में पता लगा कि दोनों युवक व्यापारी थे और गांव में व्यापार के सिलसिले में आए थे। इन्हें मैसेज से प्रभावित लोगों ने बच्चा चोर समझ लिया था। चेन्नई शहर के तेयनामपेट इलाके में भी भीड़ ने बच्चा चोरी करने के संदेह में बिहार के दो मजदूरों को बुरी तरह से पीट दिया था। इस घटना में दोनों मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस की मानें तो दोनों मजदूर चेन्नई मेट्रो के लिए काम करते हैं।

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