संपादकीय

सीएम साहब! आप भी भूले भाषा की मर्यादा!

महेश मेहता | हिसार टुडे
भाई मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर क्या कह रहे हैं, कांग्रेस के नेताओं और समर्थकों ने सुनकर क्या उसे अनसुना कर दिया है क्या? वैसे मुझे पता है बौखलाहट इनदिनों सभी पार्टीयों को है कि उन्हें अपनी पार्टी का पीएम बनाना है। मगर जब मैं प्रचार का तरीका देख रहा हूं या सुन और पढ़ रहा हूं वह देख ताज्जुब होता है कि एक तरफ भाजपा कहती है कि पीएम मोदी को दुबारा बनाओ तो वही दूसरी पार्टी कहती है कि मोदी हटाओ। मगर यह पार्टी यह नहीं कहती कि राहुल को पीएम बनाओ। क्यों? क्यों नहीं यह लोग यह कहकर वोट मंगाते कि राहुल गांधी को पीएम बनाओ। वैसे उनका छोड़ो तो भाजपा क्यों नहीं कहती कि हमारे काम देख कर वोट दो।
पता ही होगा कि हरियाणा के मुख्यमंत्री जगह-जगह प्रचार करते हुए कांग्रेस पर तंज कसते हुए कह रहे हैं कि कांग्रेस प्रत्याशी पार्टी के नाम पर वोट तो मांग रहे हैं, पर राहुल गांधी से परहेज कर रहे हैं।
आज किसान, युवा, श्रमिक, महिला हर वर्ग से एक ही आवाज निकल कर सामने आ रही है कि अगला प्रधानमंत्री भी बनेगा तो मोदी ही। मुख्यमंत्री जी चलो आपकी बात सराखों पर, मगर अपने प्रत्याशी को यह तो बोलो कि कब तक पीएम मोदी के नाम पर वोट मांगते रहोगे। कभी तो अपनी पार्टी के प्रत्याशी को बोलो कि कभी अपने काम के नाम पर भी वोट मांग ले। मुझे पता है यह आपके so called प्रत्याशी और नेताओं से हो न सकेगा। भाई हमने तो सुना है कि आपकी पार्टी का कोई प्रत्याशी मीडिया के सामने कभी सर पटकता है, कभी कान पकड़ता है, आपके एक प्रत्याशी को तो जनता के रोष का सामना करना पड़ रहा है, आपके एक प्रत्याशी को बिना कार्य किये अपने पिता के नाम पर वोट मांगना पड़ रहा है, किसी को गांव का बहिष्कार का सामना करना पड़ रहा है तो वहीं मुख्यमंत्री जी सुना है आपको भी पत्रकारों के बहिष्कार का सामना करना पड़ा। अब समझे कि यह तो वही बात हो गयी कि “शीशे के घरों में रहने वाले कभी दुसरों के घरों में पत्थर नहीं फेंका करते” खैर मैं ज्यादा नहीं बोलूंगा और न ही नसीहत दूंगा। क्योंकि यह जनता भी देख चुकी है कि माहौल कैसा चल रहा है। कौन किसके नाम पर वोट मांग रहा है। वहीं एक बात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि एक और पार्टी ऐसी है जो अपने पार्टी अध्यक्ष का नाम कम लेकर खुद के प्रचार में ज्यादा लग गयी है। वैसे चुनाव के दिन जितने नजदीक आ रहे हैं भाषा शैली और लहजा बदलता जा रहा है और तीखे तेवर और इन तीखे तेवरों के कारण “आ बैल मुझे मार” की कहावत चरितार्थ होती है।
हाल में बड़े आवेश में आकर मुख्यमंत्री जी द्वारा दिए गए बयान पर दहिया खाप ने कड़े शब्दों में निंदा की है। दरहसल मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने हाल में खरखौदा की सब्जी मंडी में विजय संकल्प रैली को संबोधित करते हुए कांग्रेस उम्मीदवार एवं पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्‌डा पर तंज कसते हुए कहा कि आज हालात ऐसे हैं कि कांग्रेस प्रत्याशी पार्टी के नाम पर वोट मांग रहे हैं, लेकिन राहुल गांधी के नाम पर वोट मांगने से हिचक रहे हैं। चूंकि हुड्‌डा की ससुराल भी खरखौदा के ही मटिंडू गांव में है, तो इस पर सीएम ने चुटकी ली और कहा कि ‘बिगड़ैल जमाई’ का इलाज सोनीपत की जनता करना जानती है। बस मुख्यमंत्री की इसी भाषा का मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्‌टर द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्‌डा पर की गई टिप्पणी को लेकर दहिया खाप ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
दहिया खाप ने बैठक करके मुख्यमंत्री के बयान की कड़ी निंदा की। साथ ही सीएम से माफी मांगने और बयान वापस लेने की मांग की है। अगर ऐसा नहीं हाेता तो खाप इसका विरोध करेगी। आयी बात समझ में कि क्यों कहा मैंने भाषा की मर्यादा। सुना है कि दहिया खाप ने सीएम के बयान की कड़ी निंदा की। खाप के प्रमुख सुरेंद्र दहिया ने कहा कि सीएम को इस तरह के बयान देना शोभा नहीं देता है। उन्होंने कहा कि भले ही सीएम स्वयं विवाहित नहीं है, लेकिन उन्हें सामाजिक रीति-रिवाज का ज्ञान होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि दामाद का समाज में क्या महत्व होता है, यह सीएम को भली प्रकार से पता है। इसके बावजूद उन्होंने ‘बिगडैल दामाद’ की टिप्पणी करके सामाजिक रिश्तों पर प्रहार किया है। मगर अब मेरा सवाल है कि अब जो इन्होने कहा क्या वो भाषा सही है? भाई माथापच्ची हो जाती है इन भाषाओं को सुनकर और उसके बारे में स्पष्टीकरण सुनकर।

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